विदर्भ के अधिकारों हेतू गूंजनेवाली बुलंद आवाज हुई शांत
पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व विधायक प्रा. बी. टी. देशमुख

* पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
* हजारों नम आँखों ने दी अंतिम विदाई
* विभिन्न क्षेत्रों से वास्ता रखनेवाले गणमान्य की रही उपस्थिति
* बीती रात तीव्र हृदयाघात के चलते हुआ निधन
* रात से ही अंतिम दर्शन हेतु लगने लगा था लोगों का तांता
* सीएम फडणवीस एवं केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने भी जताया शोक
अमरावती/दि.20 – विदर्भ सिंचाई अनुशेष निर्मूलन महर्षि के रूप में विख्यात पूर्व विधायक प्रा. बी. टी. उर्फ भाउराव तुलसीराम देशमुख का कल शुक्रवार 19 जून की रात 8.30 बजे के आसपास तीव्र हृदयाघात के चलते निधन हो गया. वे 87 वर्ष की आयु के थे. प्रा. बी.टी. देशमुख के निधन का समाचार मिलते ही कल रात से लेकर आज दिन भर सौरभ कॉलनी स्थित देशमुख परिवार के निवासस्थान पर राजनीतिक, सामाजिक व शैक्षणिक क्षेत्र से वास्ता रखनेवाले गणमान्यों का तांता लगना शुरू हो गया था तथा सभी ने बी. टी. देशमुख की पार्थिव के अंतिम दर्शन करते हुए उन्हें श्रध्दांजलि अर्पित की तथा उनके निधन को अमरावती सहित पूरे विदर्भ क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया. जिसके उपरांत प्रा. बी.टी. देशमुख की आज शाम 5 बजे उनके निवासस्थान से अंतिम यात्रा निकाली गई एवं उनके पार्थिव पर हिन्दू मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किए गये. इस समय भी विभिन्न क्षेत्रों से वास्ता रखनेवाले हजारों गणमान्यों की उपस्थिति रही. जिन्होंने नम आंखों के साथ हमेशा ही विदर्भ के अधिकारों हेतु जमकर दहाडनेवाले प्रा. बी. टी. देशमुख को अंतिम बिदाई दी. प्रा. बी.टी. देशमुख अपने पश्चात एक विवाहित बेटी एवं भाई नाना देशमुख सहित भरापूरा परिवार शोकाकुल छोड गये है.
बता दें कि अमरावती स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार 5 बार विधान परिषद के सदस्य रहे प्रा. बी. टी. देशमुख नागपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स असो. यानी नूटा के संस्थापक अध्यक्ष थे. संत गाडगेबाबा अमरावती विद्यापीठ व डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ (अकोला) की स्थापना में प्रा. बी. टी. देशमुख की भूमिका व योगदान को उल्लेखनीय कहा जा सकता है. उन्होेंने सरकार को कई शैक्षणिक सुधार करते हुए मजबूर करते हुए शिक्षकों की कई समस्याओं को हल किया. खास बात यह रही कि विदर्भ में सिंचाई सहित अन्य क्षेत्रों में रहनेवाले अनुशेष का मुद्दा प्रा. बी.टी. देशमुख ने ही अध्ययनपूर्ण तरीके से सबके सामने रखा था. शेष महाराष्ट्र की तुलना में विदर्भ में सभी क्षेत्रों में विकास का अनुशेष कितना तीव्र है. इस बारे में उन्होंने समय-समय पर तथ्यात्मक तरीके से अपनी बात रखी. उस समय तत्कालीन विधान मंडल ने नितिन गडकरी व देवेन्द्र फडणवीस जैसे तत्कालीन भाजपा विधायकों द्बारा प्रा. बी. टी. देशमुख की ओर से रखे जानेवाले मुद्दों को समर्थन दिया गया. परिणामस्वरूप तत्कालीन कांग्रेस सरकार को बी. टी. देशमुख की मांगों पर हमेशा ही विचार करना पडा.
ज्ञात रहे कि अमरावती शहर सहित अन्य सैकडों गांवों की प्यास बुझानेवाले अपरवर्धा बांध की निर्मिति प्रा. बी. टी. देशमुख का महत्वपूर्ण योगदान रहा और पेढी बांध के लिए भी वे बेहद आग्रही रहे. जबकि कोयले पर आधारित रहनेवाले नांदगांव पेठ स्थित रतन इंडिया औष्णिक विद्युत प्रकल्प का उन्होेंने अंत तक विरोध किया. नैतिकता के साथ अंतिम समय तक काम करनेवाले प्रा. बी.टी. देशमुख कई लोगों के लिए आदर्श स्थान थे. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस एवं पद्मश्री प्रभाकरराव वैद्य के साथ उनके बेहद घनिष्ठ संबंध रहे.
विगत कुछ वर्षो से प्रा. बी.टी. देशमुख को हृदय संबंधी कुछ तकलीफे थी और उनकी शल्यक्रिया भी हुई. शुक्रवार की रात 8.30 बजे के आसपास उन्हें तीव्र हृदयाघात हुआ. जिसके बाद उनकी प्राणज्योति अस्त हो गई. इसके साथ ही विदर्भ के अधिकारों हेतु हमेशा ही जमकर गूंजनेवाली आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई. प्रा. बी. टी. देशमुख के निधन की खबर मिलते ही बीती रात उनके सौरभ कॉलनी स्थित निवासस्थान पर उनके चाहनेवालों ेका तांता लगना शुरू हो गया था तथा देखते ही देखते प्रा. बी. टी. देशमुख के निवासस्थान पर हजारों लोगों की भीड इकट्ठा हो गई. जिन्होंने अंतिम दर्शन करते हुए प्रा. बी.टी. देशमुख के प्रति श्रध्दांजलि अर्पित करने के साथ ही उनके निधन को अमरावती सहित समूचे विदर्भ क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया.
* शासकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
बता दे कि सतत 30 वर्षो तक राज्य विधानमंडल का हिस्सा रहे पूर्व विधायक प्रा. बी. टी. देशमुख कुछ समय तक विधान परिषद के सभापति के तौर पर भी कार्यरत रहे और उन्होंने सभापति के रूप में विधान परिषद का कामकाज भी चलाया था. इस बात की ओर ध्यान जाते ही सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने पूर्व विधायक बी. टी. देशमुख के पार्थिव का अंतिम संस्कार पूरे सरकारी सम्मान के साथ करने का निर्देश जारी किया था. इसके चलते आज पूर्व विधायक प्रा. बी. टी. देशमुख के निवासस्थान पर प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की. जिसके उपरांत उनके पार्थिव व तिरंगा ध्वज अर्पित करने के साथ ही मानवंदना दी गई और पूरे सरकारी सम्मान के साथ उनके पार्थिव की अंतिमयात्रा निकालते हुए राज शिष्टाचारों के अनुरूप उनके पार्थिव पर हिन्दू मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किए गये. इस समय जिला एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं एवं पदाधिकारियों सहित सामाजिक व शैक्षणिक क्षेत्रों से वास्ता रखनेवाले सैकडों गणमान्यों की उपस्थिति रही. जिन्होंने सर्वमान्य एवं सर्वसमावेशक नेतृत्व रहनेवाले प्रा. बी. टी. देशमुख को नम आंखों के साथ अंतिम बिदाई दी.

