‘बत्ती गुल’ से जनता परेशान, क्या कर रहे जनप्रतिनिधि

पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख व कांग्रेस शहराध्यक्ष शेखावत ने जताया संताप

* अनियमित विद्युत आपूर्ति के लिए जनप्रतिनिधियों के रवैये को ठहराया जिम्मेदार
* शहर से सालाना 420 करोड की वसूली के बावजूद लचर सेवा पर जताया रोष
* सरकार पर महावितरण को मेंटेंनेस के लिए पैसे नहीं देने का लगाया आरोप
अमरावती /दि.9 – विगत लंबे समय से अमरावती शहर में विद्युत आपूर्ति बार-बार खंडित हो रही है तथा कई-कई घंटों तक बत्ती गुल रहने के चलते आम लोगबाग काफी हद तक हैरान परेशान हो चले हैं. क्योंकि मौजूदा दौर में बिजली के बिना जिन्दगी की कल्पना ही नहीं की जा सकती. लेकिन इसके बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्बारा विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था को ुचुस्त-दुरूस्त करवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे. ऐसे में शहर में विद्युत आपूर्ति की दुरावस्था के लिए पूरी तरह से स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लापरवाही को जिम्मेदार कहा जा सकता है. इस आशय का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख तथ्रा शहर कांग्रेस के अध्यक्ष व मनपा पार्षद बबलू शेखावत में शहर में विद्युत आपूर्ति को लेकर रहनेवाली समस्याओं के संदर्भ में अपना रोष व संताप व्यक्त किया.
इस संदर्भ में कांग्रेस के दोनों वरिष्ठ नेताओं का कहना रहा कि महावितरण द्बारा अमरावती शहर से प्रतिमाह 35 करोड रूपए के हिसाब से सालाना 420 करोड रूपए के विद्युत बिलों की वसूली की जाती है. लेकिन उसके बावजूद भी महावितरण कंगाल अवस्था में कहा जा सकता है. क्योंकि महावितरण को हर छोटे-मोटे काम के लिए सरकार का मुंह काटना पडता है और खुद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के पास उर्जा मंत्रालय रहने के बावजूद सरकार द्बारा महावितरण को मेंटेनेंस संबंधी कामों के लिए कोई पैसा नहीं दिया जा रहा. जिसके चलते महावितरण द्बारा विद्युत आपूर्ति संयंत्रों सहित विद्युत वितरण करनेवाली व्यवस्था जैसे कि ट्रांसफार्मर, डीपी, विद्युत पोल व विद्युत तारों की देखभाल व दुरूस्ती का काम भी उचित तरीके से नहीं किया जा रहा.

* केवल ट्रांसफॉर्मर लगाने से नहीं बनेगी बात, 6 नये सब स्टेशन बनाना जरूरी
सन 2004 से 2009 तक राज्यमंत्री के तौर पर उर्जा मंत्रालय का जिम्मा संभाल चुके पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख के मुताबिक इस समय अमरावती शहर में 14 विद्युत सब स्टेशन है और सन 2014 से 2019 के दौरान उनके विधायक रहते समय ही आखरी बार शहर में दो नये विद्युत सब स्टेशन बनाए गये थे. जिसके बाद से लेकर अब तक शहर में एक भी नया विद्युत सब स्टेशन नहीं बना हैं. जबकि शहर में इस समय 6 नये विद्युत सब स्टेशन बनाए जाने की सख्त जरूरत है. जिसके लिए सरकार द्बारा पैसा और जगह ही उपलब्ध नहीं कराए जा रहे बल्कि इसके स्थान पर शहर में जगह-जगह करीब 11 करोड रूपए की लागत से ट्रांसफॉर्मर लगाने की बात कहते हुए लोगों बरगलाने का काम किया जा रहा है.

