चार आरोपी 14 तक पीसीआर में, मास्टरमाइंड विपुल ठाकरे अब भी फरार

अपने ही घर पर फायरिंग की साजिश के मामले में

* वारदात में इस्तेमाल देसी कट्टा भी बरामद, फायरिंग से शुरू हुई जांच अब अवैध हथियारों के नेटवर्क तक पहुंची
अमरावती/दि.12 – अर्जुन नगर स्थित जिजाऊ कॉलोनी में निलंबित पटवारी विपुल भानुदास ठाकरे के घर के बाहर हुई सनसनीखेज फायरिंग की घटना में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. शुरुआत में अज्ञात हमलावरों द्वारा किए गए हमले के रूप में सामने आए इस मामले ने अब पूरी तरह नया मोड़ ले लिया है. पुलिस जांच में सामने आया है कि फायरिंग कथित रूप से एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी और मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को अदालत ने 14 अगस्त तक पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है. वहीं, इस पूरे प्रकरण का कथित मुख्य सूत्रधार बताए जा रहे विपुल ठाकरे अब भी फरार हैं. जिसकी तलाश में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.
बता दे कि, फायरिंग के बाद पुलिस ने शहर और आसपास के इलाकों के 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली थी. फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस चार आरोपियों तक पहुंची. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल चंद्रसिंह उर्फ शेरूसिंह कथित रूप से विपुल ठाकरे के घर में ही किराए पर रह रहा था. इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने का दावा किया है.
क्राइम ब्रांच ने इस मामले में बादशाह सिंह टांक, अजय भोसले, राजसिंह टांक और चंद्रसिंह उर्फ शेरूसिंह को गिरफ्तार किया था. चारों से लगातार पूछताछ की जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड अवधि में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी. मामले में एक और महत्वपूर्ण सफलता तब मिली जब पुलिस ने आरोपी बादशाह सिंह की निशानदेही पर बडनेरा क्षेत्र में सुपर हाईवे के पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया देसी कट्टा बरामद कर लिया.
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि यह हथियार आरोपी के एक रिश्तेदार ने करीब डेढ़ वर्ष पहले जलगांव-पाचोरा क्षेत्र से खरीदा था. इस खुलासे के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है. अब पुलिस केवल फायरिंग की साजिश तक सीमित नहीं है, बल्कि उस नेटवर्क की भी जांच कर रही है जो अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में सक्रिय है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि देसी कट्टा किसने उपलब्ध कराया, उसके पीछे कौन लोग हैं और क्या इस गिरोह के तार अन्य आपराधिक मामलों से भी जुड़े हुए हैं.
हालांकि चार आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और हथियार भी बरामद हो चुका है, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अब भी फरार विपुल ठाकरे हैं. पुलिस को उम्मीद है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद फायरिंग की कथित साजिश, उसके मकसद और पूरे घटनाक्रम की असली तस्वीर सामने आ सकेगी. फिलहाल अमरावती में यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है. जिस घटना ने कुछ दिन पहले शहर में दहशत फैला दी थी, वही अब कथित साजिश, फरारी और अवैध हथियारों के नेटवर्क की जांच तक पहुंच चुकी है. आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित फायरिंग कांड में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

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