कचरा डेपो पर ताला ठोक कर महिलाओं ने रोकी घंटागाडी
तारासाहब बगीचा परिसर में 4 घंटे चला हाईवोल्टेज ड्रामा

* दुर्गंध से परेशान महिलाओं का उग्र आंदोलन
* प्रशासन के आश्वासन के बाद फिलहाल स्थगित हुआ धरना
अमरावती/दि.23– स्थानिय राजापेठ जोन के समीप बनाए गए अस्थायी कचरा डेपो से फैल रही दुर्गंध और गंदगी से परेशान स्थानीय महिलाओं का कल सोमवार 22 जुन को आखिरकार सब्र टूट गया. तारासाहेब बगीचा परिसर की महिलाओं ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सुबह करीब 10 बजे कचरा डेपो के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया और कचरा लेकर आने वाली घंटागाड़ियों तथा ट्रकों का रास्ता रोक दिया. अचानक हुए इस आंदोलन से महानगरपालिका प्रशासन में हड़कंप मच गया. करीब चार घंटे तक चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन के आश्वासन पर आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया.
जानकारी के अनुसार, राजापेठ जोन के निकट स्थित एक पुराने कबाड़ गोदाम को महानगरपालिका ने अस्थायी कचरा डेपो के रूप में उपयोग करना शुरू किया है. शहर के विभिन्न हिस्सों से घंटागाड़ियों द्वारा एकत्रित कचरा पहले यहां लाया जाता है और बाद में कॉम्पैक्टर ट्रकों के माध्यम से सुकली स्थित मुख्य डंपिंग यार्ड में पहुंचाया जाता है.
* कई दिनों तक पड़ा रहता है कचरा, फैल रही असहनीय दुर्गंध
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार कचरा दो से तीन दिनों तक इसी परिसर में पड़ा रहता है, जिससे पूरे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध फैल जाती है. पावस ऋतु शुरू होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है. बारिश के कारण कचरा सड़ने लगा है, जिससे संक्रामक बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है. महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से इस अस्थायी डेपो को यहां से हटाने की मांग कर रही हैं, लेकिन प्रशासन ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया. इसी नाराजगी के चलते महिलाओं ने सामूहिक रूप से आंदोलन का निर्णय लिया और डेपो के गेट पर ताला लगाकर कचरा वाहनों की आवाजाही रोक दी.
*चार घंटे तक चला गतिरोध
सुबह 10 बजे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन दोपहर लगभग 2 बजे तक जारी रहा. इस दौरान कचरा वाहनों की लंबी कतार लग गई और शहर की कचरा संकलन व्यवस्था प्रभावित हुई. आंदोलन के कारण पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे. नगरसेवक मिलिंद बांबल, नगरसेविका लवीना हर्षे तथा स्वाती कुलकर्णी ने घटनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारी महिलाओं से चर्चा की. उनके हस्तक्षेप के बाद महानगरपालिका के स्वच्छता अधिकारी डॉ. अजय जाधव भी मौके पर पहुंचे.
* अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर फूटा लोगों का गुस्सा
संतप्त नागरिकों और महिलाओं ने अधिकारियों से जवाब मांगते हुए तीखे सवाल किए. स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी समस्या के स्थायी समाधान नहीं निकाल पाने को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई. आंदोलनकारियों का कहना था कि जब तक डेपो को यहां से हटाया नहीं जाता, तब तक क्षेत्र के नागरिकों को दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे झेलने पड़ेंगे.
* अतिरिक्त आयुक्त के आश्वासन पर शांत हुआ मामला
मामला बढ़ता देख प्रशासनिक स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप किया गया. महानगरपालिका की अतिरिक्त आयुक्त शिल्पा नाइक ने आंदोलनकारी महिलाओं की समस्याएं सुनीं और उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य और सुविधा से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा तथा डेपो संबंधी समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. प्रशासन के सकारात्मक आश्वासन के बाद महिलाओं ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित कर दिया, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में और अधिक तीव्र आंदोलन किया जाएगा.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए किसी रिहायशी क्षेत्र को कचरा डेपो में बदलना उचित नहीं है. अब सभी की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालता है





