जिला परिषद पर निजी वाहनों का करीब 1 करोड़ रुपये बकाया
28 गाड़ियां सालाना ठेके पर लेने के बावजूद महीनों से किराया नहीं मिला

वाहन मालिकों ने सीईओ से तत्काल भुगतान की मांग की
अमरावती/दि.30 – अमरावती जिला परिषद के विभिन्न विभागों के लिए सालाना अनुबंध पर ली गई निजी गाड़ियों का किराया महीनों से बकाया है. निर्माण विभाग, ग्रामीण जलापूर्ति विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिकारियों के दौरे के लिए कुल 28 निजी वाहन अनुबंध पर लिए हैं. लेकिन इन वाहनों के मालिकों को लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण जिला परिषद पर करीब 1 करोड़ रुपये की देनदारी जमा हो गई है.
वाहन मालिकों का कहना है कि पिछले कई महीनों से किराया नहीं मिलने के बावजूद वे ईंधन, ड्राइवरों का वेतन, वाहन का रखरखाव और बैंक की कर्ज किश्तें अपनी जेब से भर रहे हैं. लगातार भुगतान नहीं होने से अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
* निर्माण विभाग के लिए 9 वाहन
जिला परिषद के निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाले मोर्शी, धारणी, अचलपुर, चांदूर रेलवे, अमराकेटी और दर्यापुर सहित विभिन्न उपविभागों में अधिकारियों के पास नियमित सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं हैं. इसके चलते कार्यकारी अभियंता और उपविभागीय अभियंताओं के लिए निजी कंपनी के माध्यम से 9 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं. इसी तरह ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के मुख्यालय और विभिन्न उपविभागों के लिए 16 वाहन, जबकि अन्य विभागों के अधिकारियों के लिए 4 वाहन अनुबंध पर लिए गए हैं. इस तरह कुल 28 निजी वाहन जिला परिषद के अधिकारियों के उपयोग में हैं.
* महीनों से भुगतान का इंतजार
वाहन मालिकों गिरीश डाहाके, शंकर मुदलकर, विट्ठल भुयार, सागर मोहोड़ सहित अन्य का कहना है कि वे नियमित रूप से जिला परिषद के अधिकारियों को वाहन उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है. वाहन मालिकों के मुताबिक अगस्त-नवंबर 2025 से सितंबर 2026 तक की राशि का बड़ा हिस्सा अभी भी बकाया है. वाहन मालिकों का कहना है कि वाहनों का रोजाना ईंधन खर्च, ड्राइवरों का वेतन, मरम्मत और बैंक की किस्तें समय पर चुकानी पड़ती हैं. ऐसे में करीब एक साल तक किराया नहीं मिलने से आर्थिक परेशानी बढ़ गई है. उन्होंने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी से बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग की है.
* सरकार से मांगा गया फंड
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी ने कहा कि निजी वाहनों के बकाया भुगतान के लिए सरकार से निधि की मांग की गई है. फिलहाल पर्याप्त निधि उपलब्ध नहीं है. सरकार से फंड प्राप्त होते ही वाहन मालिकों का बकाया भुगतान किया जाएगा.
* अधिकारियों के लिए सरकारी वाहन नहीं
जिला परिषद के निर्माण, ग्रामीण जलापूर्ति और अन्य विभागों के अधिकारियों को नियमित दौरे के लिए पर्याप्त सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं हैं. इसी कारण निविदा प्रक्रिया के माध्यम से निजी वाहनों को किराये पर लेकर उनका उपयोग किया जा रहा है. हालांकि, लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण अब वाहन मालिकों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं. एक साल से भुगतान नहीं होने के कारण ड्राइवरों की सैलरी, ईंधन और वाहनों का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है. जिला परिषद को बकाया राशि का तत्काल भुगतान करना चाहिए.
– गिरीश डाहाके, वाहन मालिक





