मेलघाट के आदिवासियों की सुरक्षा और गरीब मरीजों के अधिकारों पर विधान परिषद में गरजे बच्चू कड़ू
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने, तत्काल मुआवजा देने और निजी अस्पतालों पर सख्त कानून बनाने की मांग

मुंबई/अमरावती/दि.7- शिंदे गुट की शिवसेना के विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कडू ने विधान परिषद में मेलघाट के आदिवासियों की समस्याओं और निजी अस्पतालों की मनमानी का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया. उन्होंने कहा कि मेलघाट क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष आदिवासी समाज के लिए गंभीर संकट बन गया है, वहीं दूसरी ओर सरकारी सुविधाएं लेने वाले कई निजी अस्पताल गरीब मरीजों के लिए आरक्षित खाटों का नियम नहीं मान रहे हैं.
* मेलघाट में बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष
विधायक बच्चू कड़ू ने सदन में कहा कि मेलघाट के जंगलों से सटे गांवों में वन्यजीवों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने, पालतू पशुओं पर हमले करने तथा ग्रामीणों की जान को खतरा पैदा होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इसका सबसे अधिक दुष्परिणाम आदिवासी समुदाय को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर है. उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों का रवैया भी स्थानीय लोगों के प्रति संवेदनशील नहीं है. कई मामलों में नुकसान होने के बावजूद पीड़ितों को समय पर सहायता और मुआवजा नहीं मिल पाता, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है.
* आदिवासियों की आजीविका और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण
पूर्व मंत्री व विधायक कड़ू ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ आदिवासियों के जीवन, उनकी खेती, पशुधन और रोजगार की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने सरकार से मांग की कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए, प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाएं और नुकसानग्रस्त परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
* निजी अस्पतालों पर भी साधा निशाना
विधान परिषद में बच्चू कड़ू ने स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार से विभिन्न प्रकार की रियायतें और सुविधाएं प्राप्त करने वाले निजी अस्पतालों के लिए नियम है कि वे अपनी कुल खाटों में से 15 प्रतिशत खाटें गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए आरक्षित रखें. लेकिन अनेक अस्पताल इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं. उनके अनुसार, नियमों की अनदेखी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त या रियायती उपचार का लाभ नहीं मिल पाता और उन्हें महंगे इलाज के कारण भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है.
* सख्त कानून बनाने की मांग
विधायक बच्चू कड़ू ने सरकार से मांग की कि गरीब मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए निजी अस्पतालों पर निगरानी बढ़ाई जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे अस्पतालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों वाला सख्त कानून बनाया जाना चाहिए ताकि गरीबों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके.
* सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा
पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने कहा कि चाहे मेलघाट के आदिवासियों की सुरक्षा का प्रश्न हो या गरीब मरीजों के उपचार का अधिकार, दोनों ही विषय सीधे आम जनता के जीवन से जुड़े हैं. सरकार को इन मामलों में संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने चाहिए. उन्होंने आशा व्यक्त की कि सदन में उठाए गए इन मुद्दों पर सरकार गंभीरता से विचार कर ठोस कदम उठाएगी.





