तीन साल बाद देशभर में एकसाथ होंगे चुनाव!

‘एक देश-एक चुनाव’ का प्रारूप तैयार होने की संभावना

नई दिल्ली/दि.11 – आगामी लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में ‘एक देश-एक चुनाव’ यानि ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के सुत्र को लागू किए जाने की पूरी संभावना है. इस विषय पर देशभर की विभिन्न राज्य सरकारों सहित संविधान विशेषज्ञों, सामाजिक संस्थाओं, बुध्दिजिवियों तथा अन्य गणमान्यों से संवाद साधकर उनके विचार जान रही संसद की संसदीय समिती द्वारा संकेत दिए गए है.
संसदीय संयुक्त समिती के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी ने गतरोज पणजी में बताया कि, अगले तीन वर्ष बाद यानि सन 2029 में होनेवाले लोकसभा चुनाव के समय ‘एक देश-एक चुनाव’ के सुत्र को पूरी तरह से अमल में लाने की दृष्टी से प्रारूप तैयार करने के पूरे प्रयास किए जा रहे. इसी विषय पर गोवा के मुख्यमंत्री तथा उनके कैबिनेट सहयोगियों के साथ चर्चा करने हेतु वे अपनी अध्यक्षतावाली समिती के अन्य सदस्यों के साथ पणजी आए हुए है. इसके साथ ही चौधरी ने बताया कि, उन्होंने अब तक महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली की राज्य सरकारों सहित संविधान विशेषज्ञों व गणमान्यों से संवाद साधा है. उन्होंने अब तक जितने लोगों से इस विषय पर चर्चा की है, उनमें से 99 फीसद लोगों ने ‘एक देश-एक चुनाव’ की संकल्पना का समर्थन किया है. ऐसे में अब सभी राजनीतिक दलों एवं राज्य सरकारों ने ‘एक देश-एक चुनाव’ के सुत्र को स्विकार करते हुए उस पर अपनी सहमती दर्शानी चाहिए. इसके लिए तमाम जरूरी प्रयास किए जा रहे है.
‘एक देश-एक चुनाव’ की प्रक्रिया कब से शुरू होगी, यह पुछे जाने पर चौधरी ने बताया कि सन 2029 से इस सूत्र पर अमल किया जा सके, इस पध्दती से हम काम कर रहे है. समिती ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास इससे पहले प्रस्तुत की गई प्राथमिक रिपोर्ट की जानकारी देते हुए बताया कि, ‘एक देश-एक चुनाव’ के सूत्र की वजह से निश्चित तौर पर क्या फायदे हो सकते है इसे उस रिपोर्ट में विस्तार के साथ बताया गया है.                                                                                                                                             * एक ही समय पर पूरे देश में चुनाव करवाने पर देश के 7 लाख करोड रूपयों की बचत हो सकती है. थोडे-थोडे समय के अंतरार पर अलग-अलग चुनाव कराए जाने पर उसका परिणाम शैक्षणिक कामों पर पडता है. क्योंकि अधिकांश शिक्षकों को चुनाव संबंधी कामों में लगाया जाता है. जिससे विद्यार्थियों की पढाई-लिखाई का नुकसान होता है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूरदृष्टी रखते हुए ‘एक देश-एक चुनाव’ की संकल्पना को देश के सामने रखा. जिसे आगामी तीन वर्ष के भीतर अमल में भी लाया जाएगा.
– पी. पी. चौधरी
संयुक्त संसदीय समिती अध्यक्ष

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