मई की भीषण गर्मी से राज्य के बांधों में पानी का स्तर घटा,
सिर्फ 34 प्रतिशत जलसंग्रह शेष

* पुणे और छत्रपति संभाजीनगर मंडल में जलसंकट गहराने की आशंका
खामगांव/दि.15– महाराष्ट्र में मई महीने की भीषण गर्मी का असर अब जलसंग्रह पर साफ दिखाई देने लगा है. बढ़ते तापमान और तेज़ वाष्पीकरण (इवैपोरेशन) के कारण राज्य के बांधों में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है. जल संसाधन विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार राज्य की 3,026 परियोजनाओं में उपयोग योग्य पानी का स्टोरेज अब केवल 34.13 प्रतिशत रह गया है. हालांकि, पिछले वर्ष इसी अवधि में राज्य में जलसंग्रह 29.70 प्रतिशत था, लेकिन इस बार भी कई क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.
* परियोजनानुसार जलसंग्रह
– बड़ी परियोजनाएं (138) : 28.06 प्रतिशत
– मध्यम परियोजनाएं (264) : 36.92 प्रतिशत
– लघु परियोजनाएं (2626) : 33.53 प्रतिशत
* पुणे मंडल में सबसे गंभीर स्थिति
विभागीय आंकड़ों के अनुसार पुणे मंडल में पानी का संकट सबसे अधिक गहराता दिखाई दे रहा है. यहां के बांधों में फिलहाल केवल 23.32 प्रतिशत जलसंग्रह बचा है. बड़ी परियोजनाओं में यह आंकड़ा घटकर 23.30 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे आगामी दिनों में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
* छत्रपति संभाजीनगर में तेज गिरावट
छत्रपति संभाजीनगर मंडल में भी जलसंग्रह में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में यहां 28.69 प्रतिशत पानी शेष है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 39.59 प्रतिशत था. मराठवाड़ा क्षेत्र में आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है.
* नागपुर और नासिक मंडल भी प्रभावित
नागपुर मंडल में वर्तमान जलसंग्रह 33.37 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है. वहीं नासिक मंडल में 32.10 प्रतिशत पानी शेष है.
* अमरावती मंडल में कुछ परियोजनाएं सूखी
अमरावती मंडल में कुल जलसंग्रह 44.5 प्रतिशत बताया गया है, लेकिन कुछ परियोजनाओं की स्थिति बेहद खराब है. खड़कपूर्णा परियोजना में उपयोग योग्य जलसंग्रह शून्य प्रतिशत तक पहुंच गया है.
* कोंकण क्षेत्र में स्थिति बेहतर
राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में कोंकण क्षेत्र की स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक बताई जा रही है. यहां फिलहाल 38.67 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध है.





