खरीफ फसलों को बचाने अप्पर वर्धा बांध से एक बार छोड़ा जाएगा पानी
सिंचाई चक्र हेतु बांध से 50 दलघमी पानी छोड़ने की तैयारी, 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को मिलेगा लाभ

अमरावती /दि. 3- जिले में अल्प वर्षा, लंबे बारिश अंतराल और सूखे जैसी परिस्थितियों के बीच किसानों को राहत देने के लिए अप्पर वर्धा बांध से खरीफ फसलों हेतु एक आवर्तन (सिंचाई चक्र) देने की तैयारी शुरू कर दी गई है. जलसंपदा विभाग ने बांध से 50 दलघमी पानी छोड़ने की योजना बनाई है, जिससे लाभक्षेत्र के लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलों को संजीवनी मिल सकेगी.
उल्लेखनीय है कि, इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर रहा. 1 जून से 30 सितंबर तक जिले में 862 मिमी वर्षा की अपेक्षा थी, लेकिन वास्तविक वर्षा केवल 483.8 मिमी दर्ज की गई. यानी जिले में लगभग 44 प्रतिशत वर्षा की कमी रही. अगस्त और सितंबर में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से तापमान बढ़ा, वाष्पीकरण की दर तेज हुई और खेतों में नमी तेजी से घटने लगी. स्थिति यह है कि भूजल स्तर नीचे चला गया है, कई कुएं, बोरवेल, नाले और छोटी नदियां सूखने लगी हैं. सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि कपास और संतरा बागानों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ऐसे में किसानों ने फसल बचाने के लिए सिंचाई हेतु कम से कम एक पानी की पाली देने की मांग तेज कर दी है.
जानकारी के मुताबिक अप्पर वर्धा बांध के जलग्रहण क्षेत्र में इस वर्ष 555 मिमी वर्षा दर्ज की गई है. वर्तमान में बांध में लगभग 330 दलघमी जलसंचय उपलब्ध है. इसी उपलब्धता को देखते हुए जलसंपदा विभाग ने 50 दलघमी पानी छोड़ने की व्यवहार्यता जताई है. जलसंपदा विभाग के कार्यकारी अभियंता श्रीकांत उमप ने बताया कि किसानों की मांग को देखते हुए एक आवर्तन देना संभव है. इससे करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलेगा. हालांकि पानी छोड़ने के लिए पालकमंत्री और जिलाधिकारी की अनुमति आवश्यक है. अनुमति मिलते ही आवर्तन जारी किया जाएगा.
ज्ञात रहे कि किसानों की मांग को लेकर विधायक राजेश वानखड़े ने भी हाल ही में जलसंपदा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग उठाई थी. अब प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर खरीफ की बची हुई फसलों और संतरा बागानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. जिले में लगातार घटती नमी और सूखते जलस्रोतों के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द सिंचाई उपलब्ध नहीं हुई तो कपास, संतरा और अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. ऐसे में प्रस्तावित आवर्तन को किसानों के लिए राहत की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.





