मेरे जीवन का अंतिम उपहार राष्ट्र के नाम
हरीना फाउंडेशन की 16 वर्षों की प्रेरणादायी सेवा यात्रा

अमरावती/दि.10- नेत्रदान, अवयवदान और देहदान के क्षेत्र में पिछले 16 वर्षों से जनजागृति का कार्य कर रही हरिना फाउंडेशन ने हजारों परिवारों तक मानवता और सेवा का संदेश पहुंचाया है. संस्था ने नेत्रहीनों को दृष्टि, गंभीर मरीजों को नया जीवन और चिकित्सा शिक्षा को महत्वपूर्ण योगदान देने का कार्य किया है.
संस्था की स्थापना वर्ष 2010 में साढ़े तीन वर्षीय बालिका करीळपर डेपळ की स्मृति में की गई थी. करंट लगने से हुई उनकी असामयिक मृत्यु के बाद परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लिया, जिससे दो नेत्रहीनों के जीवन में उजाला आया. इसी प्रेरणा से 10 मई 2010 को हरीना नेत्रदान समिति का गठन किया गया और यह अभियान आज एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है. संस्था के अंतर्गत नेत्रदान, अवयवदान और देहदान संबंधी जनजागृति के साथ-साथ नेत्र उपचार एवं प्रत्यारोपण सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं. खापर्डे बगीचा स्थित स्व. मंगलजीभाई पोपट नेत्रालय में नियमित नेत्र जांच, मोतियाबिंद शल्यक्रिया और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
हरीना फाउंडेशन के अनुसार अब तक हजारों नेत्रदान, 22 अवयवदान और 27 देहदान सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं. वहीं स्व. मधुसुदनजी जाजेदिया आय ट्रान्सप्लांट सेंटर के माध्यम से 179 कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं, जिससे 179 लोगों को पुनः दृष्टि प्राप्त हुई है. विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर इस वर्ष संस्था ने मेरे जीवन का अंतिम उपहार राष्ट्र के नाम विषय पर विशेष जनजागृति अभियान आयोजित किया है. इस अवसर पर सभी सहभागी सफेद वस्त्रों में शामिल होंगे तथा हाथों में नेत्र प्रतीक और तिरंगा लेकर नेत्रदान, अवयवदान एवं देहदान का संदेश जन-जन तक पहुंचाएंगे. संस्था ने इसी दिन से निःशुल्क मोतियाबिंद शल्यक्रिया अभियान भी शुरू करने की घोषणा की है.





