अमरावती में पीसीपीएनडीटी को लेकर एएनएम स्टाफ की कार्यशाला

अवैध भ्रूण लिंग जांच रोकने और बेटियों की जन्मदर बढाने पर दिया जोर

अमरावती/दि.14- अमरावती महानगरपालिका के अंतर्गत आने वाले सभी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के एएनएम स्टाफ के लिए 12 अगस्त 2026 को विश्वरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागार में पीसीपीएनडीटी अधिनियम को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला का आयोजन मनपा के मेडिकल हेल्थ ऑफिसर डॉ. विशाल काले के मार्गदर्शन एवं अनुमति से किया गया.
कार्यशाला में भ्रूण के लिंग की अवैध जांच पर रोक लगाने, बेटियों की जन्मदर बढ़ाने तथा पीसीपीएनडीटी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया. एएनएम स्टाफ को डिकॉय केस की भूमिका, आवश्यक नियोजन तथा स्थानीय स्तर पर गर्भवती महिलाओं की सहायता से अवैध भ्रूण लिंग जांच के मामलों की जानकारी सामने लाने की प्रक्रिया समझाई गई. बताया गया कि सफल ट्रैप की जानकारी देने वाले व्यक्ति को सरकारी नियमानुसार 1 लाख रुपये तक का इनाम दिया जाता है तथा सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाती है.
* केंद्रों के निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच पर जोर
कार्यशाला में पीसीपीएनडीटी तथा एमटीपी केंद्रों का नियमित निरीक्षण और ऑडिट करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया. निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड एवं रजिस्टर, एफ-फार्म, डॉक्टरों के शैक्षणिक एवं योग्यता प्रमाणपत्र, पीसीपीएनडीटी प्रमाणपत्र, एमटीपी प्रमाणपत्र, बॉम्बे नर्सिंग होम प्रमाणपत्र, सोनोग्राफी मशीन तथा उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच करने के बारे में जानकारी दी गई. एएनएम स्टाफ को यह भी बताया गया कि सोनोग्राफी केंद्रों में भ्रूण का लिंग बताने या लिंग निर्धारण को बढ़ावा देने वाली किसी भी तस्वीर, पोस्टर अथवा विज्ञापन को प्रदर्शित करना कानूनन प्रतिबंधित है.
* एचआईवी कार्यक्रम की भी समीक्षा
कार्यशाला के दौरान एचआईवी कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई. गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच, पंजीयन, रिपोर्टिंग तथा कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया. कार्यशाला पीसीपीएनडीटी जिला समन्वयक एड. प्रणिता भाकरे के मार्गदर्शन में हुई. इस अवसर पर एड्स नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी अजय साखरे, एएमसी मेडिकल ऑफिसर एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. संदीप पटबागे तथा एएमसी पब्लिक हेल्थ मैनेजर डॉ. स्वप्ना वानखेड़े उपस्थित थीं. कार्यशाला में कहा गया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निरीक्षण एवं ऑडिट, डिकॉय कार्रवाई को बढ़ावा और जनसहभागिता के माध्यम से अवैध भ्रूण लिंग जांच पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है. इससे बेटियों की जन्मदर में सुधार के साथ कन्या भ्रूण हत्या रोकने में भी मदद मिलेगी.
* अवैध भ्रूण लिंग जांच या अवैध गर्भपात की जानकारी दें
जिले में कहीं भी अवैध गर्भपात, गर्भधारण से पहले या जन्म से पहले भ्रूण के लिंग की जांच की जानकारी मिलने पर नागरिक संबंधित माध्यमों से वेबसाइट रालहळाळश्रसळारहर.ळप, टोल-फ्री 1800-233-4475, हेल्पलाइन 104 पर सूचना दे सकते हैं.

 

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