76 कचरा परिवहन वाहनों पर कब्जे को लेकर गरमाया मामला
कोणार्क के मैनेजर की शिकायत पर तीन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

तीनों प्रतिवादियों ने भी पुलिस के पास पहुंच कर सामने रखा अपना पक्ष
2.75 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन को लेकर चल रहा विवाद
वाहनों की खरीद और किराये के समझौते को लेकर सामने आया विरोधाभास
अमरावती/दि.3 – अमरावती महानगरपालिका के ठोस कचरा संकलन एवं परिवहन का काम करने वाली कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और कचरा परिवहन के लिए उपलब्ध कराए गए वाहनों के मालिकों के बीच करीब 2 करोड़ 75 लाख 80 हजार 300 रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद सामने आया है. कोणार्क के स्थानीय मैनेजर आदित्य सुरवाडे की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस ने कर्नलसिंग कृपालसिंग राहल, राजेश बालारामजी गुप्ता और मनोज रामरतजी साबू, तीनों निवासी अमरावती, के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है, वहीं इन तीनों ने भी अपने खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी मिलते ही पुलिस के पास पहुंचकर लिखित तौर पर अपना पक्ष रखा. जिसके चलते यह मामला फिलहाल काफी उलझता नजर आ रहा है.
इस संदर्भ कोणार्क कंपनी के मैनेजर आदित्य सूरवाडे द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, कोणार्क ने 76 वाहनों की खरीद के लिए भुगतान किया था और इन वाहनों को महानगरपालिका के ठोस कचरा प्रबंधन के काम में लगाया गया था. आरोप है कि 19 सितंबर 2026 को लेन-देन को लेकर विवाद के बाद आरोपियों ने कोणार्क के कब्जे में मौजूद वाहन बिना पूर्व सूचना के अपने कब्जे में ले लिए. हालांकि, पुलिस जांच के दौरान दर्ज आरोपियों के बयानों में इन वाहनों को बेचे जाने के बजाय किराये पर दिए जाने की बात कही गई है. यही इस मामले का प्रमुख विवाद बन गया है.
कोणार्क के मैनेजर आदित्य सुरवाडे ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि महानगरपालिका का ठोस कचरा एवं परिवहन का काम मिलने के बाद कंपनी को तत्काल बड़ी संख्या में वाहनों की आवश्यकता थी. फरवरी 2026 में कर्नलसिंग राहल की मध्यस्थता से श्री नागरिक सेवा सहकारी संस्था और तुलजाई ट्रांसपोर्ट से कुल 76 वाहन लेने की बातचीत हुई. शिकायत के अनुसार, तुलजाई ट्रांसपोर्ट से 16 वाहनों के लिए 53 लाख 80 हजार 300 रुपये तथा श्री नागरिक सेवा सहकारी संस्था से 60 वाहनों के लिए 2 करोड़ 22 लाख रुपये का भुगतान ऑनलाइन और चेक के माध्यम से अलग-अलग चरणों में किया गया. शिकायतकर्ता के मुताबिक, 60 में से 47 वाहनों के टैक्स इनवॉइस भी कंपनी को मिले थे. कुछ वाहनों के संबंध में दस्तावेज बाद में उपलब्ध कराने की बात कही गई थी. कोणार्क का दावा है कि उसने कुल 76 वाहनों को खरीदने का मौखिक समझौता किया था और इन वाहनों का इस्तेमाल महानगरपालिका के कचरा प्रबंधन के काम में किया जा रहा था.
शिकायत में कहा गया है कि 19 सितंबर को लेन-देन को लेकर विवाद हुआ. इसके बाद कर्नलसिंग राहल ने श्री नागरिक सेवा सहकारी संस्था और तुलजाई ट्रांसपोर्ट के साथ कथित रूप से मिलकर कोणार्क के कब्जे में मौजूद 76 वाहन वापस ले लिए. शिकायतकर्ता के अनुसार, इनमें से 66 वाहन बिना पूर्व सूचना के वहां से ले जाए गए. कोणार्क के मैनेजर का आरोप है कि कंपनी ने वाहन खरीद और शेष दस्तावेजों को लेकर संबंधित पक्षों से कई बार बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया. इसके बाद कंपनी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई.
* तीनों आरोपियों के बयान में सामने आया अलग पक्ष
कोणार्क कंपनी की ओर से दी गई शिकायत में पुलिस द्वारा नामजद किए गए मनोज साबू के बयान में कहा गया है कि तुलजाई ट्रांसपोर्ट के 16 वाहन कोणार्क को बेचे नहीं गए थे, बल्कि महानगरपालिका के कचरा प्रबंधन कार्य के लिए किराये पर दिए गए थे. उनके अनुसार, प्रति वाहन प्रतिदिन 1,750 रुपये किराया तथा वाहन के रखरखाव एवं अन्य खर्च को लेकर बातचीत हुई थी. साबू के बयान के मुताबिक, उनके 16 वाहनों के लिए कोणार्क ने करीब 53.80 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान किया था, जिसमें से 5 लाख रुपये नकद वापस किए गए. 19 सितंबर को उन्होंने अपने 16 में से 11 वाहन वापस ले लिए, जबकि पांच वाहन कोणार्क के पास ही रह गए. उन्होंने यह भी कहा कि कोणार्क और तुलजाई ट्रांसपोर्ट के बीच वाहनों की बिक्री का कोई लिखित करार नहीं हुआ था. कुछ वाहनों के संबंध में अधिकारपत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन उनका उद्देश्य वाहनों को अस्थायी रूप से कोणार्क के नाम पर दिखाना था.
