जनगणना में झूठी जानकारी दी तो जेल?
प्रशासन की कड़ी चेतावनी

* एक गलती से हो सकती है 3 साल की सजा
यवतमाल/दि.14– भारत के सर्वांगीण विकास की नींव मानी जाने वाली आगामी जनगणना के लिए प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह तैयार है. लेकिन यह प्रक्रिया केवल आंकड़े जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी भी है. जनगणना प्रक्रिया में प्रगणकों को सहयोग न करना, जानकारी देने से इनकार करना या जानबूझकर गलत जानकारी देना अब ‘गैर-संज्ञेय अपराध’ माना जा सकता है, ऐसी चेतावनी प्रशासन की ओर से दी गई है.
* क्या कहता है ‘जनगणना अधिनियम 1948’?
भारत में जनगणना जनगणना अधिनियम 1948 के तहत कराई जाती है. इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, पूछे गए सवालों के जवाब देना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है. धारा 11 (1) (व) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति प्रगणक को जानबूझकर जवाब देने से इनकार करता है या गलत जानकारी दर्ज करवाता है, तो यह कानूनी अपराध माना जाता है. नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. यदि अपराध गंभीर हो या प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की गई हो, तो संबंधित व्यक्ति को 3 साल तक की जेल हो सकती है.
* जानकारी सुरक्षित और गोपनीय
अक्सर नागरिकों को यह गलतफहमी होती है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा. लेकिन जनगणना अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है. इस जानकारी का उपयोग किसी भी अदालत में सबूत के रूप में नहीं किया जा सकता और न ही इसे किसी अन्य सरकारी डेटाबेस से जोड़ा जाता है. इसलिए प्रशासन ने नागरिकों से बिना डर के सही जानकारी देने की अपील की है.
* डिजिटल जनगणना होगी खास
आगामी जनगणना भारत के इतिहास की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ होगी. नागरिकों से उनके परिवार की सामाजिक, आर्थिक और भौतिक स्थिति से जुड़े लगभग 31 से 34 सवाल पूछे जाएंगे. प्रगणक कागजी फॉर्म की जगह विशेष रूप से विकसित मोबाइल ऐप के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे, जिससे डेटा संग्रहण तेज और अधिक सटीक होगा. साथ ही, नागरिकों से अपील की गई है कि प्रगणक घर आने पर उनका आधिकारिक पहचान पत्र जरूर जांचें और उसके बाद ही जानकारी दें.





