विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने मनाया काला दिवस

महाराष्ट्र दिन के निषेधार्थ लगाए नारे

* सडक पर उतर किया जोरदार प्रदर्शन
अमरावती /दि.1महाराष्ट्र के स्थापना दिवस के अवसर पर विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के पदाधिकारियों ने पृथक विदर्भ राज्य की मांग को लेकर तीव्र प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र दिवस निषेध दिन के रुप में मनाया. विदर्भवादियों ने इस अवसर पर सडकों पर उतरकर जोरदार नारेबाजी की.
विदर्भ राज्य आंदोलन समिति का कहना है कि, 1 मई 1960 को विदर्भ को महाराष्ट्र में जबरदस्ती शामिल कर विदर्भ के पहले के उद्योग नष्ट किए गए. नए उद्योग महाराष्ट्र ने आने नहीं दिए. परिणामस्वरुप विदर्भ में बेरोजगारी बढती गई. मुंबई, पुणे, नाशिक, ठाणे की समस्याओं पर ध्यान देकर वहां का तेजी से विकास किया गया. वहीं विदर्भ की अनदेखी की गई. विदर्भ के चार विधायक और एक सांसद कम हुए. केंद्र सरकार ने विदर्भ की मांग के तरफ लगातार अनदेखी की. इस कारण विदर्भ इसके परिणाम भुगत रहा है. किसानों की आत्महत्या और बढती बेरोजगारी से विदर्भ गिरा हुआ है. इस कारण अनुच्छेद की धारा 3 के मुताबिक पृथक विदर्भ करने की मांग विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने की है. शहराध्यक्ष रियाज खान व महिला अध्यक्षा सुषमा मुले के नेतृत्व में महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर काला दिवस मनाते हुए विदर्भवादियों ने सडक पर उतरकर तीव्र प्रदर्शन किया. विदर्भ राज्य महिला अध्यक्षा रंजना मामर्डे व पश्चिम विदर्भ प्रमुख पी. आर. राजपूत व कोअर कमिटी सदस्य प्रकाश लढ्ढा इस अवसर पर उपस्थित थे. पश्चिम विदर्भ सोशल मीडिया प्रमुख संकेत चौधरी, पांडुरंग बिजवे, अफसर भाई, लक्ष्मण वानखेडे, सतीश प्रेमलवार, रहेमान भाई, प्रा. शरद पुसदकर, डॉ. विजय कुबडे, साहेबराव इंगले, अशोकराव राणे, जीवन पचगाडे, अशोकराव हांडे आदि समेत अनेक लोग इस आंदोलन में शामिल हुए.

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