* 60 वाहनों के मालिक ने भी बिक्री से किया इनकार
श्री नागरिक सेवा सहकारी संस्था के राजेश गुप्ता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि संस्था के पास 60 वाहन थे, जिन्हें कोणार्क को महानगरपालिका के ठोस कचरा प्रबंधन कार्य के लिए किराये पर दिया गया था. उनके अनुसार, इन वाहनों के लिए कोणार्क की ओर से करीब 2 करोड़ 15 लाख 48 हजार 500 रुपये का भुगतान किया गया था. गुप्ता के अनुसार, वाहन प्रतिदिन 1,750 रुपये की दर से उपलब्ध कराने और रखरखाव सहित अन्य खर्च को लेकर बातचीत हुई थी. उन्होंने भी वाहनों को बेचने से इनकार किया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच कोई औपचारिक लिखित बिक्री करार नहीं हुआ था. उन्होंने यह भी बताया कि महानगरपालिका ने पूर्व में उनकी संस्था का कचरा प्रबंधन संबंधी काम बंद किया था और उस संबंध में नुकसान भरपाई को लेकर लवाद में मामला चल रहा है. इसलिए उनके अनुसार, संस्था द्वारा कोणार्क को वाहन बेचने का प्रश्न ही नहीं उठता.
* मध्यस्थ कर्नलसिंग राहल का बयान भी अहम
इसके अलावा कर्नलसिंग राहल ने अपने बयान में कहा कि वे श्री नागरिक सेवा सहकारी संस्था के सदस्य हैं और तुलजाई ट्रांसपोर्ट के साथ भी उनके व्यावसायिक संबंध हैं. उनके अनुसार, उनकी मध्यस्थता से दोनों संस्थाओं के कुल 76 वाहन कोणार्क को किराये पर दिए गए थे. राहल के बयान के अनुसार, कोणार्क ने 60 वाहनों के लिए करीब 2 करोड़ 15 लाख 48 हजार 500 रुपये तथा 16 वाहनों के लिए करीब 53 लाख रुपये का भुगतान किया था. यह राशि 7 से 8 महीने के अग्रिम भुगतान के रूप में दी गई थी. उन्होंने भी स्पष्ट किया कि वाहन बेचे नहीं गए थे. राहल ने यह भी बताया कि महानगरपालिका स्तर पर कोणार्क द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों के स्वामित्व को लेकर सवाल उठने के बाद कुछ वाहनों को अस्थायी रूप से कंपनी के नाम पर दिखाने के लिए अधिकारपत्र तैयार किया गया था. उनके अनुसार, तुलजाई ट्रांसपोर्ट के आठ वाहनों का विवरण वाले अधिकारपत्र पर मनोज साबू के हस्ताक्षर करवाकर वह दस्तावेज कोणार्क के प्रतिनिधि को दिया गया था.
* मजदूरों के भुगतान और ईपीएफ-ईएसआईसी को लेकर भी उठे सवाल
पुलिस बयानों में यह बात भी सामने आई है कि कोणार्क के काम के दौरान कुछ श्रमिकों के भुगतान में कथित देरी को लेकर विवाद हुआ था. संबंधित पक्षों के अनुसार, कुछ मजदूर भुगतान के लिए कंपनी के कार्यालय पर पहुंचकर हंगामा भी कर रहे थे. इसके अलावा महानगरपालिका के ऑडिट में कोणार्क के भुगतान संबंधी दस्तावेजों में ईपीएफ, ईसीआर चालान और ईएसआईसी से संबंधित कुछ त्रुटियां सामने आने का भी आरोपियों ने अपने बयानों में उल्लेख किया है. इन कारणों से वाहन उपलब्ध कराने वाले पक्षों ने कंपनी की विश्वसनीयता को लेकर संदेह पैदा होने की बात कही और 19 सितंबर को वाहन वापस लेने का निर्णय लिया.
* रकम और वाहनों की संख्या की जांच करेगी पुलिस
इस मामले में शिकायतकर्ता ने कुल 2 करोड़ 75 लाख 80 हजार 300 रुपये के लेन-देन का उल्लेख किया है. वहीं, पुलिस को दिए संबंधित पक्षों के बयानों में भुगतान की रकम और वाहनों की संख्या के संबंध में अलग-अलग विवरण सामने आए हैं. इसी तरह, शिकायतकर्ता ने 76 वाहनों को वापस ले जाने का आरोप लगाया है, जबकि आरोपियों के बयानों में 19 सितंबर को 66 वाहन वापस लेने तथा शेष वाहनों के कोणार्क के पास होने की बात सामने आती है. सिटी कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है. अब पुलिस भुगतान के बैंक रिकॉर्ड, चेक, टैक्स इनवॉइस, वाहन संबंधी दस्तावेज, अधिकारपत्र, वाहन स्वामित्व और दोनों पक्षों के बीच हुए मौखिक अथवा लिखित समझौते की जांच कर रही है. पुलिस यह भी जांच करेगी कि 76 वाहन वास्तव में बिक्री के लिए दिए गए थे या किराये पर, तथा 19 सितंबर को वाहन किस परिस्थिति में वापस लिए गए. थानेदार रोशन सिरसाट के अनुसार, शिकायत की जांच के बाद मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की आगे जांच जारी है.





