क्या फिर से बदलेगी अमरावती मेडिकल कॉलेज की जगह, योजना का लंबा लटकना तय
सरकारी मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावित जमीन पर निकला ‘आयडेटिफाईड फॉरेस्ट’

* विधायक सुलभा खोडके ने सीएम को नई जगह के लिए लिखा पत्र, चार नई जगहें भी सुझाई
* विधायक रवि राणा अभी भी उसी जगह की मंजूरी हेतु प्रशासकीय प्रयासों में लगे
* कॉलेज की जमीन के बराबर फॉरेस्ट को बदले में उतनी ही जमीन देने का कर रहे प्रयास
अमरावती/ दि.2- काफी लंबी प्रतिक्षा और कडे प्रयासों के बाद अमरावती में सरकारी मेडिकल कॉलेज मंजूर हुआ. जिसके लिए बडनेरा के निकट मौजे आलियाबाद में 11.29 हेआर जमीन भी आवंटित हुई. जहां पर सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की अत्याधुनिक सेवा व सुविधाओं से लैस रहनेवाली नई इमारत का निर्माण प्रस्तावित हैं. परंतु अब यह जानकारी निकलकर सामने आयी है कि उक्त जमीन पर पहले ही ‘आयडेटीफाईड फॉरेस्ट’ के तौर पर चिन्हीत व वर्गिकृत किया जा चुका हैं. जिसके चलते अब उस जमीन पर सरकारी मेडिकल कॉलेज की इमारत के निर्माण का मामला खटाई में पडता दिखाई दे रहा हैं. जिसके चलते यह तय है कि यह योजना बेहद लंबी लटकनेवाली हैं. ऐसे में सवाल पूछा जा रहा हैं कि क्या एक बार फिर अमरावती के सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की जगह बदलनेवाली हैं.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक विगत 24 अप्रैल को अमरावती वन विभाग के प्रादेशिक उपवन संरक्षक अर्जुना के. आर. ने अमरावती जीएमसी के अधिष्ठाता के नाम पत्र जारी करते हुए उन्हें सुचित किया कि मौजे आलियाबाद के गट नंबर 9/1 में जिस 11.29 हेक्टेअर आर ई-क्लास जमीन को सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के लिए हस्तांतरित व अधिग्रहित किया गया हैं, उक्त जमीन ‘आयडेंटीफाईड फॉरेस्ट’ श्रेणी में वर्गिकृत हैं. ऐसे में केंद्र सरकार की पूर्ण अनुमति के बिना उस जमीन पर कोई भी वनेत्तर काम नहीं किया जा सकता हैं. साथ ही वनेत्तर कार्य करने हेतु परिवेश नामक वेबसाइट पर वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम 1980 के अंतर्गत ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रस्ताव पेश करना होता हैं. इसी पत्र को आधार बनाते हुए अमरावती की विधायक सुलभा खोडके ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम पत्र जारी करते हुए उन्हें मौजे आलियाबाद की वजह सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निर्माण हेतु अमरावती शहर में चार जगहों का पर्याय सुझाया हैं. साथ ही कहा हैं कि मौजे आलियाबाद वाली जगह वैसे भी अमरावती शहर से करीब 12 किमी दूर स्थित हैं. जहां पर आने-जाने के लिए कॉलेज में पढनेवाले मेडिकल विद्यार्थियों सहित कॉलेज से सलग्नित अस्पताल में इलाज हेतु आनेवाले मरीजों एवं उनके परिजनों को काफी समस्याओं व दिक्कतों का सामना करना पडता, ऐसे में वे पहले से ही आलियाबाद की बजाए अमरावती शहर में स्थित किसी उचित स्थान पर जीएमसी की इमारत बनाए जाने की मांग कर रही हैं. वहीं अब चूंकि मौजे आलियाबादवाली जमीन पर ‘आयडेंटीफाईड फॉरेस्ट’ रहने की जानकारी सामने आयी हैं. जिसका सीधा मतलब है कि अब उस जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता और उक्त जमीन पर जीएमसी की इमारत का निर्माण करने हेतु केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी. जिसमें काफी लंबा समय भी लग जाएगा. जिसके चलते जरूरी है कि उक्त जमीन पर जीएमसी की इमारत को बनाने की योजना रद्द कर दी जाए और अमरावती शहर में किसी जमीन को अधिग्रहित कर वहां पर जीएमसी की इमारत का निर्माण किया जाए. वहीं दूसरी ओर बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि राणा अब भी मौजे आलीयाबाद वाली जमीन पर ही जीएमसी की इमारत के निर्माण को मंजूर कराने हेतु प्रशासकीय प्रयासों में लगे हुए हैं. जिसके तहत विधायक रवि राणा चाहते हैं कि अमरावती जीएमसी हेतु मौजे आलियाबाद में जितनी जमीन अधीग्रहित की गई हैं. लगभग उतनी ही जमीन वन विभाग को किसी अन्य जगह पर आवंटी की जाए और मौजे आलिया बाद वाली जमीन को अमरावती जीएमसी के लिए प्रयोग में लाया जाए. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर अमरावती जीएमसी को लेकर जगह के मामले का उंट किस करवट बैठता है.
