अब शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध

दो मौतों के बाद हडबडाकर नींद से जागा प्रशासन

* जिलाधीश आशीष येरेकर ने जारी किए सख्त निर्देश
* पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक
* शहर के एंट्री पाइंट पर चेक पोस्ट स्थापित कर होगी सख्त निगरानी
* नियम तोडनेवालों के खिलाफ की जायेगी कडी कार्रवाई
अमरावती /दि.30– दो दिन पूर्व राजापेठ रेलवे ओवरब्रिज पर घटित सडक हादसे में एक युवती व एक महिला की दर्दनाक मौत होने के बाद शहर की पूरी तरह से लचर हो चुकी यातायात व्यवस्था की अनदेखी करनेवाले प्रशासन की नींद एक झटके के साथ खुल गई है. यही वजह है कि उक्त सडक हादसे और उसमें हुई दो मौतों के बाद उभरे जनाक्रोश को देखते हुए गत रोज जिलाधीश आशीष येरकर ने अपने कार्यालय में शहर पुलिस एवं प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक आनन-फानन में बुलाई जिसमें जिलाधीश आशीष येरेकर ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि अमरावती शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए और शहर के एंट्री पाइंट वाले रास्तों पर चेक पोस्ट स्थापित करते हुए वहां से शहर की ओर आनेवाले सभी वाहनों पर नजर रखी जाए. इस बैठक में प्रादेशिक परिवहन अधिकारी उर्मिला पवार सहित पुलिस विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे.
इस बैठक में जिलाधीश आशीष येरेकर ने कहा कि, राजापेठ रेलवे उडानपुल पर हुए हादसे के बाद जिला प्रशासन को नागरिकों की ओर से बडे पैमाने पर निवेदन प्राप्त हुए है. जिन्हें ध्यान में रखते हुए शहर सडक हादसों को रोकने हेतु आवश्यक उपाय योजना करना बेहद आवश्यक है. जिसके चलते जिन रास्तों से होकर अमरावती शहर में भारी वाहनों का प्रवेश होता है, ऐसे सभी स्थानों पर चेक पोस्ट स्थापित किए जाए और वहां से शहर में आनेवाले वाहनों पर कडी नजर रखी जाए. इस समय जिलाधीश आशीष येरेकर ने यह भी कहा कि अमरावती शहर में सुबह 6 से रात 10 बजे तक भारी वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित किया गया है. इस आदेश पर कडाई से अमल करते हुए इस समय के दौरान शहर में आनेवाले भारी वाहनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए.
इस समय जिलाधीश आशीष येरेकर ने यह भी कहा कि शहर के लगभग सभी उडानपुलों के खत्म होते ही वाहनों के लिए बायीं ओर मुडने की जगह है. लेकिन इसकी वजह से कभी भी कोई सडक हादसा घटित हो सकता है. जिसके चलते ऐसे स्थानों पर रोड डिवायडर बनाए जाए. साथ ही साथ उडानपुलों पर भी रोड डिवायडर की व्यवस्था की जाए. इसके अलावा ऐसे कामों के लिए रास्ता सुरक्षा निधि का उपयोग किया जाए और जरूरत पडने पर जिला नियोजन की निधि में से आवश्यक रकम मांगी जाए.

* आखिर मुधोलकर पेठ की ओर जानेवाला रास्ता खुला
यहां यह विशेष उल्लेखनिय है कि, विगत कई दिनों से राजापेठ चौक यानी गद्रे चौक से मुधोलकर पेठ की ओर जानेवाले रास्ते पर प्रवेश द्वार का काम चल रहा है. जिसे बांबू यानी बांसबल्ली और सेंट्रींग लगाकर वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया था. जिसकी वजह से मुधोलकर पेठ, अंबादेवी मार्ग, गांधी चौक व बालाजी प्लॉट की ओर से होनेवाली वाहनों की आवाजाही को बालाजी प्लॉट से डॉ. चांडक के दवाखाने की ओर जानेवाली संकरी गल्ली की ओर मोड दिया गया था. जिसकी वजह से राजापेठ रेलवे ओवरब्रिज के मुआने पर ट्राफिक जाम वाली स्थिती बन जाया करती थी. जहां पर कभी भी कोई हादसा घटित होने की संभावना जताई जा रही थी. जो दो दिन पहले सच भी साबित हुई. उस हादसे में एक महिला व एक युवती की मौत होने के बाद सार्वजनिक लोकनिर्माण विभाग की भी अचानक नींद खुल गई, जिसके चलते पीडब्ल्यूडी ने तुरंत हरकत में आकर प्रवेश द्वार पर लगाए गए बांसबल्ली को हटाया और गद्रे चौक से अंबादेवी की ओर जानेवाले मुख्य रास्ते को खुला किया गया.

