सगाई, बारसा, नए घर और वाहन खरीदने शुभ है अधिक मास

कल से हो रहा प्रारंभ

* पुरोहितों ने किया स्पष्ट
* नैमित्तिक कार्य, विवाह, वास्तु न करें
* 21 मई को गुरुपुष्य योग
अमरावती/दि.16 – सौर वर्ष और चांद्र वर्ष के बीच का अंतर पूर्ण करने के लिए हिंदू कैलेंडर वर्ष में जोडे गए अधिक मास अर्थात पुरुषोत्तम मास का मंगल प्रारंभ कल रविवार 17 मई से होने जा रहा है. अमरावती मंडल ने शहर के प्रसिद्ध पंडितों, ज्योतिषाचार्यो से चर्चा की, तो उन्होंने बहुत स्पष्ट कहा कि, इस माह में सगाई संबंध, बारसा अर्थात नामकरण, नए घर अथवा वाहन की खरीदी शुभ होती है. उसी प्रकार केवल नित्य, नैमित्तिक कार्य, विवाह, घरों के वास्तु पूजन नहीं किए जाते. लेकिन नया व्यवसाय, नया वाहन खरीद सकते हैं. इतना ही नहीं इस माह किए गए दान-पुण्य बडे लाभदायी होने का भी दावा पंडित प्रकाश महाराज शर्मा ने किया. इस प्रकार की अवधारणा अधिकांश लोगों की दिखाई पडी.
* 21 मई को गुरुपुष्य योग
पुरुषोत्तम मास में अनेक नवीन कार्यो के शुभारंभ को पुरोहितों ने सही बताया. उन्होंने बताया कि, घर-दुकान, दफ्तर की खरीदी की जा सकती है. नए वाहन लिए जा सकते हैं. नया व्यवसाय, कारोबार शुरु कर सकते हैं. बल्कि आगामी 21 मई गुरुवार को गुरुपुष्य योग बन रहा है. इस दिन खरीददारी का अबूझ मुहूर्त माना जाता है. मार्केट को भी ऐसे ही मुहूर्त की प्रतीक्षा रहती है. बाजार सूत्र विशेषकर सराफा, उपकरण मार्केट, वाहन मार्केट ऐसे दिनों का ग्राहकी के लिए इंतजार करते हैं. आगामी गुरुवार को आनेवाले पुष्य योग के लिए भी अमरावती के लोगों ने खरीददारी की सोच रखी है.
* कथा-प्रवचनों के बहुतेरे आयोजन
उल्लेखनीय है कि, पुरुषोत्तम मास कहे जाते अधिक मास में नदी में स्नान और पुण्य कर्म के अधिक पुण्य मिलने का दावा किया जाता है. अत: धार्मिक यात्राओं और अनुष्ठान तथा कथा-प्रवचनों के बहुतेरे आयोजन समस्त धर्म नगरी अंबा नगरी में हो रहे हैं. यहां से धार्मिक यात्राएं भी मथुरा-वृंदावन, अयोध्या, प्रयागराज आदि के साथ ही राजस्थान के खाटू धाम के लिए ले जाई जा रही है. सैकडों की संख्या में धर्मावलंबी इन यात्राओं में सहर्ष और श्रद्धा से सहभागी हो रहे हैं.
* एक समय करें भोजन
इस बार हिंदू कैलेंडर वर्ष में जेठ का मास (महीना) बढा है. 17 मई से 15 जून तक यह माह गिना जाएगा. जिसमें एक माह एक ही समय भोजन का व्रत करने का आवाहन किया जाता है. एकभुक्त अर्थात दोपहर के समय भोजन करना, नक्त भोजन अर्थात दिन में उपवास और रात्रि में भोजन करना एवं मौन भोजन के नियम लिए जाने की जानकारी प्रकाश महाराज शर्मा ने दी. उन्होंने बताया कि, पूरे माह व्रत संभव न हो, तो भी एक दिन के लिए यह व्रत आचरण में लाना चाहिए.
* जंवाई का विशेष महत्व
इस महीने में जंवाई का खास महत्व बताया जाता है. परंपरा के अनुसार जंवाई को ससुराल बुलाकर यथाशक्ति उपहार देने की प्रथा है. अनारसे, बतासे, धोंडे और यथाशक्ति सोना-चांदी के सामान, आभूषण दिए जाते हैं. पं. प्रकाश महाराज बताते हैं कि, अनेकानेक मान्यताएं हैै. अब यह जिसके और उसके मान्य करने पर निर्भर है.
* जालीदार वस्तुओं की मांग
मार्केट में जालीदार पदार्थों की डिमांड अधिक मास में रहती है. इस दृष्टि से मिठाई दुकानदारों ने मालपुएं, अनारसे, बतासे ऑर्डर के अनुसार मात्रा में बनाना प्रारंभ कर दिया है. राजस्थानी समाज में 33-33 की संख्या में उपरोक्त व्यंजन दिए जाने अथवा मंदिरों में अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है. जवाहर गेट के भीतर पूनमचंद हलवाई, उपाध्याय घेवर फिनी वर्क्स, पांडे जी की दुग्धपूर्णा सहित अनेक प्रतिष्ठानों में जालीदार पदार्थों के ऑडर्स लिए जा रहे हैं. यह अगले माह तक क्रम चलनेवाला है. घरों-घरों में अनुष्ठान के लिए पुरोहितों को सादर और सहर्ष आमंत्रित किया जा रहा है.

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