बता दें कि अमरावती में सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू किए जाने की मांग बहुत लंबे समय से की जा रही थी. करीब 25 वर्षों के इंतजार पश्चात अमरावती में जैसे-तैसे सरकारी मेडिकल कॉलेज को मंजूरी तो मिली और स्थानीय जिला स्त्री अस्पताल व सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल परिसर की इमारत को अस्थायी तौर पर अधिग्रहित व हस्तांतरित करते हुए वहां पर सरकारी मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू किया गया. साथ ही अमरावती में सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए बडनेरा के पास स्थित मौजे आलियाबाद में जगह भी आवंटित की गई थी. जिसे लेकर लंबे समय से ‘कभी हां, कभी ना’ वाली स्थिति बनी हुई हैं. जहां एक ओर बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि राणा हर हाल में सरकारी मेडिकल कॉलेज अपने निर्वाचन क्षेत्र अंतर्गत मौजे आलियाबाद वाली जमीन पर बनाने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर अमरावती की विधायक सुलभा खोडके द्बारा मौजे आलियाबाद वाली जमीन व अमरावती शहर से काफी दूर बताते हुए वहां पर सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निर्माण को मेडिकल विद्यार्थियों एवं सर्वसामान्य वर्ग के मरीजों के लिए असुविधाजनक बताने के साथ ही अमरावती शहर में किसी स्थान पर सरकारी मेडिकल कॉलेज की इमारत बनाए जाने की मांग उठा रही हैं. जबकि इससे पहले राज्य में महाविकास आघाडी की सरकार रहते समय तत्कालीन कैबिनेट मंत्री एड. यशोमति ठाकुर द्बारा सरकारी मेडिकल कॉलेज को उनके तिवसा निर्वाचन क्षेत्र अंतर्गत नांदगांव पेठ में ले जाए जाने के प्रयास भी किए जा चुके हैं. वहीं अब एक नया तकनीकी पेंच सामने आया हैं. जिसके मुताबिक मौजे आलियाबाद में सरकारी मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावित जमीन पर आयडेंटीफाईड फॉरेस्ट रहने की सामने आयी हैं. जिसके चलते अब यह तो तय हो गया है कि यह योजना बेहद लंबी खिचनेवाली हैं. इसके चलते सवाल पूछा जा रहा हैं कि क्या अब एक बार फिर अमरावती के सरकारी मेडिकल कॉलेज की जगह बदलनेवाली हैं.
* ऐसे सामने आया ‘आयडेंटीफाईड फॉरेस्ट’ वाला मामला
जानकारी के मुताबिक मौजे आलियाबाद वाली जमीन पर सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निर्माण कार्य हेतु एशियाई डेव्हलपमेंट बैंक (एडीबी) द्बारा वित्तिय सहायता की जानी हैं. जिसके चलते एडीबी के प्रतिनिधि एनवायरमेंंट इको सेफ गार्ड सर्वे हेतु जानकारी प्राप्त करने के लिए अमरावती वन विभाग के कार्यालय में पहुंचे. जिसके बाद यह जानकारी सामने आयी कि मौजे आलियाबाद में जिस जमीन को अमरावती जीएमसी के लिए आवंटित किया गया हैैं, वह जमीन तो ‘आयडेंटीफाईड फॉरेस्ट’ की श्रेणी में वर्गीकृत व पंजीकृत हैं. जिस पर कोई भी वनेत्तर काम नहीं किया जा सकता तथा ऐसी जमीन पर वनेत्तर काम करने हेतु केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होती हैं. इसके लिए वन मंत्रालय की ‘परिवेश’ नामक वेबसाइट पर पहले से आवेदन करना होता हैं. इस जानकारी के सामने आते ही मौजे आलियाबाद वाली जमीन पर सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की इमारत के निर्माण का मामला अधर में लटक गया. जिसके बाद अमरावती की विधायक सुलभा खोडके ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम पत्र लिखते हुए अमरावती शहर के मध्यस्थल में स्थित किसी स्थान पर सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की इमारत बनाए जाने का सुझाव दिया.

