महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था चरमराई
विधान परिषद में अंबादास दानवे का सरकार पर हमला

* कहा- भ्रष्टाचार और अपराध को मिल रहा संरक्षण
मुंबई/दि.9- महाराष्ट्र विधान परिषद के मानसून सत्र में विपक्ष के अंतिम सप्ताह प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विपक्ष नेता अंबादास दानवे ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्वराज संस्थाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार की घटनाएं चिंताजनक स्तर तक बढ़ गई हैं.
दानवे ने सदन में कहा कि महाराष्ट्र में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है. उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष राज्य में हजारों महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामले सामने आए हैं, जो केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है. महिलाओं के विरुद्ध अपराध, बाल यौन शोषण, अपहरण, मानव तस्करी तथा हिरासत में होने वाली अस्वाभाविक मौतों के मामलों पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है. विभिन्न जिलों में सामने आए कथित मारपीट, धमकी और महिला उत्पीड़न के मामलों का उल्लेख करते हुए दानवे ने निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कुछ शिकायत पत्रों और आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
विपक्षी नेता ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने विभिन्न जिलों में सामने आए विवादित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई घटनाओं ने पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि जनता का कानून-व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है.
दानवे ने राज्य के विभिन्न नगर निकायों, विकास प्राधिकरणों तथा स्थानीय स्वराज संस्थाओं में कथित आर्थिक अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि अभिलेख, निविदा प्रक्रियाओं, जलापूर्ति योजनाओं, कचरा प्रबंधन और अन्य विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही हैं. बीड जिले में रेत वितरण से जुड़े कथित मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार के आरोप, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण आम जनता का शासन-प्रशासन पर विश्वास प्रभावित हो रहा है. दानवे ने सरकार से सभी गंभीर मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की.
विधान परिषद में दानवे के आरोपों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली. अब इन मुद्दों पर सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब और आगे की कार्रवाई पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं.





