बैंक के कर्ज के कारण रचा खुद की मौत का षड्यंत्र

शराब पिलाकर पड़ोस के दोस्त को ही मार डाला

* 8 महीने बाद हत्या का खुलासा, गोंदिया में सनसनी
गोंदिया /दि.16- मानवीय क्रूरता की सीमा पार करने वाली और कानून की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास करने वाली एक चौंकाने वाली घटना गोंदिया जिले से सामने आई है. सुनियोजित साजिश, बेहद ठंडे दिमाग से की गई हत्या और उसके बाद खुद की मौत को आभासी तरीके से स्थापित करने का भयावह प्रयास, मानो किसी फिल्म की पटकथा जैसा लगे ऐसे एक सुनियोजित हत्याकांड का खुलासा करने में पुलिस को सफलता मिली है. मृतक के भाई को शक होने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जाने से मामले का भंडाफोड़ हुआ. इस बीच, ऐसे इस जटिल हत्याकांड का आमगांव पुलिस ने पर्दाफाश किया है और देवरी स्थित अर्बन बैंक के 5 लाख रुपये के पोल्ट्री फार्म व्यवसाय के कर्ज और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए एक 28 वर्षीय युवक ने अपने ही गांव के निर्दोष दोस्त की बलि दी, यह सामने आया है. परिणामस्वरूप, पूरे 8 महीने तक पुलिस को गुमराह करने वाले इस जिंदा अपराधी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके अपने पिता ने ही उसे पुलिस थाने लाकर पुलिस के हवाले किया है.
देवरी तहसील के डोंगरगांव निवासी आरोपी अंतिम ओमप्रकाश खोटेले (28) ने पोल्ट्री फार्म के व्यवसाय के लिए देवरी स्थित अर्बन बैंक से 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था. लेकिन व्यवसाय में सफलता नहीं मिलने से वह भारी तनाव में था. इस कर्ज से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए उसने खुद को ही ’मृत’ घोषित करने की एक भयानक साजिश रची. इस जाल से निकलने के लिए उसने अपने ही गांव के दोस्त चंद्रकुमार सराटे (46) की हत्या करने की योजना बनाई. 28 अगस्त 2025 की मध्यरात्रि को आरोपी अंतिम खोटेले चंद्रकुमार सराटे के घर गया. ’कुछ काम है’, ऐसा कहकर उसने चंद्रकुमार को भरोसे में लेकर अपनी दोपहिया वाहन पर बैठाया. वहां से वह उन्हें बाह्मणी स्थित रेलवे पटरी की ओर ले गया. वहां चंद्रकुमार को जबरदस्ती शराब पिलाई गई.
इस बीच, शराब के प्रभाव से जब चंद्रकुमार पूरी तरह असहाय हो गए, तब 29 अगस्त 2025 की भोर में आरोपी अंतिम खोटेले ने अपने ही दुपट्टे से चंद्रकुमार का गला घोंट दिया. कुछ क्षणों तक तड़पने के बाद चंद्रकुमार सराटे की मौत हो गई. हत्या करने के बाद आरोपी ने पुलिस और बैंक को गुमराह करने के लिए एक चौंका देने वाला दृश्य तैयार किया. उसने मृत चंद्रकुमार के शरीर के कपड़े बदलकर उन्हें अपने कपड़े पहनाए. रेलवे दुर्घटना में मरने वाला व्यक्ति चंद्रकुमार नहीं बल्कि स्वयं ’अंतिम खोटेले’ है, ऐसा सभी को लगे इसलिए उसने मृतदेह की जेब में अपने पहचान पत्र (आधार कार्ड) और एटीएम कार्ड जानबूझकर रख दिए.
अपनी दोपहिया वाहन भी उसने उसी घटनास्थल पर, यानी बाह्मणी रेलवे (आमगांव-देवरी महामार्ग) पटरी से तीन किलोमीटर पूर्व दिशा में छोड़ दी और वह खुद रात के अंधेरे में फरार हो गया. इस चालाकी के कारण आठ महीनों तक वह दुनिया की नजर में ’मृत’ था और बैंक का 5 लाख रुपये का कर्ज भी उसकी मौत के साथ खत्म हो गया है, ऐसा दिखाने का उसका प्रयास था. चंद्रकुमार सराटे के भाई रमेश सराटे (उम्र 43, निवासी डोंगरगांव) के मन में इस घटना और चंद्रकुमार के लापता होने को लेकर गहरा शक पैदा हुआ था. आखिरकार उन्होंने आमगांव पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. आमगांव पुलिस ने तकनीकी जांच करते हुए जिसे दुनिया मृत मान रही थी, वह अंतिम खोटेले वास्तव में जिंदा है, यह साबित कर दिया.

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