* सुलभाताई ने सुझाए चार नए स्थान
अमरावती जीएमसी को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम भेजे गए पत्र में विधायक सुलभा खोडके ने मौजे आलियाबाद वाली जगह को अमरावती शहर से काफी दूर तथा विद्यार्थियों व मरीजों के लिए असुविधाजनक बताने के साथ ही कहा कि वे इसी बात के मद्देनजर शुरूआत से ही मौजे आलियाबाद वाली जमीन पर जीएमसी व अस्पताल बनाए जाने का विरोध कर रही थी. साथ ही अब यह स्पष्ट हो गया है कि उक्त जमीन पर ‘आयडेंटीफाईड फॉरेस्ट’ होने के चलते वहां पर जीएमसी की इमारत का निर्माण नहीं हो सकता. ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए की वह सरकारी अस्पताल के लिए अमरावती शहर में किसी अन्य सुविधा जनक स्थान पर चयन करें. इसके लिए विधायक सुलभा खोडके ने अमरावती शहर में स्थित चार जगहों का पर्याय ही राज्य सरकार को दिया हैं. जिसके तहत विधायक सुलभा खोडके ने शहर के बीचोबीच स्थित जिला स्त्री अस्पताल व सुपर स्पेशालिटी अस्पताल परिसर की 23 एकड जमीन में सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के लिए हर लिहाज से पूरी तरह योग्य बताया. साथ ही वेलकम पॉइंट के पास से डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ की 75 एकड जगह में से 25 एकड जगह को सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रकल्प हेतु अधिग्रहीत करने या फिर मौजे रहाटगांव के सर्वे नंबर 121 में शहर के बिल्कुल पास उपलब्ध 23 एकड जमीन अथवा शहर के बीचोबीच विलास नगर परिसर स्थित मोसीकॉल कारखाने की खाली पडी 25 एकड जमीन में से किसी एक स्थान पर सरकारी मेडिकल कॉलेज की इमारत बनाए जाने का सुझाव भी दिया.

* विधायक राणा अभी भी उसी जमीन पर मंजूरी के प्रयास में
यद्यपि मौजे आलियाबाद में जीएमसी हेतु आवंटित व अधिग्रहित जमीन पर ‘आयडेंटीफाईड फॉरेस्ट’ रहने की बात सामने आ चुकी हैं. लेकिन इसके बावजूद बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि राणा अभी भी उसी जमीन पर जीएमसी की इमारत के लिए मंजूरी हासील करने हेतु प्रशासनकी प्रयासों में लगे हुए हैं. विशेष उल्लेखनीय हैं कि सुप्रिम कोर्ट द्बारा जारी गाइडलाईन के मुताबिक यदि किसी भी प्रकल्प अथवा परियोजना के लिए वन विभाग की कोई जमीन ली जाती है, तो जितनी जमीन ली गई हैं. उतनी ही जमीन किसी अन्य स्थान पर वन विभाग के हिस्से में सरकार को देना होता हैं. इसी नियम व निर्देश को ध्यान में रखते हुए विधायक रवि राणा द्बारा यह प्रयास किया जा रहा है कि मौजे आलियाबाद में जीएमसी व अस्पताल हेतु अधिग्रहीत की गई 11.29 हेक्टेअर जमीन के बदले वन विभाग को कहीं अन्य जगह पर 11.29 हेक्टेअर जमीन सरकार द्बारा आवंटित की जाए तथा मौजे आलियाबाद वाली जमीन पर ही अमरावती जीएमसी व अस्पताल की नई इमारत का निर्माण किया जाए.
* कम से कम 2 से 3 साल अधर में लटका रह सकता है मामला
यहां यह ध्यान देनेवाली बात है कि यदि सरकार द्बारा मौजे आलियाबाद वाली जमीन पर ही सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की नई इमारत के निर्माण के फैसले पर कायम रहते हुए इसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी व अनुमति मांगने का निर्णय लिया जाता हैं. तो केंद्र से अनुमति व मंजूरी मिलने में कम से कम 2 से 3 साल का समय लगना तय हैं. वहीं यदि मौजे आलियाबाद की बजाय सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की इमारत के लिए किसी नई जगह के पर्याय पर विचार विमर्ष किया जाता है, तो जगह के चयन से लेकर जमीन के अधिग्रहण व हस्तांतरण के काम में भी लगभग इतना ही समय लगना तय है. यानी किसी भी सूरत में अमरावती जीएमसी की नई इमारत के निर्माण का मामला 2 से 3 साल तक अधर में ही लटका रहना तय हैं और तब तक अमरावती जीएमसी का कामकाज मौजूदा अस्थायी जगह व इमारत से ही चलता रहेगा. जहां पर आगामी शैक्षणिक सत्र से तृतीय वर्ष पाठ्यक्रम की कक्षाएं भी शुरू हो जाएंगी. जिसे ध्यान में रखते हुए जीएमसी प्रबंधन को प्रैक्टिकल क्लासेस चलाने हेतु अभी से ही विशेष प्रबंध करने होंगे.





