जिले में 1.01 लाख व राज्य के 28.77 लाख छात्र दूसरे गणवेश से वंचित

शैक्षणिक सत्र आधा बीतने को, फिर भी नहीं मिला दूसरा यूनिफॉर्म

* पहला गणवेश भी उधारी पर सिलवाया गया, भुगतान अब तक बाकी
* जूते-मोजे योजना भी बंद होने की चर्चा, मुख्याध्यापकों पर बढ़ा दबाव
अमरावती/दि.14– स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां स्कूलों में देशभक्ति के कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है, वहीं अमरावती जिले सहित राज्य के लाखों विद्यार्थी आज भी अपने दूसरे गणवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं. समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को हर वर्ष दो निशुल्क गणवेश उपलब्ध कराने का प्रावधान है, लेकिन चालू शैक्षणिक वर्ष में अब तक अधिकांश विद्यार्थियों को केवल एक ही गणवेश मिल पाया है. दूसरे गणवेश के लिए आवश्यक निधि अभी तक स्कूल प्रबंधन समितियों के खातों में जमा नहीं हुई है.
इस स्थिति के कारण राज्यभर के लगभग 28 लाख 77 हजार विद्यार्थियों, जबकि अमरावती जिले के 1 लाख 1 हजार 331 विद्यार्थियों को दूसरे गणवेश से वंचित रहना पड़ रहा है. स्कूल खुलने के कई महीने बाद भी योजना का लाभ अधूरा रहने से पालकों, शिक्षकों और स्कूल प्रशासन में नाराजगी बढ़ रही है.
* एक गणवेश मिला, दूसरे का अब भी इंतजार
बता दे कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष दो गणवेश उपलब्ध कराए जाते हैं. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को समान शैक्षणिक अवसर प्रदान करना और स्कूलों में समानता की भावना को मजबूत करना है. लेकिन इस वर्ष स्थिति अलग है. कई स्कूलों में विद्यार्थियों को केवल एक गणवेश दिया गया है, जबकि दूसरे गणवेश के लिए आवश्यक राशि अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई. परिणामस्वरूप विद्यार्थी पुराने या एकमात्र गणवेश के सहारे पूरा शैक्षणिक सत्र निकालने को मजबूर हैं. स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के पास दूसरा गणवेश उपलब्ध नहीं होने की चर्चा स्कूलों और पालकों के बीच बनी हुई है.
* उधारी पर तैयार हुआ पहला गणवेश
जानकारी के अनुसार पहले गणवेश की सिलाई और आपूर्ति का काम कई स्थानों पर उधारी के आधार पर किया गया. स्कूल प्रबंधन समितियों को उम्मीद थी कि सरकार की ओर से निधि शीघ्र उपलब्ध हो जाएगी और आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान किया जा सकेगा. लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी राशि जारी नहीं होने से गणवेश आपूर्ति करने वाले विक्रेता और सिलाई करने वाले समूह लगातार भुगतान की मांग कर रहे हैं. स्थिति यह हो गई है कि अनेक स्कूलों के मुख्याध्यापकों को बार-बार आपूर्तिकर्ताओं के फोन और पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है. इससे उनकी प्रतिष्ठा और प्रशासनिक विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है.
* जिले में एक लाख से अधिक व राज्य में लाखों विद्यार्थी प्रभावित
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार राज्य में पहली से आठवीं कक्षा तक के लगभग 28.77 लाख विद्यार्थी इस योजना के लाभार्थी हैं. इनमें अमरावती जिले के 1,01,331 विद्यार्थी शामिल हैं. यदि शीघ्र निधि उपलब्ध नहीं हुई तो इन सभी विद्यार्थियों को पूरे शैक्षणिक वर्ष में केवल एक ही गणवेश पर निर्भर रहना पड़ सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि वहां अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से अतिरिक्त गणवेश खरीदने की स्थिति में नहीं होते.
* जूते-मोजे योजना पर भी अनिश्चितता
गणवेश योजना के साथ-साथ विद्यार्थियों को मुफ्त जूते और मोजे उपलब्ध कराने की योजना को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. राज्य सरकार ने दो वर्ष पूर्व विद्यार्थियों को जूते और मोजे उपलब्ध कराने की योजना शुरू की थी. इसके तहत प्रति विद्यार्थी लगभग 170 रुपये की राशि स्कूल प्रबंधन समितियों को दी जाती थी, जिससे विद्यार्थियों के लिए जूते और मोजे खरीदे जाते थे. हालांकि इस वर्ष अब तक इस योजना के लिए भी निधि जारी नहीं की गई है. इसके चलते शिक्षकों और पालकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि कहीं सरकार ने इस योजना को बंद तो नहीं कर दिया है. परंतु इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन निधि जारी न होने से अनिश्चितता बनी हुई है.
* शिक्षा पर पड़ सकता है असर
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि विद्यार्थी कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है. ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए गणवेश केवल एक पोशाक नहीं, बल्कि स्कूल से जुड़ाव और आत्मसम्मान का प्रतीक होता है. समय पर गणवेश उपलब्ध न होने से विद्यार्थियों में हीनभावना पैदा हो सकती है और उनकी नियमित उपस्थिति पर भी असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ यदि समय पर नहीं पहुंचता, तो उनका मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है.
* शिक्षक संगठन ने उठाई आवाज
महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति के राज्य प्रचार प्रमुख राजेश सावरकर ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थी हित की योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि गणवेश योजना और अन्य छात्र कल्याण योजनाओं में हो रही देरी का विपरीत प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा और स्कूलों की छात्र संख्या पर पड़ सकता है. सावरकर ने मांग की कि पहले गणवेश का लंबित भुगतान तत्काल स्कूल प्रबंधन समितियों के खातों में जमा किया जाए तथा दूसरे गणवेश के लिए आवश्यक निधि बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाए.
* केंद्र और राज्य दोनों की जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार गणवेश योजना के लिए आवश्यक निधि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार उपलब्ध कराती है. शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि निधि जारी होने में हुई देरी के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई है. जब तक दोनों स्तरों से राशि उपलब्ध नहीं होती, तब तक स्कूल प्रबंधन समितियां दूसरा गणवेश उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं होंगी.
* स्वतंत्रता दिवस पर भी अधूरी सुविधा
एक ओर राज्यभर के स्कूल स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों विद्यार्थी उस दूसरे गणवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो उन्हें कई सप्ताह पहले मिल जाना चाहिए था. शिक्षकों, पालकों और विद्यार्थियों की अब यही मांग है कि सरकार जल्द से जल्द लंबित निधि जारी करे, ताकि विद्यार्थियों को उनका अधिकार समय पर मिल सके और शिक्षा विभाग की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य अधूरा न रह जाए.

Back to top button