कैंसर मरीजों के उपचार में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा में गूंजा

विधायक सुलभा खोडके ने पुरजोर तरीके से उठाया मुद्दा

* स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने दिया सकारात्मक जवाब
मुंबई /दि. 9– महाराष्ट्र विधानसभा में कैंसर मरीजों के उपचार से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए अमरावती की विधायक सुलभा संजय खोडके ने कहा कि राज्य में कैंसर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उपचार व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय कथित रूप से सुपरस्पेशलिटी डिग्री की अनिवार्यता के कारण अनेक अनुभवी कैंसर विशेषज्ञों के सामने मरीजों का इलाज करने में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं.
विधानसभा के दौरान विधायक सुलभा खोडके ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त सुपरस्पेशलिटी डिग्री अनिवार्य किए जाने की चर्चा के कारण राज्य के सैकड़ों कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टरों के पात्रता से बाहर होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. इससे कैंसर निदान, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, शल्य चिकित्सा, अनुसंधान तथा प्रशिक्षण जैसी सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने सरकार से पूछा कि कैंसर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए क्या उपाय किए गए हैं तथा यदि किसी स्तर पर विलंब हो रहा है तो उसके कारण क्या हैं.
इस पर जवाब देते हुए राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से ऐसा कोई निर्देश या कार्यालयीन ज्ञापन प्राप्त नहीं हुआ है, जिसमें आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना अथवा महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना के तहत कैंसर उपचार के लिए केवल डीएम या एमसीएच सुपरस्पेशलिटी डिग्रीधारी डॉक्टरों को ही अधिकृत करने की अनिवार्यता हो. मंत्री आबिटकर ने बताया कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के अभिलेखों में वर्तमान में 573 कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर पंजीकृत हैं. सरकारी कैंसर अस्पतालों में मरीजों के प्रस्ताव केवल सुपरस्पेशलिटी डिग्रीधारी डॉक्टरों से ही प्रमाणित कराने की कोई बाध्यता नहीं है. लंबे अनुभव वाले चिकित्सकों को भी इन योजनाओं के अंतर्गत उपचार प्रदान करने की मान्यता प्राप्त है. उन्होंने आगे बताया कि कैंसर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा राज्यव्यापी त्रिस्तरीय कैंसर सेवा नीति लागू की जा रही है. इसके तहत राज्य के 18 अस्पतालों में चरणबद्ध तरीके से कैंसर जांच, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, शल्य चिकित्सा, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा सुपरस्पेशलिटी उपचार सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा.
स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर के इस स्पष्टीकरण के बाद विधानसभा में यह स्पष्ट हुआ कि अनुभवी कैंसर विशेषज्ञों को उपचार से वंचित करने वाली कोई नई अनिवार्य शर्त फिलहाल लागू नहीं की गई है तथा राज्य सरकार कैंसर उपचार व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है

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