‘गोरस’ पर कार्रवाई करने का हमें अधिकार
उच्च न्यायालय में अन्न व औषध प्रशासन का जवाब

नागपुर /दि.24- वर्धा स्थित प्रसिध्द गोरस भंडार संस्था में अस्वच्छता को देखकर अन्न व औषधी प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई. इस कार्रवाई को गोरस भंडार संस्था द्वारा न्यायालय में चुनौति दी गई. न्यायालय द्वारा अन्न व औषधी प्रशासन विभाग को जवाब देने के आदेश दिए गए. जिसमें गोरस पर कानुनी कार्रवाई करने का अधिकार हमे है. ऐसा जवाब अन्न व औषध प्रशासन विभाग ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ को दिया.
अन्न व औषधी प्रशासन आयुक्त तुकाराम मुंढे के आदेश के बाद संस्था के प्रतिष्ठान पर 31 मई को छापा मारा गया. अन्न व औषध प्रशासन के इस निर्णय और कार्रवाई को वर्धा तहसील गो दुग्ध उत्पादक सरकारी संघ लि. नागपुर उच्च न्यायालय में चुनौति दी थी. इस मामले में न्या. अनिल किलोर और न्या. राज वाकोडे के समक्ष सुनवाई हुई. याचिका के अनुसार वर्धा के महात्मा गांधी, आचार्य विनोबा भावे और जमनालाल बजाज के 1931 में स्थापन किए गए गो संवर्धन गोरस भंडार के माध्यम से रोजाना 9 हजार लीटर दुध संकलित कर वितरण किया जाता है.
वर्धा जिले के 15 गांवों के 800 परिवारों की उपजिविका इसी पर अवलंबन है. एफडीए ने 31 मई को अचानक जांच कर संस्था परिसर में अस्वच्छता होने का आरोप लगाया था तथा आगामी आदेश कर दूध संकलन, बिक्री और दुग्धजन्य पदार्थों के उत्पादन को बंद करने का निर्देश दिया. गोसंवर्धन गोरस भंडार के प्रतिनिधि और दुध उत्पादकों ने जिलाधिकारी वानमंती सी. को भी निवेदन दिया था. लेकिन वहां से किसी प्रकार की राहत नहीं मिली. ऐसा याचिका में कहा गया. उच्च न्यायालय ने राज्य शासन सहित अन्न व औषधी प्रशासन को नोटीस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे. उसी के अनुसार, अन्न व औषधी प्रशासन की ओर से कार्रवाई के संबंध में जवाब दाखिल किया गया. आगे की सुनवाई 31 जुलाई को निश्चित की गई है. राज्य शासन की ओर से एड. एम.एस. उके ने पैरवी की.