पश्चिम विदर्भ के सिंचाई प्रकल्पों में तेजी से घट रहा जलसंग्रह

अपर वर्धा बांध में नौ दिनों में 19.44 दलघमी पानी कम

खडकपूर्णा बांध का उपयोगी जलसंग्रह शून्य पर पहुंचा
अमरावती /दि. 15- पश्चिम विदर्भ में लौटते मानसून की बेरुखी का असर अब सिंचाई परियोजनाओं के जलसंग्रह पर दिखाई देने लगा है. बारिश नहीं होने के कारण बांधों और अन्य सिंचाई परियोजनाओं में उपलब्ध उपयोगी जलसंग्रह तेजी से घट रहा है. जलसंपदा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 3 से 12 अक्तूबर के बीच अमरावती विभाग की 287 परियोजनाओं का कुल जलसंग्रह 62.07 प्रतिशत से घटकर 60.27 प्रतिशत पर आ गया. इस गिरावट ने आगामी दिनों में सिंचाई और पेयजल नियोजन को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
* नौ बड़े प्रकल्पों में भी जलस्तर घटा
अमरावती विभाग के नौ बड़े सिंचाई प्रकल्पों में 3 अक्तूबर को कुल 833.21 दलघमी पानी उपलब्ध था, जो 59.52 प्रतिशत जलसंग्रह के बराबर था. 12 अक्तूबर तक यह घटकर 797.20 दलघमी यानी 56.97 प्रतिशत रह गया. इस अवधि में बड़े प्रकल्पों के जलसंग्रह में लगभग 36 दलघमी की कमी दर्ज की गई. जलसंग्रह में गिरावट का असर विभाग के विभिन्न जिलों की परियोजनाओं में दिखाई दे रहा है. यवतमाल जिले के पूस बांध, अरुणावती बांध और बेंबला परियोजना के साथ ही अकोला जिले के काटेपूर्णा प्रकल्प में भी पानी कम हुआ है. बुलढाणा जिले के पेनटाकली और नलगंगा प्रकल्पों में जलसंग्रह घटने से भी चिंता बढ़ी है.
* अप्पर वर्धा बांध में 19.44 दलघमी की कमी
अमरावती जिले के प्रमुख अपर वर्धा बांध में 3 अक्तूबर को 329.49 दलघमी पानी उपलब्ध था, जो कुल क्षमता का 58.42 प्रतिशत था. 12 अक्तूबर तक जलसंग्रह घटकर 310.05 दलघमी यानी 54.97 प्रतिशत रह गया. इस तरह केवल नौ दिनों में बांध का उपयोगी जलसंग्रह 19.44 दलघमी कम हुआ. बता दें कि अप्पर वर्धा बांध अमरावती क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है. ऐसे में लौटते मानसून की बारिश में देरी और लगातार घटते जलसाठे के कारण उपलब्ध पानी के नियोजन की जरूरत बढ़ गई है.
* खडकपूर्णा प्रकल्प का उपयोगी जलसंग्रह शून्य
बुलढाणा जिले के खडकपूर्णा प्रकल्प की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है. यहां उपयोगी जलसंग्रह शून्य प्रतिशत पर पहुंच गया है. अक्तूबर महीने में ही उपयोगी जलसंग्रह समाप्त होने से आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को लेकर चुनौती खड़ी हो सकती है.
* लौटते मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता
पश्चिम विदर्भ में बारिश की कमी का असर अब जलसंपदा परियोजनाओं के आंकड़ों में स्पष्ट होने लगा है. विभाग की 287 परियोजनाओं में जलसंग्रह की गिरावट और बड़े बांधों में लगातार कम हो रहे पानी के कारण उपलब्ध जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करना जरूरी हो गया है. यदि आगे भी पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो सिंचाई के साथ-साथ पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशासन को जल नियोजन पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है.

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