एक पर्व समाप्त हुआ – सीएम फडणवीस
पूर्व विधायक प्रा. बी.टी. देशमुख के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि विदर्भ के अनुशेष निर्मूलन हेतु जीवन भर संघर्ष करनेवाले तथा जनहित के लिए सतत प्रयासरत रहनेवाले अभ्यासु व तत्वनिष्ठ पूर्व विधायक प्रा. बी. टी. देशमुख के निधन काा समाचार बेहद दुखदायी है. अमरावती स्थानक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद ने लगातार 5 बार प्रतिनिधित्व करते हुए प्रा. बी. टी. देशमुख ने इस बात का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया था कि जनप्रतिनिधि कैसा होना चाहिए. विधानमंडल में उनक अभ्यासपूर्ण भाषण, आंकडों के साथ रखे जानेवाले उद्देश्य तथा विदर्भ में सिंचाई, पानी, रास्ते व भौतिक अनुशेष को लेकर सतत किया गया फॉलोअप हमेशा ही मार्गदर्शक साबित हुआ. इसी प्रश्न को पूरी ताकत के साथ विधानमंडल में रखने के साथ ही उसका समाधान होने तक बिल्कुल भी शांत नहीं रहना यह प्रा. बी.टी. देशमुख की शैली भी प्रा. बी.टी. देशमुख से विधानमंडल के कामकाज के तरीके, विषयों के सघन अध्ययन एवं आम जनता के प्रति निष्ठा जैसे गुण सीखने का हम सभी को अवसर भी प्राप्त हुआ.

धीर गंभीर नेतृत्व चला गया – केन्द्रीय मंत्री गडकरी
वरिष्ठ नेता शिक्षातज्ञ एवं पूर्व विधायक प्रा. बी. टी. देशमुख के निधन संबंधी समाचार को बेहद दुखदायी बताते हुए केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विधानमंडल में कई वर्षो तक एक साथ काम करने के चलते उनके प्रा. बी.टी. देशमुख के साथ बेहद नजदीकी व मैत्रीपूर्ण संबंध रहे. विधानमंडल में लंबे समय तक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रा. बी. टी. देशमुख ने बिना अनुदानित शालाओं, शिक्षकों व प्राध्यापकों के अधिकारों हेतु जबर्दस्त संघर्ष किया. शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाने वाले भी गंभीर नेतृत्व के तौर पर उनकी ख्याति रही. साथ ही विदर्भ क्षेत्र के अनुशेष को दूर करने हेतु प्रा. बी.टी. देशमुख द्बारा विधामंडल में किए गये अभ्यासपूर्ण भाषण आज भी सभी विधायकों के लिए प्रेरणादायी है. बेहद अध्ययनशील व संसदीय परंपराओं का पालन करनेवाले प्रा. बी.टी.देशमुख के निधन की वजह से विदर्भ क्षेत्र की अपूरणीय क्षति हुई है.