* उपभोक्ता व उपभोग में इजाफा, व्यवस्था जस की तस
पूर्व उर्जा राज्यमंत्री रहे डॉ. सुनील देशमुख ने दैनिक अमरावती मंडल से बातचीत के दौरान बताया कि उनक द्बारा किए गये अध्ययन के मुताबिक पिछले 5-7 वर्षो के दौरान अमरावती शहर में लगभग 50 हजार विद्युत उपभोक्ता बढे है. साथ ही तेजी के साथ आधुनिक हो रही जीवनशैली के चलते लोगों के घरों व प्रतिष्ठानों में विद्युत उपकरणों की संख्या भी बढ रही है. जिसके चलते बिजली की मांग और खपत यानी उपभोग में भी इजाफा हो रहा है. लेकिन इसकी बनिस्बत विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था में अपग्रेडेशन नहींं किया गया. जिसकी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्बारा ध्यान दिए जाने की सख्त जरूरत थी. परंतु स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्बारा कभी भी आम जनता की रोजमर्रा की जिन्दगी के साथ जुडे इस मामले को लेकर कभी कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा.

* निधि की कमी का मुद्दा सदन में क्यों नहीं उठाते
पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि उन्होंने विगत 5-7 वर्षो के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों में से किसी को विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त करने हेतु निधि की मांग के लिए सदन में आवाज उठाते नहीं देखा. बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधि केवल कागजों पर आंकडे लेकर आते हैं तथा प्रेसनोट जारी करते हुए अपनी वाहवाही खबरें छपवाकर जनता को भ्रामक जानकारी देने के साथ ही गुमराह करते हैं.

* अंडरग्राउंड वायरिंग का काम अब तक अधूरा क्यों ?
इसके साथ ही पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने यह भी कहा कि जब वे सरकार में थे तो उन्होंने शहर में भूमिगत वायरिंग के लिए काम करवाया थ. लेकिन आगे चलकर यह काम भी अधर्म में लटक गया. जबकि इसी दौरान नागपुर, मुंबई, पुणे व नाशिक जैसे बडे शहरों में भूमिगत वायरिंग के काम पूरे हो चुके है. जिसके चलते अब उन शहरों में बिजली गुल होने की कोई समस्या नहीं होती. जबकि अमरावतीवासी आज भी बार-बार विद्युत आपूर्ति खंडित होने की समस्या से जूझ रहे है.

* सीएम के पास उर्जा विभाग रहते समय ऐसे हाल
कांग्रेस शहराध्यक्ष व मनपा पार्षद बबलू शेखावत ने कहा कि राज्य का विद्युत विभाग खुद सरकार के मुखिया रहनेवाले मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के पास है. तब महावितरण एवं विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का यह हाल है. जिसे देखते हुए सरकार के अन्य महकमों के कामकाज का अंदाजा व अनुमान लगाया जा सकता है. पार्षद बबलू शेवावत के मुताबिक विद्युत आपूर्ति को लेकर कोई भी समस्या पैदा होने पर महावितरण के स्थानीय अधिकारियों को नागरिकों के रोष व गुस्से के साथ ही गालियों एवं कभी कभार धक्कामुक्की व मारपीट का भी सामना करना पडता ह््ै. जबकि हकीकत में उनकी इसमें कोई गलती या चूक ही नहीं होती. बल्कि इस सिथति के लिए नैतिक रूप से स्थानीय जनप्रतिनिधि जिम्मेदार है. पार्षद बबलू शेखावत के मुताबिक महावितरण द्बारा सरकार के पास भेजा गया मेेंटेनंंस संबंधित हर प्रस्ताव मंत्रालय में धूल खा रहा है और सरकार द्बारा महावितरण को मेंटेनंस के लिए जरूरी निधि नहीं दी जा रही. जिसके चलते महावितरण को दयनीय हालत में भी काम करना पड रहा है. ऐसे में बेहद जरूरी है कि नागरिकों द्बारा महावितरण के अधिकारियों पर अपना गुस्सा निकालने की बजाय स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इस बारे में सवाल जवाब किए जाए.

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