डीबीटी और छात्रवृत्ति की लंबित राशि तत्काल देने की मांग

विद्यार्थियों ने आदिवासी विकास विभाग के अपर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

अमरावती/दि.9 – मेलघाट एवं अमरावती जिले के विद्यार्थियों को डीबीटी और छात्रवृत्ति योजनाओं की लंबित राशि तत्काल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर छात्रों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार और आदिवासी विकास विभाग को ज्ञापन सौंपा है.
याचिकाकर्ताओं में एडवोकेट बी.एस. साने (बंड्या), अविनाश बेलसरे, प्रफुल्ल बेलसरे, संजय पटेल तथा अन्य छात्र-छात्राएं शामिल हैं. उन्होंने बताया कि मेलघाट और अमरावती जिले के अनेक विद्यार्थियों ने पिछले एक वर्ष से डीबीटी एवं छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन किया है, लेकिन आज तक कई पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि जमा नहीं हुई है. छात्रों का आरोप है कि कुछ मामलों में ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन की स्थिति फंड ट्रांसफर प्रोसेस्ड रिस्पॉन्स दिखाई दे रही है, लेकिन वास्तविकता में विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि नहीं पहुंची है. इससे विद्यार्थियों को आर्थिक और शैक्षणिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में विभिन्न महाविद्यालयों की परीक्षाएं चल रही हैं तथा विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री, परीक्षा शुल्क और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए धन की जरूरत है. ऐसे समय में छात्रवृत्ति और डीबीटी की राशि नहीं मिलने से कई विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं. विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित कार्यालयों और बैंकों में बार-बार संपर्क करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है. इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा है.
याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, आदिवासी विकास मंत्री, प्रधान सचिव, आदिवासी विकास विभाग, आयुक्त आदिवासी विकास विभाग नासिक तथा अपर आयुक्त आदिवासी विकास विभाग अमरावती से मांग की है कि अमरावती जिले के सभी पात्र विद्यार्थियों की लंबित डीबीटी एवं छात्रवृत्ति राशि तत्काल उनके खातों में जमा कराई जाए. साथ ही जिन विद्यार्थियों के आवेदन में फंड ट्रांसफर प्रोसेस्ड दिखाया गया है, लेकिन राशि प्राप्त नहीं हुई है, उनके मामलों की विशेष जांच कर शीघ्र समाधान किया जाए. विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आगे व्यापक आंदोलन करने पर मजबूर होंगे.

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