15 हजार के लोन के नाम पर करोड़ों की ठगी!

नागपुर साइबर पुलिस ने भोपाल से सॉफ्टवेयर इंजीनियर को दबोचा

* लोन ऐप डाउनलोड करते ही चोरी होता था मोबाइल डेटा
* ब्लैकमेल कर वसूले जाते थे हजारों रुपये; 200 करोड़ के घोटाले की आशंका
नागपुर/दि.8- नागपुर साइबर पुलिस ने देशभर में ऑनलाइन लोन के नाम पर लोगों को जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए भोपाल से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी द्वारा विकसित किए गए कथित लोन ऐप के जरिए देशभर के करीब पांच लाख लोगों को निशाना बनाया गया और लगभग 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी किए जाने की आशंका है. साइबर पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन जारी कर लोगों को मात्र कुछ मिनटों में 15 हजार रुपये तक का तत्काल ऑनलाइन लोन देने का लालच देता था. आर्थिक जरूरतों से जूझ रहे लोग विज्ञापन पर भरोसा कर संबंधित मोबाइल ऐप डाउनलोड कर लेते थे. इसके बाद शुरू होता था ठगी और ब्लैकमेलिंग का खेल.
जांच में सामने आया है कि ऐप इंस्टॉल होते ही वह उपयोगकर्ता के मोबाइल फोन की विभिन्न अनुमतियां प्राप्त कर लेता था. इसके माध्यम से संपर्क सूची, फोटो, दस्तावेज और अन्य व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच हासिल की जाती थी. बाद में इसी संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल लोगों को धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए किया जाता था.
* 15 हजार का लोन, वसूली 50 हजार तक
पुलिस के मुताबिक, ऐप के माध्यम से लोगों को 15 हजार रुपये तक का लोन दिया जाता था, लेकिन बाद में उनसे 25 हजार से 50 हजार रुपये तक की राशि वसूलने का दबाव बनाया जाता था. यदि कोई व्यक्ति भुगतान करने से इनकार करता या देरी करता, तो उसकी निजी जानकारी और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी जाती थी. कई मामलों में लोगों को लगातार फोन कर मानसिक दबाव भी बनाया गया.
* नागपुर की शिकायत से खुला राज
इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ जब नागपुर के दो नागरिकों ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में बताया गया कि लोन ऐप के माध्यम से उनसे अनुचित तरीके से पैसे मांगे जा रहे हैं और निजी जानकारी सार्वजनिक करने की धमकी दी जा रही है. शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की.
* भोपाल से पकड़ा गया सॉफ्टवेयर इंजीनियर
तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को इस गिरोह के तार मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े मिले. इसके बाद विशेष टीम भोपाल पहुंची और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया. पुलिस को संदेह है कि इसी व्यक्ति ने कथित रूप से लोन ऐप तैयार किया था और इसके तकनीकी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आरोपी को आगे की पूछताछ और जांच के लिए नागपुर लाया गया है.
* आठ महीने से सक्रिय था गिरोह
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले लगभग आठ महीनों से सक्रिय था. जांचकर्ताओं का अनुमान है कि देशभर में करीब पांच लाख लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया था. बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए पुलिस मामले की व्यापक जांच कर रही है.
* पहचान छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल
साइबर अधिकारियों के अनुसार गिरोह अपनी वास्तविक पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए वीपीएन सेवा का उपयोग करता था. इससे जांच एजेंसियों के लिए उनकी गतिविधियों का पता लगाना कठिन हो जाता था. हालांकि डिजिटल ट्रेल और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही.
* 200 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान
साइबर पुलिस का मानना है कि इस संगठित ऑनलाइन धोखाधड़ी से देशभर में लगभग 200 करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान हुआ हो सकता है. हालांकि वास्तविक आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों, सर्वरों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है.
* लोगों से सतर्क रहने की अपील
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लोन ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी वैधता की जांच करें. मोबाइल ऐप को अनावश्यक अनुमति देने से बचें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं. मामले की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि आगे की कार्रवाई में इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं.

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