कडी धूप में शाला क्यों शुरु करें?

हाईकोर्ट का शिक्षा विभाग से सवाल

नागपुर/दि.14- प्रदेश के अन्य भागों की तरह विदर्भ में भी 15 जून से शाला सत्र शुरु करने का निर्णय शिक्षा विभाग ने किया है. इस फैसले के विरुद्ध दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए नागपुर खंडपीठ ने प्रश्न पूछा ैहै कि, विदर्भ की कडी धूप में शाला सत्र शुरु करने की जल्दबाजी क्यों है? आगामी 9 जून को पुन: सुनवाई रखी गई है. तब तक शिक्षा विभाग से जवाब-तलब किया गया है.
महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति पुणे की वर्धा शाखा के अध्यक्ष विजय कोंबे तथा लीलाधर ठाकरे ने उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की है. जिस पर मंगलवार को न्या. रजनीश व्यास के सामने सुनवाई हुई. याचिका में उपरोक्त दोनों पदाधिकारियों ने दावा किया कि, विदर्भ में जून तक 42-45 डिग्री तापमान रहने की आशंका रहती है. मौसम विभाग के आंकडों से यह स्पष्ट हो रहा है. देहाती भागों में विद्यार्थियों को 3 से 5 किमी दूरी तक जाना पडता है. सबेरे जल्दी शाला पहुंचना और दोपहर में कडी धूप में घर लौटना मुश्कील होगा. विद्यार्थियों का स्वास्थ्य खतरे में पडने का दावा याचिका में किया गया है. याचिकाकर्ता की ओर से एड. भानुदास कुलकर्णी ने पक्ष रखा.
2007 के हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लेख उन्होंने अदालत में किया. उस समय गर्मी को देखते हुए विदर्भ में 30 जून के बाद शालाएं शुरु करने के निर्देश दिए थे. उसके विरुद्ध राज्य सरकार ने विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी. किंतु फिर उसे पीछे नहीं लिया था. उपरांत 22 जून 2007, 11 अप्रैल 2022 और 20 अप्रैल 2023 के राज्य सरकार के निर्णयों का जिक्र किया गया. जिसमें विदर्भ में 30 जून के बाद शाला का नया सत्र शुरु करने की नीति अपनाई गई.
सुनवाई दौरान एड. कोल्हे ने सरकार का पक्ष रखा. न्या. व्यास ने सरकार से पूछा कि, नया सत्र शुरु करने की जल्दबाजी क्यों हैं? कडी धूप में शालाएं शुरु करना कहां तक उचित है?

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