निर्दोष की दुकान हटाई, मामूली अतिक्रमण के लिए 60 पुलिस बुलाई
नगर पालिका की मनमानी और लापरवाही से नागरिक त्रस्त

* चोर छोड़ संन्यासी को फांसी देने का काम हो रहा जुडवा शहर में
परतवाड़ा/दि.16 – नगर पालिका अचलपुर प्रशासन अब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के पदारूढ़ होने के बाद भी और ज्यादा निरंकुश और तानाशाह हो चुका है. पूरा जुड़वां शहर अतिक्रमण के मकड़जाल में फंसा होने के बावजूद विगत 1 जून को अलसुबह नपा प्रशासन के सीओ और निर्माण विभाग के अभियंताओं ने सिर्फ जयस्तंभ परिसर की सिर्फ तीन दुकानों को अतिक्रमण घोषित कर वहां बुलडोजर चला दिया था. एक तरफ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति का बखान करते दिखाई देते है. वही स्थानीय नगर पालिका ने इस शक्ति का विस्मरण करते हुए समाजसेविका रूपाली बुले की होटल को अतिक्रमण घोषित कर उस पर भी बुलडोजर से कहर बरसा दिया था. रूपाली बुले नपा प्रशासन की इस मनमानी के खिलाफ न्यायालय की शरण में गई है. स्थानीय अदालत ने मामले की सुनवाई कर स्थगनादेश जारी कर जैसे थे वैसे का आदेश दिया है. इसी प्रकार मुराद नामक नागरिक ने भी नपा के अधिकारियों की मुराद पूरी नहीं होने दी, वो भी अतिक्रमण कार्रवाई से पूर्व ही स्टे ले आए थे.
राजनीतिक द्वेषभावना, बदला लेने की उत्कंठा के चलते रूपाली बुले का चार से पांच लाख रुपए का नुकसान किए जाने की बात नगर पालिका हलकों में सुनने को मिल रही है. किसी डॉक्टर और मेडिकल के लाभदायी संबंध में दरार आने से मुराद को बलि का बकरा बनाए जाने की चर्चा भी जोरो पर है. नगर पालिका ने इस अत्यंत छोटे से अभियान के लिए 60 पुलिस कर्मचारियों की तैनाती की थी. गौरतलब यह भी है कि एक पुलिस कर्मी को बंदोबस्त में लेने के लिए नपा को 1200 रुपए प्रतिदिन जमा करने होते है. यानी नगर पालिका ने इस अतिक्रमण अभियान के पीछे नागरिकों के करीब दो लाख रुपए स्वाह कर दिए है.
लोगो में चर्चा है और जानकार लोग आरोप लगा रहे है कि नपा मुख्याधिकारी ने किसी से सुपारी लेकर रूपाली और मुराद को हटाने का आदेश दिया था. इन्हीं मुख्याधिकारी को यौन शोषण कांड के मुख्य आरोपी अयान का अतिक्रमित घर हटाने का ख्याल तक नहीं आया, जबकि वो भी जयस्तंभ के इसी परिसर में है. लोग आँखे मिचमिचा कर कहने लगे है कि अत्यंत संभ्रांत सदर बाजार क्षेत्र की दो प्रमुख गलियों पर लोगो ने कब्जा कर रखा, लेकिन अपर सीओ को यह दिखाई नहीं देता, सुभाष चौक (दुरानी) के पास नपा प्राथमिक विद्यालय को जाता रास्ता ही एक व्यक्ति ने अपने कब्जे में कर रखा , यहां अब आलीशान व्यवसायिक प्रतिष्ठान खड़ा हो चुका है, गुजरी बाजार में महिलाओं, बच्चों को आने जाने को भी जगह नहीं रहती. फिर भी नगर पालिका कभी कोई कार्रवाई नहीं करती है. दूसरी ओर कोर्ट से रूपाली बुले को स्टे मिलने के बाद भी काले नामक इंजीनियर वहां फेंसिंग लगाने और बोर्ड लगाने पहुंच गए. अदालत के जैसे थे वैसे आदेश की खुली अवहेलना करते हुए वहां बोर्ड लगाया गया, खबर लिखे जाने तक फेंसिंग लगाने का काम जारी था.
नपा मुख्यालय के सामने स्थित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की पार्किंग चोरी गई है, लेकिन नपा सीओ की इतना धीरज है कि उन्हें कभी इस आर्केड में पार्किंग उपलब्ध करवाने का विचार तक नहीं आया. सरमसपुरा में नपा के एक पदाधिकारी ने भारी अतिक्रमण कर रखा, लेकिन वहां बुलडोजर पहुंचा ही नहीं. नपा की एक महिला सभापति ने पंचमुखी चौक पर पक्का अतिक्रमण किया, किंतु इसे हटाने की सीओ एंड कंपनी ने कभी पहल नहीं की. दुरानी चौक पर कई नोटिस देकर भी नपा ने दूध डेयरी का अतिक्रमण आज तक नहीं हटाया. सिविल लाइन, लाल पुल, अंजनगांव स्टॉप, चिखलदरा स्टॉप, बैतूल स्टॉप और बैतूल नाका का अतिक्रमण, संतोषनगर में भाजपा के एक पदाधिकारी ने मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण के लेआउट का रास्ता हड़प कर लिया है. पेंशनपुरा, मिश्रा लाइन, तिलक चौक, गोपालनगर, आठवड़ी बाजार, कल्याण मंडपम के सामने, अचलपुर को जाते मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण ही अतिक्रमण है.
नगर पालिका की अतिक्रमण को हटाने के लिए कोई निर्धारित पॉलिसी नहीं है और ना ही नपा ने आज तक किसी तोडू दस्ता का गठन किया है. जो व्यक्ति नगर पालिका सीओ और निर्माण विभाग इंजिनियरों की जेब गरम करता है, उसके पक्के कच्चे अतिक्रमण पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता है, दूसरी ओर गोर गरीब मजलूम लोगो पर अतिक्रमण के नाम पर बिजलियां गिराने का काम सीओ कर रहे है. कहते है कि रिश्वत की दौलत से औलाद नहीं पनपती, निर्दोष पर अत्याचार करके जो बददुआ और श्राप मिलता है, उसे इसी जमीन पर भुगतने को तैयार रहने की बात पीड़ित लोग कह रहे हैं. चौधरी मैदान अचलपुर में नपा की जमीन पर ही एक व्यक्ति ने अतिक्रमण कर रखा और सीओ को इसकी सुध लेने की भी फुर्सत नहीं है. जयस्तंभ परिसर से आगे लाल पुल रोड पर एक पूरा का पूरा मार्केट बगैर अनुमति के बना हुआ है लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों को यह दिखाई नहीं देता. बस स्टैंड रोड पर अतिक्रमण की भरमार है.
भ्रष्टाचार के रुपयों से परिवार का पालन पोषण कर रहे अधिकारियों को अब अदालत से सबक मिलने की उम्मीद की जा रही है. रूपाली बुुले के स्टे पर 18 तारीख को सुनवाई है, वही मुराद के स्थगनादेश पर भी न्यायालय में सुनवाई होगी. ऐसे अत्यंत करप्ट अधिकारियों के खिलाफ अब नागरिकों ने जो अदालत में जाने का जो हौसला दिखाया है. उसकी जितनी भी तारीफ करो कम ही होंगी.





