मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने की आशंका?

राज्य में भी ‘एसआईआर’ का असर

मुंबई /दि.15- पश्चिम बंगाल में विवादास्पद रही मतदाता सूची की सखोल विशेष पुनरीक्षण मुहिम को राज्य में लागू करते समय मौजूदा मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है. भाजपा ने पहले ही कुछ शहरों में मतदाता सूची के नामों पर संदेह व्यक्त किया है.
राज्य में यह मुहिम 30 जून से 29 जुलाई के बीच चलाई जाएगी. वर्तमान में राज्य में 9 करोड़ 86 लाख मतदाता हैं और इस अभियान में कितने मतदाता हटाए जाएंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं. राज्य में इससे पहले 2002 में मतदाता सूची का सखोल पुनरीक्षण हुआ था. 2002 की इस मुहिम के आधार पर ही यह नया अभियान चलाया जाएगा. 1 अक्टूबर तक 18 वर्ष पूरे करने वालों को मतदाता पंजीकरण की अनुमति होगी.
* यह मुहिम कैसी होगी?
राज्य में 30 जून से 29 जुलाई के बीच यह अभियान चलेगा. 30 जून से चुनाव कर्मचारी और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करेंगे और उन्हें भरवाकर लेंगे. यदि किसी मतदाता से संपर्क नहीं हो पाता है तो वहां कम से कम तीन बार जाने की जिम्मेदारी चुनाव कर्मचारियों पर होगी. मतदाताओं को सिर्फ फॉर्म भरकर देना होगा, किसी भी प्रकार के दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी.
2002 की पुनरीक्षण प्रक्रिया में जिन मतदाताओं के नाम में असंगति होगी, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा. राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मतदाताओं से फॉर्म भरवा सकते हैं और उन्हें चुनाव आयोग के अधिकारियों को सौंपने की जिम्मेदारी उनकी होगी. चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से हर मतदान केंद्र पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त करने का आग्रह किया है ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी रहे.
* नाम हटाए जाने को लेकर उत्सुकता
राज्य में वर्तमान में 9 करोड़ 86 लाख 64 हजार 413 मतदाता हैं. मालेगांव, मुंब्रा, अमरावती, मुंबई के कुछ हिस्से और छत्रपति संभाजीनगर जैसे क्षेत्रों के मतदाताओं को लेकर पहले से ही भाजपा नेताओं ने संदेह जताया है. कुछ भाजपा नेताओं ने अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों से नाम हटाने की घोषणा भी की है. भाजपा के कुछ नेताओं ने संवैधानिक पदों पर न होते हुए भी पुलिस सुरक्षा में सरकारी अधिकारियों की बैठकें आयोजित की हैं. मालेगांव महानगरपालिका के मुख्य प्रवेश द्वार पर भाजपा नेता किरीट सोमैया को महापौर और अन्य पदाधिकारियों ने रोका था. इस पृष्ठभूमि को देखते हुए राज्य में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है. पश्चिम बंगाल में इस अभियान के दौरान 91 लाख नाम हटाए गए थे. वहां नाम हटने से भाजपा को लाभ और ममता बनर्जी को नुकसान होने का निष्कर्ष निकाला जाता है.
* 5 करोड़ नाम हटाए गए
दो चरणों में अब तक चलाए गए विशेष पुनरीक्षण अभियान में लगभग 5 करोड़ नाम हटाए गए हैं. यह कुल मतदाताओं का लगभग 10 प्रतिशत है. साथ ही लगभग 2 करोड़ नए नाम जोड़े गए हैं. सबसे अधिक 2 करोड़ नाम उत्तर प्रदेश में हटाए गए हैं. पश्चिम बंगाल में 91 लाख नाम हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हुआ था.
* राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान का समयबद्ध कार्यक्रम:
– 20 से 29 जून तक कर्मचारियों का प्रशिक्षण, छपाई व अन्य तैयारी
– 30 जून से 29 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाताओं को फॉर्म वितरित करना और भरवाना
– 5 अगस्त को मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित करना
– 5 अगस्त से 4 सितंबर तक मसौदे पर दावे और आपत्तियां दाखिल करना
– 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक सुनवाई, दावे और आपत्तियों का निपटारा
– 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करना

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