आंखों में आंसू लेकर मां ने बेटे का किया नेत्रदान

जिला अस्पताल में दिल को छू लेनेे वाली घटना

अमरावती /दि.8 – अमरावती के सामान्य अस्पताल में राजापेठ अमरावती के रहनेवाले 35 साल के युवक निखिल रमेश बनकर की अचानक बीमारी के कारण मौत हो गई. उनकी मां कुंदाताई बनकर इतने दर्द में थी कि, उन्होंने अस्पताल का दरवाजा तोड दिया. मां के आंसू रुक नहीं रहे थे. उनका गुस्सा और पीडा देखकर सामान्य अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड के अन्य मरीज, डॉक्टर और नर्स भी अपने आंसू रोक नहीं पाए. इसी भावुक माहौल में मां ने अचानक अपने बेटे का मृत शरीर गोद में उठाया और उसकी आंखों के दान के लिए अपील की. यह हृदयस्पर्शी द़ृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए. तुरंत ही वार्ड के डॉक्टरों ने नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए नेत्र विभाग और हरिना फाउंडेशन से संपर्क किया.
दु:ख के पहाडों के बीच भी एक आम परिवार की माऊली ने इतना बडा साहसिक निर्णय लिया और सभी के सामने आदर्श स्थापित किया. हृदय विदारक घटना में भी उस मां को कैसे नेत्रदान की याद आई? डॉक्टरों ने जब इस बात को पूछा तो अपने आंसू रोकते हुए वह मां बोली, मैं हमेशा अखबार में हरिना संस्था की नेत्रदान की खबरें पढती थी. मुझे भी लगता था कि, अगर मैं चली जाऊं और मेरी आंखें दान हो जाए, तो कोई अंधा व्यक्ति भी देख सकेगा. लेकिन नियति ने खेल खेला, मेरी बजाए मेरा बेटा चले गया. मेरे मन में आंखें दान करने की भावना पहले से ही थी. इसलिए मुझे आंखें दान करने की याद आई. माऊली के इन शब्दों से उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के मन में आंख दान की भावना निश्चित रुप से जाग उठी, यह स्पष्ट रुप से दिखाई दे रहा था.
सामान्य अस्पताल में डॉ. पवार और नीलेश ढेंगले, सिस्टर सपना धंदर, समीक्षा भोवते तथा हरिना के मनोज राठी शरद कासट, मनीष सावला, राजेंद्र पचगडे ने भावभीने और गंभीर माहौल में आंखों को दान करने की प्रक्रिया पूरी की. इस दौरान दिवंगत निखिल बनकर के पिता रमेश बनकर, भाई स्वप्निल बनकर के साथ श्रीराम बनकर, राजेश बनकर, क्रिश बनकर, सुनील बनकर, रोहित बनकर और सभी उपस्थित लोगों ने नेत्रदाता स्व. निखिल बनकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की. सामान्य अस्पताल और हरिना फाउंडेशन ने महान माऊली और बनकर परिवार के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की.

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