अमरावती संभाग के बड़े जलाशयों में 41.88 फीसद जल संग्रहित
मध्यम प्रकल्पों में 44.51 प्रतिशत पानी

अमरावती/दि.29 – लगातार हो रही बारिश से अमरावती संभाग के बड़े और मध्यम सिंचाई प्रकल्पों में जलसंचय लगातार बढ़ रहा है. जलसंपदा विभाग की 29 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार संभाग के 9 बड़े बांधों में 586.29 दलघमी (41.88 प्रतिशत) तथा 27 मध्यम प्रकल्पों में 343.51 दलघमी (44.51 प्रतिशत) उपयोगी जलसंचय दर्ज किया गया है. वहीं, बड़े, मध्यम और लघु मिलाकर कुल 288 प्रकल्पों में 1192.90 दलघमी (38.45 प्रतिशत) उपयोगी पानी उपलब्ध है.
सबसे बड़े जलाशयों में अमरावती जिले के ऊर्ध्व वर्धा प्रकल्प में 294.43 दलघमी (52.20 प्रतिशत) पानी उपलब्ध है. इसके अलावा यवतमाल के पुस बांध में 35.49 प्रतिशत, अरुणावती में 42.02 प्रतिशत, बेंबला में 40.17 प्रतिशत, अकोला के काटेपूर्णा में 17.24 प्रतिशत, वान प्रकल्प में 44.08 प्रतिशत, बुलढाणा के नलगंगा में 56.69 प्रतिशत, पेनटाकली में 39.99 प्रतिशत, जबकि खडकपूर्णा बांध अभी भी खाली है और उसमें उपयोगी जलसंचय शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया है. मध्यम प्रकल्पों में यवतमाल का सायखेडा जलाशय 100 प्रतिशत क्षमता तक भर चुका है. इसके अलावा वाघाड़ी, निगुण, सोनल, कोराडी और उतावली प्रकल्पों में भी पूर्ण क्षमता के बराबर जलसंचय दर्ज किया गया है. अमरावती जिले की चंद्रभागा प्रकल्प 80.92 प्रतिशत, पूर्णा 75.34 प्रतिशत, सपन 41.48 प्रतिशत, शहानूर 33.23 प्रतिशत तथा पंढरी 21.49 प्रतिशत क्षमता तक भर चुकी है. हालांकि गर्गा और घुंगशी बैरेज में अभी उपयोगी जलसंचय नहीं है.
रिपोर्ट के अनुसार अमरावती जिले के एक बड़े, सात मध्यम और 48 लघु प्रकल्पों में कुल 494.10 दलघमी (47.19 प्रतिशत) उपयोगी जलसंचय उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में संतोषजनक स्थिति दर्शाता है. जलसंपदा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विदर्भ में मानसून सक्रिय रहने से आने वाले दिनों में बांधों के जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना है. विभाग सभी प्रमुख जलाशयों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.