* यातायात पुलिस निरीक्षक व पुलिस कर्मियों को शो कॉज नोटीस
मंगलवार को घटित हुए भीषण सडक हादसे के बाद शहर पुलिस और विभाग की नींद भी अचानक ही खुल गई है और शहर पुलिस द्वारा राजापेठ विभाग के यातायात पुलिस निरीक्षक निलेश गावंडे सहित राजापेठ विभाग के यातायात पुलिस कर्मियों के नाम शो कॉज नोटीस जारी की गई है. जिसमें पुछा गया है कि, शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र अंतर्गत सुबह 6 से रात 9.30 बजे तक भारी वाहनों के लिए नो एंट्री रहने के बावजूद वह बिना नंबर प्लेटवाला चुरी लदा टिप्पर अमरावती शहर के भीतर कैसे घुसा. यहां इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया जा सकता है कि, अमरावती शहर में सुबह 6 से रात 9.30 बजे तक भारी वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने से संबंधित आदेश करीब 6 साल पहले जारी हुआ था. लेकिन समय बितने के साथ ही इस आदेश की अनदेखी होने लगी. यहीं वजह है कि, नो एंट्री का आदेश रहने के बावजूद शहर में पूरा समय भारी वाहनों की आवाजाही धडल्ले के साथ चला करती थी. जिसकी ओर यातायात पुलिस विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा कभी कोई ध्यान ही नहीं दिया जाता था. लेकिन दो दिन पूर्व शहर के बिचोबिच टिप्पर वाहन की वजह से घटित हादसे में एक महिला व एक युवती की मौत हो जाने के बाद अब शहर पुलिस को अपने ही द्वारा 6 साल पहले जारी आदेश की याद आयी.

* राजापेठ व गद्रे चौक में हालात ‘जस के तस’
बता दे कि, शहर में यातायात को नियंत्रित करने हेतु राजापेठ, गाडगेनगर व फ्रेजरपुरा में तीन उपविभाग कार्यरत है और प्रत्येक उपविभाग में 50 से 55 कर्मचारी कार्यरत है. लेकिन इसके बावजूद गद्रे चौक में यातायात व्यवस्था का पूरी तरह से सत्यानाश हो चुका है. यातायात पुलिस कर्मियों की आंखों के सामने निजी लक्झरी बसे सडकों पर खडी रहती है. जिनके खिलाफ कभी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती. इसके अलावा राजापेठ उपविभाग यातायात पुलिस की सडक सुरक्षा को लेकर गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि, मंगलवार को जिस जगह पर सडक हादसा घटित हुआ था, बुधवार को उस जगह के दूसरी ओर यातायात पुलिस की तैनाती दिखाई दी. खास बात यह रही कि, उक्त यातायात पुलिस कर्मी भी केवल कुछ घंटे ही मौके पर मौजुद रहा और शाम को जब भीडभाडवाला समय था तब उस जगह पर कोई यातायात पुलिस कर्मी दिखाई नहीं दिया.

* मंगलवार को घटित सडक हादसे को लेकर यातायात पुलिस निरीक्षक व संबंधित पुलिस कर्मियों को शो कॉज नोटीस जारी की गई है. इसके साथ ही गुरुवार की सुबह से शहर के सभी एंट्री पॉर्ईंट पर नाकाबंदी व बैरेकेटिंग का काम शुरू किया गया. इसके अलावा बुधवार को नो एंट्री में घुसनेवाले कुल 73 भारी वाहनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई.
– प्रांजली सोनवणे
पुलिस उपायुक्त, मुख्यालय अमरावती

* पांच साल में 421 मौतें, 2564 हादसें
यहां यह भी उल्लेखनिय तथ्य है कि, विगत पांच वर्षों की कालावधी दौरान अमरावती शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में 2564 सडक हादसे घटित हुए. जिसमें से 397 भीषण यानी प्राणांतिक हादसों में 421 नागरिकों की मौतें हुई. जिसके चलते हालात की भयावहता व गंभीरता को समझा जा सकता है.

* 6 वर्ष पहले भारी वाहनों पर लगाई गई थी नो एंट्री
यहां इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया जा सकता है कि, अमरावती शहर पुलिस द्वारा 6 वर्ष पहले एक आदेश जारी कर गिट्टी बोल्डर वाले ट्रकों सहित हल्के व भारी वाहनों के लिए रोजाना सुबह 6.30 से रात 9 बजे तक अमरावती शहर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था. जिसमें जीवनावश्यक व अतिमहत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई करनेवाले वाहनों के लिए समय का बंधन देते हुए छूट दी गई थी. जिसके तहत सुबह 8 से 10 बजे तक, दोपहर 2 से 4.30 बजे तक तथा रात 9 बजे के बाद एमआयडीसी कार्यालय तक आने-जाने की छूट दी गई थी. साथ ही सुबह 6 से 8 बजे तक, सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक, दोपहर 4.30 बजे से रात 9 बजे तक सभी तरह के भारी वाहनों के शहर में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगाया गया था.
इसके अलावा खास बात यह भी रही कि, शहर में आवाजाही करनेवाले सभी तरह के भारी वाहनों हेतु 20 से 30 किमी की अधिकतम गतिमर्यादा भी तय की गई थी. इसके साथ ही आदेश में यह भी कहा गया था कि, छूट के समय शहर में प्रवेश कर चुके सभी प्रकार के हल्के व भारी वाहन प्रवेश बंदी के दौरान जिस स्थान पर खडे है, उसी स्थान पर खडे रखे जाए और प्रवेश बंदी का समय जारी रहने के दौरान ऐसे वाहनों को सडक पर चलाकर शहर से बाहर ले जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया था. लेकिन इसके बावजूद विगत कई वर्षों से आदेश की जमकर अनदेखी की जाती रही. जिसके चलते दिन के समय अमरावती शहर में गिट्टी बोल्डर की ढुलाई करनेवाले वाहनों सहित अन्य सभी तरह के हल्के व भारी वाहनों की धडल्ले के साथ आवाजाही चलती रही.

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