20 से कम विद्यार्थी, फिर भी शाला का स्थानांतर नहीं

सरकार ने किया स्पष्ट

* उपसंचालक को दिए अधिकार
मुंबई/दि.16 – प्रदेश की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के स्थानांतर के संबंध में शालेय शिक्षा विभाग ने नए कडे मापदंड लागू किए है. नई नीति के अनुसार 20 से कम विद्यार्थी रहनेवाली प्राथमिक और 40 से कम विद्यार्थी वाली माध्यमिक शाला के स्थलांतर प्रस्ताव पर अब विचार नहीं किया जाएगा. शुक्रवार को नए नियम घोषित किए गए. जिससे देहातों में कम पटसंख्या की शालाओं पर परिणाम होने की आशंका जताई जा रही है.
जीर्ण भवन, प्राकृतिक आपदा, विकास परियोजनाओं का प्रभाव, अपूर्ण सुविधाएं, विद्यार्थी संख्या, किराया अनुबंध खत्म होने अथवा किराए की जगह से अपनी जगह में स्थानांतरित होने की परिस्थिति में ही स्थलांतर की अनुमति दी जाएगी. नई नीति में यह स्पष्ट होने का दावा किया गया है.
स्थानांतरण के लिए सक्षम प्राधिकारी का प्रमाणपत्र, लोनिवि का अंतर प्रमाणपत्र और लोकल स्वायत्ता संस्था की एनओसी अनिवार्य की गई है. आरटीई के अनुसार सभी भौतिक सुविधा, तुलनात्मक छायाचित्र और विद्यार्थियों का 100 फीसद आधार प्रमाणिकरण बंधनकारक किया गया है.
शाला भवन की मरम्मत अथवा नवनिर्माण शुरु रहते मूल स्कूल से तीन किमी के अंतराल में दो वर्षों के लिए अस्थायी स्थानांतरण को स्वीकृति देने का अधिकार विभागीय उपसंचालक को दिए गए है. सरकार नीति के पीछे सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित स्थानांतरण पर अंकुश लगाने का उद्देश्य बताया जा रहा है.
विभाग के नए निर्णय के बारे में शिक्षा क्षेत्र में ही मिली-जुली प्रतिक्रिया व्यक्त हो रही है. कुछ जानकार मान रहे हैं कि, नई शिक्षा नीति से गुणवत्तापूर्ण सुविधा निर्माण होगी. किंतु देहाती भागों में कम पटसंख्या की शालाओं पर उसका प्रतिकूल परिणाम भी हो सकता है.

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