डेढ़ साल तक रोजाना 12 घंटे की पढ़ाई, स्मार्टफोन से दूरी, तब मिली कामयाबी
अमरावती की प्रथा अग्रवाल ने एमएचटी-सीईटी में हासिल किए 100 परसेंटाइल

* मनोरंजन, सोशल मीडिया और मोबाइल से परहेज, अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के दम पर रचा इतिहास
अमरावती/ दि. 20 – आज के दौर में जहां अधिकांश छात्र-छात्राओं का बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और डिजिटल मनोरंजन में व्यस्त रहता है, वहीं अमरावती की प्रथा प्रशांत अग्रवाल ने इन सभी आकर्षणों से खुद को दूर रखकर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गया है। महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एमएचटी-सीईटी) 2026 के घोषित परिणामों में प्रथा ने 100 परसेंटाइल प्राप्त कर जिले और परिवार का नाम रोशन किया है.
प्रथा की सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उसने इस उपलब्धि के लिए केवल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया. एक संपन्न व्यावसायिक परिवार से होने के बावजूद उसके पास आज भी अपना निजी स्मार्टफोन नहीं है. पढ़ाई में व्यवधान न आए, इसलिए उसने जानबूझकर मोबाइल से दूरी बनाए रखी. जरूरत पड़ने पर वह दिन में केवल एक-दो बार अपनी मां का मोबाइल इस्तेमाल करती थी.
* मोबाइल, फिल्में और सोशल मीडिया से बनाई दूरी
प्रथा बताती है कि पिछले डेढ़ से दो वर्षों के दौरान उसने न तो कोई फिल्म देखी और न ही मनोरंजन के अन्य साधनों में समय गंवाया. उसका पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई और लक्ष्य पर केंद्रित रहा. सोशल मीडिया से दूरी और समय का सुनियोजित उपयोग उसकी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बना. प्रथा कहती है, मुझे उम्मीद थी कि 99 परसेंटाइल तक अंक मिल सकते हैं, लेकिन जब परिणाम में 100 परसेंटाइल देखा, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. यह मेरे जीवन का सबसे यादगार क्षण है.
* 11वीं में गंभीर नहीं थी, फिर बदला नजरिया
प्रथा के अनुसार 11वीं कक्षा में प्रवेश लेने के बाद शुरुआती कुछ महीनों तक वह पढ़ाई को लेकर बहुत गंभीर नहीं थी. लेकिन जैसे-जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्व समझ में आया, उसने खुद को पूरी तरह पढ़ाई में झोंक दिया. वह बताती है, जब मुझे समझ आया कि यही दो वर्ष मेरे भविष्य की दिशा तय करेंगे, तब मैंने अपना पूरा फोकस पढ़ाई पर लगा दिया. उसी का परिणाम आज सामने है.
* रोज 11 से 12 घंटे की पढ़ाई, 17 घंटे तक पढ़ाई से जुड़ा रहता था दिन
पिछले डेढ़ वर्ष से प्रथा प्रतिदिन 11 से 12 घंटे स्व-अध्ययन करती रही. कोचिंग कक्षाओं और कॉलेज के समय को जोड़ दिया जाए तो उसका दिन लगभग 16 से 17 घंटे तक पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में ही बीतता था. इतने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उसने स्वास्थ्य और पर्याप्त नींद को भी महत्व दिया. उसका मानना है कि निरंतर पढ़ाई के साथ शरीर और मन को स्वस्थ रखना भी सफलता के लिए उतना ही जरूरी है.
बनना चाहती है कंप्यूटर इंजीनियर
एमएचटी-सीईटी में शानदार प्रदर्शन के बाद अब प्रथा का लक्ष्य देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान में प्रवेश लेकर कंप्यूटर इंजीनियर बनना है. उसे विश्वास है कि इस उपलब्धि के आधार पर उसे अपनी पसंद के शीर्ष महाविद्यालय में प्रवेश मिलेगा.
* सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को
प्रथा ने अपनी इस सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया है. उसने विशेष रूप से अपने शिक्षकों सौरभ अग्रवाल और कुशवाह सर सहित अन्य गुरुजनों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कठिन समय में उसका मार्गदर्शन किया.
* विद्यार्थियों को दिया प्रेरक संदेश
अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए प्रथा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण संदेश दिया. उसने कहा, 11वीं और 12वीं जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष होते हैं. यदि विद्यार्थी इन दो वर्षों को अपने पूरे जीवन जितना महत्वपूर्ण मानकर पूरी मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करें, तो सफलता निश्चित है. यही दो साल भविष्य की नींव तैयार करते हैं.
* प्रथा की सफलता से सीख
अमरावती की प्रथा अग्रवाल ने यह साबित कर दिया है कि सफलता के लिए महंगे संसाधनों से अधिक जरूरी है दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर मेहनत. 100 परसेंटाइल का यह गौरवपूर्ण परिणाम आज हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है.





