उमेश सेवक का निधन

कट्टर शिवसैनिक के तौर पर रही पहचान

सेवानिवृत्त शिक्षक व पत्रकार थे उमेश सेवक
अमरावती/दि.9- शाकद्विपीय ब्राम्हण समाज एवं सेवक समाज के वरिष्ठ व सम्मानित व्यक्तित्व तथा कट्टर शिवसैनिक रहनेवाले सेवानिवृत्त शिक्षक व पत्रकार उमेश श्रीकिसन सेवक (62) का निधन हो गया. इसके साथ ही अमरावती ने आज अपने एक समर्पित शिवसैनिक, समाजसेवी और निर्भीक व्यक्तित्व को खो दिया.
जानकारी के मुताबिक विगत शनिवार को उमेश सेवक हमेशा की तरह दर्शन-पूजन हेतु शनि मंदिर गए हुए थे. जहां पर पांव फिसल जाने की वजह से वे निचे गिर पडे थे और उनके पांव में जबरदस्त चोट आई थी. जिसके चलते उन्हें इलाज हेतु अस्पताल में भर्ती कराते हुए उनके पैर का ऑपरेशन किया गया था और टूटी हुई हड्डी को जोडने हेतु पांव में रॉड डाली गई थी. जिसके बाद उनके स्वास्थ्य में थोडा सुधार भी हो रहा था. लेकिन कल से उनकी तबियत अचानक ही बिगडनी शुरू हो गई और आज सुबह इलाज के दौरान उमेश सेवक ने अपनी अंतिम सांस ली. वे अपने पश्चात अपनी 104 वर्षीय माताजी श्रीमती गंगा श्रीकिसन सेवक सहित पत्नी ममता सेवक, विवाहित पुत्री निकिता सेवक-शुक्ला व भाई निरज सेवक तथा भरापुरा शोकाकुल परिवार छोड गए है.
शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के प्रबल समर्थक तथा शहर में शिवसेना के संगठनात्मक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उमेश श्रीकिसन सेवक को अमरावती के कट्टर शिवसैनिकों में गिना जाता था. वे शिवसेना के प्रारंभिक दौर से ही संगठन से जुड़े रहे और अंतिम समय तक पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित रहे. अमरावती में शिवसेना की स्थापना और उसे मजबूत आधार देने में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं अनंत गुढे, दत्तात्रय पुसदकर, चंद्रकांत वडनेरे तथा अनिल वडनेरे के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. संगठन के विस्तार, जनआंदोलनों और सामाजिक अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही. अपने स्पष्ट विचारों, बेबाक शैली और सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले व्यक्तित्व के कारण वे कार्यकर्ताओं और नागरिकों के बीच विशेष सम्मान प्राप्त करते थे. शिवसेना की विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा और संगठन के प्रति समर्पण उन्हें अन्य कार्यकर्ताओं से अलग पहचान दिलाता था. वे अनेक सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर मुखर रहते थे तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते थे.
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के साथ-साथ उमेश सेवक ने पत्रकारिता जगत में भी उल्लेखनीय योगदान दिया. उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार जुगलकिशोर अग्रवाल, शिवराज मुणोत, मनोहर परिमल और उल्लास मराठे के साथ विभिन्न साप्ताहिक प्रकाशनों में लेखन और संपादन का कार्य किया. उनकी लेखनी समाज के ज्वलंत मुद्दों को सामने लाने और जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देने के लिए जानी जाती थी. पत्रकारिता के माध्यम से भी उन्होंने समाज जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उमेश सेवक अपने मिलनसार स्वभाव, सरल व्यक्तित्व, सामाजिक सरोकारों और सहयोगी वृत्ति के कारण सभी वर्गों में लोकप्रिय थे. उन्होंने जीवनभर समाजसेवा, मानवीय मूल्यों और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. उनके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति उनके व्यवहार और आत्मीयता से प्रभावित होता था. उनके निधन से परिवार, मित्रों, शिवसेना कार्यकर्ताओं, सेवक समाज तथा शहर के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र को गहरा आघात पहुंचा है. अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके जाने से अमरावती ने एक समर्पित समाजसेवी, निष्ठावान शिवसैनिक और जागरूक नागरिक को खो दिया है.

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