महावितरण के दो टुकड़े!

महाराष्ट्र में किसानों के लिए स्थापित हुई स्वतंत्र बिजली कंपनी

नागपुर/दि.16 – राज्य में कृषि बिजली आपूर्ति के लिए स्वतंत्र कंपनी स्थापित करने का बड़ा निर्णय राज्य सरकार ने लिया है और महावितरण के पुनर्गठन की आधिकारिक अधिसूचना शुक्रवार को राजपत्र में प्रकाशित की गई. इसके अनुसार कृषि उपभोक्ताओं की बिलिंग, वसूली, सब्सिडी प्रबंधन और बिजली आपूर्ति से संबंधित कामकाज ‘एमएसईबी सोलर एग्रो पावर लिमिटेड’ इस नई संस्था को सौंपा जाएगा. हालांकि बिजली वितरण प्रणाली, बिजली लाइनें और बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) महावितरण के पास ही रहेगा और नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी.
राज्य में कृषि बिजली आपूर्ति को स्वतंत्र तरीके से संभालने के लिए महावितरण का विभाजन करने का महत्वपूर्ण निर्णय सरकार ने लिया है. इसके लिए ‘महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी की पुनर्गठन और हस्तांतरण योजना, 2026’ यह अधिसूचना शुक्रवार को राजपत्र में प्रकाशित की गई. इस निर्णय के अनुसार कृषि बिजली आपूर्ति का स्वतंत्र व्यवसाय ‘एमएसईबी सोलर एग्रो पावर लिमिटेड’ इस नई कृषि संस्था को सौंपा जाएगा और यह योजना 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी.
* सटीक निर्णय क्या है?
राज्य सरकार ने महावितरण का कृषि बिजली आपूर्ति विभाग अलग करके स्वतंत्र कृषि संस्था स्थापित करने का निर्णय लिया है. यह संस्था कृषि उपभोक्ताओं के लिए स्वतंत्र बिजली वितरण लाइसेंसधारी के रूप में काम करेगी. ‘महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल (एमएसईबी) सोलर एग्रो पावर लिमिटेड’ यह कंपनी कृषि व्यवसाय संभालेगी. यह एमएसईबी होल्डिंग कंपनी के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (सब्सिडियरी) होगी.
* कृषि संस्था के पास कौन सी जिम्मेदारियां होंगी?
कृषि उपभोक्ताओं का पंजीकरण, नए बिजली कनेक्शन, बिलिंग, बिजली बिल वसूली, उपभोक्ता सेवा, सब्सिडी प्रबंधन, नियामक आवेदन, लेखांकन (अकाउंटिंग) और कृषि बिजली आपूर्ति से संबंधित सभी व्यवहार इस संस्था के पास होंगे. वहीं बिजली लाइनें, ट्रांसफार्मर, सब-स्टेशन, वितरण प्रणाली, बिजली पारेषण व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं महावितरण के पास ही रहेंगी. औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और गैर-कृषि उपभोक्ताओं को महावितरण ही बिजली आपूर्ति करेगा.
* कृषि संस्था को कौन सा दर्जा मिलेगा?
यह संस्था ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ के रूप में काम करेगी. महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग के सभी नियमों और नियंत्रण के तहत यह संस्था कार्यरत रहेगी. कृषि उपभोक्ताओं के लिए मिलने वाली सभी सब्सिडी और वित्तीय सहायता कृषि संस्था के पास जमा होगी. यह राशि बिजली लागत की प्रतिपूर्ति के लिए और महावितरण को सेवा शुल्क देने के लिए उपयोग की जाएगी.
* बकाया और संपत्ति का क्या होगा?
कृषि उपभोक्ताओं का बकाया, कृषि सब्सिडी का आना और कृषि व्यवसाय से संबंधित कुछ अचल संपत्तियां नई संस्था को हस्तांतरित की जाएंगी. कृषि संस्था की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) के लिए राज्य सरकार न्यूनतम 2,500 करोड़ रुपये की गारंटी देगी. महावितरण का मौजूदा कर्ज, बैंक देनदारियां, वित्तीय जिम्मेदारियां और बिजली खरीद समझौता महावितरण के पास ही रहेगा. कृषि संस्था केवल खुदरा बिजली आपूर्तिकर्ता के रूप में काम करेगी. महावितरण कृषि संस्था को विभिन्न सेवाएं प्रदान करेगा और इसके लिए सेवा शुल्क लिया जाएगा. आयोग ने 2026 से 2030 की अवधि के लिए वार्षिक अनुमानित 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
* बिजली खरीद समझौतों का क्या होगा?
बिजनी खरीद समझौते कृषि संस्था को हस्तांतरित नहीं किए जाएंगे. ये समझौते महावितरण के पास ही रहेंगे. हालांकि कृषि व्यवसाय के लिए उनका लाभ कृषि संस्था को दिया जाएगा. कृषि व्यवसाय से संबंधित सभी अदालती, नियामक और कानूनी मामले कृषि संस्था को हस्तांतरित किए जाएंगे. इस योजना में आवश्यकतानुसार बदलाव, संशोधन या फेरबदल करने का अधिकार राज्य सरकार के पास सुरक्षित रखा गया है.

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