अमरावती जिले में विधान परिषद चुनाव के लिए
कांग्रेस का व्हिप हुआ पूरी तरह फ्लॉप, जिलेभर में मची राजनीतिक ‘भागमभाग’

* धारणी से अचलपुर और मोर्शी से अमरावती तक कांग्रेसी पार्षदों ने व्हिप का उल्लंघन कर डाले वोट
* कई स्थानों पर भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे के समर्थन की खुली चर्चा
* विधान परिषद चुनाव ने खोली जिला कांग्रेस की अंदरूनी कलह
* जिले में कांग्रेस नेतृत्व की पकड़ पर उठे गंभीर सवाल, अब चुनावी नतीजे पर निगाहें
अमरावती/ दि. 18 – अमरावती स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में मतदान के दिन जो राजनीतिक तस्वीर सामने आई, उसने जिला कांग्रेस की एकजुटता, संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं. पार्टी द्वारा जारी व्हिप और मतदान से तटस्थ रहने के निर्देशों के बावजूद जिले के अधिकांश नगर निकायों में कांग्रेस के पार्षदों और सदस्य मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर न केवल वोट डाले, बल्कि कई स्थानों पर भाजपा उम्मीदवार प्रवीण पोटे के प्रति खुला समर्थन भी दिखाई दिया.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मतदान के दिन कांग्रेस संगठन में जिस प्रकार की ‘भागमभाग’ देखने को मिली, उसने चुनाव परिणाम आने से पहले ही पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई कांग्रेसी जनप्रतिनिधियों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जबकि कुछ स्थानों पर भाजपा नेताओं और उम्मीदवार के साथ उनकी तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनी रहीं.
* व्हिप जारी हुआ, लेकिन पालन कहीं दिखाई नहीं दिया
कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव से पहले अपने मतदाता सदस्यों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे मतदान प्रक्रिया से दूर रहें और पार्टी की रणनीति का पालन करें. लेकिन मतदान शुरू होते ही यह रणनीति धराशायी होती दिखाई दी. धारणी, अचलपुर, मोर्शी-वरूड, शेंदुरजनाघाट, दर्यापुर, अंजनगांव, भातकुली और अमरावती शहर सहित अधिकांश क्षेत्रों में कांग्रेस से जुड़े सदस्य मतदान केंद्रों पर पहुंच गए. कई स्थानों पर कांग्रेस के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने खुले तौर पर मतदान किया, जिससे यह संदेश गया कि जिला स्तर पर पार्टी नेतृत्व का प्रभाव लगातार कमजोर होता जा रहा है.
* अमरावती मनपा में भी नहीं बची कांग्रेस की साख, 6 कांग्रेसी पार्षदों ने किया मतदान
सबसे बड़ा झटका अमरावती महानगरपालिका क्षेत्र में देखने को मिला. कांग्रेस के मनपा पार्षद धीरज हिवसे, राजश्री जठाले, लुबना तनवीर और अफसर जहां सादिक शाह, प्रशांत महल्ले एवं विक्की वानखडे मतदान केंद्र पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इन पार्षदों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी का व्हिप जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं रहा. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ती रही कि कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग नेतृत्व के निर्णयों से असहमत है और स्थानीय समीकरणों के आधार पर राजनीतिक निर्णय ले रहा है.
* अचलपुर और दर्यापुर में कांग्रेस की सबसे ज्यादा फजीहत
अचलपुर और दर्यापुर क्षेत्रों में कांग्रेस के कई पार्षदों ने मतदान किया. सूत्रों के अनुसार कुछ जनप्रतिनिधियों ने भाजपा उम्मीदवार प्रवीण पोटे के पक्ष में मतदान किया. कई स्थानों पर कांग्रेस के नेताओं और भाजपा खेमे के बीच दिखाई दी नजदीकियों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया. चुनाव के दौरान यह भी चर्चा रही कि कुछ कांग्रेसी पार्षद मतदान से पहले और बाद में भाजपा नेताओं के साथ दिखाई दिए. इससे कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही नाराजगी और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई.
* बबलू देशमुख के नेतृत्व पर उठे सवाल
मतदान के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष बबलू देशमुख के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा तेज हो गई है. अधिकांश निकायों में व्हिप की अवहेलना और कांग्रेसी पार्षदों का खुलकर मतदान करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि जिला संगठन पर नेतृत्व की पकड़ कमजोर हुई है. कई वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों में पार्टी को गंभीर राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
* मतदान से ज्यादा चर्चा कांग्रेस की फूट की
अमरावती विधान परिषद चुनाव का मतदान शांतिपूर्ण रहा, लेकिन पूरे दिन चुनावी चर्चा का केंद्र मतदान प्रतिशत नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर दिखाई दी बगावत और अनुशासनहीनता रही. व्हिप के बावजूद मतदान, भाजपा प्रत्याशी के प्रति खुले समर्थन की चर्चाएं, नेताओं के साथ खिंचवाई गई तस्वीरें और तिवसा को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में पार्टी निर्देशों की अनदेखी ने यह संकेत दे दिया है कि जिले की कांग्रेस इस समय अपने सबसे कठिन संगठनात्मक दौर से गुजर रही है.
अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, लेकिन मतदान के दिन सामने आए घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि अमरावती का यह विधान परिषद चुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि जिले की कांग्रेस के भविष्य, नेतृत्व और संगठनात्मक अस्तित्व की भी बड़ी परीक्षा बन गया है.





