टीईटी परीक्षा में हिजाब, दुपट्टा और बुर्का पहनने की अनुमति
अ. भा. उर्दू शिक्षक संघ की मांग पर सरकार ने दी राहत

* परीक्षा परिषद के निर्णय से मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों में खुशी
अमरावती/मुंबई/दि.24- महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2026 में शामिल होने वाली मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है. राज्य सरकार और महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान महिला अभ्यर्थियों को हिजाब, दुपट्टा, ओढ़नी और बुर्का पहनने की अनुमति रहेगी. यह निर्णय अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ द्वारा उठाई गई मांग के बाद लिया गया है.
बता दे कि, उर्दु शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे से मुलाकात कर विभिन्न शैक्षणिक मुद्दों के साथ मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों के पहनावे को लेकर उत्पन्न भ्रम का विषय उठाया था. मंत्री दादा भुसे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के अधिकारियों से चर्चा की, जिसके बाद परिषद ने स्थिति स्पष्ट की.
* पहचान सत्यापन के लिए चेहरा स्पष्ट होना जरूरी
परीक्षा परिषद के अध्यक्ष नंदकुमार बडेले ने बताया कि महिला अभ्यर्थियों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप वस्त्र पहनने की पूरी स्वतंत्रता होगी. हालांकि परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए चेहरा स्पष्ट दिखाई देना आवश्यक रहेगा. माथा, कान और चेहरे का आवश्यक भाग खुला होना चाहिए, जबकि चेहरे को पूरी तरह ढंकने वाले आवरण की अनुमति नहीं होगी.
* 6.25 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा
ज्ञात रहे कि, महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा 28 जून को आयोजित की जाने वाली टीईटी परीक्षा के लिए लगभग 6 लाख 25 हजार अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है. परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी निगरानी सहित सभी निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा. परिषद ने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को आहत करना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करना है.
* स्पष्टीकरण से समाप्त हुआ विवाद
प्रारंभिक दिशा-निर्देशों को लेकर कुछ मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी थी. इसके बाद परीक्षा परिषद और शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि हिजाब, दुपट्टा, ओढ़नी और बुर्का पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है. इस स्पष्टीकरण के बाद हजारों महिला अभ्यर्थियों को राहत मिली है.
* उर्दू शिक्षक संघ ने जताया आभार
अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ के संस्थापक साजिद निसार अहमद ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए शिक्षा मंत्री दादा भुसे का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि सरकार ने संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए महिला अभ्यर्थियों की भावनाओं का भी ध्यान रखा है. संघ के अमरावती जिला अध्यक्ष अकील आफताब ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों की चिंताएं दूर हुई हैं और यह निर्णय समान अवसर तथा समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम है.





