गुटखा कारोबारियों पर मकोका लगाने के आदेश पर हाईकोर्ट का ‘स्पीड ब्रेकर’
तुकाराम मुंढे, एफडीए और राज्य सरकार के नाम जारी की नोटिस

* कहा- कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना नहीं हो सकती कार्रवाई
नागपुर/दि.4- महाराष्ट्र में गुटखा, तंबाकू और अन्य प्रतिबंधित तंबाकूजन्य उत्पादों के अवैध कारोबार के खिलाफ अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी किए गए मकोका लागू करने संबंधी आदेश को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि मकोका कानून के तहत निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है.
ज्ञात रहे कि, एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने जून माह में राज्यभर के अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा था कि गुटखा, निकोटीनयुक्त पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित तंबाकू मिश्रित खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री में शामिल संगठित गिरोहों के खिलाफ पात्र मामलों में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई की जाए. आदेश में यह भी कहा गया था कि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करना संबंधित अधिकारियों की कर्तव्य में लापरवाही माना जाएगा. एफडीए का मानना है कि प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों का अवैध कारोबार केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे उत्पादकों, थोक व्यापारियों, परिवहनकर्ताओं, गोदाम संचालकों, वित्तपोषकों और वितरकों का एक संगठित नेटवर्क कार्यरत है. इसी कारण इस अवैध कारोबार को संगठित अपराध मानते हुए मकोका जैसे कठोर कानून के उपयोग की पहल की गई थी.
इस आदेश के खिलाफ बुलढाणा निवासी मोहम्मद शफी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. याचिका में दावा किया गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत एफडीए आयुक्त को खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने और प्रशासनिक निर्देश जारी करने का अधिकार तो है, लेकिन किसी अन्य दंडात्मक कानून के तहत अपराध दर्ज करने या मकोका लागू करने के निर्देश देने का अधिकार नहीं है.
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने मकोका अधिनियम की धारा 23 का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी मामले में मकोका के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के अधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है. अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे मकोका लागू नहीं किया जा सकता.
अदालत ने राज्य सरकार और एफडीए आयुक्त से इस संबंध में जवाब मांगा है. हालांकि न्यायालय ने फिलहाल मुंढे के आदेश पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि मकोका कानून की सभी वैधानिक शर्तों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए.
गौरतलब है कि एफडीए आयुक्त का पद संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में मिलावटी खाद्य पदार्थों, नकली डेयरी उत्पादों और प्रतिबंधित गुटखा कारोबार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है. विभाग के अनुसार हाल के महीनों में सैकड़ों छापेमार कार्रवाइयों के दौरान करोड़ों रुपये का प्रतिबंधित माल जब्त किया गया है.
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को तुकाराम मुंढे की सख्त कार्रवाई पर न्यायिक ‘स्पीडब्रेकर’ के रूप में देखा जा रहा है. अब इस मामले में राज्य सरकार और एफडीए के जवाब के बाद आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.