वैनगंगा-नलगंगा प्रकल्प में वनजमीन की बडी दिक्कत दूर
1023.45 हेक्टेयर वनजमीन होगी हस्तांतरीत

* पर्यावरण मंत्रालय ने दी मंजूरी
अमरावती/दि.17 – विदर्भ का कायापलट करने की क्षमता रहनेवाले महत्वाकांक्षी वैनगंगा-नलगंगा नदीजोड प्रकल्प में नहर सहित संग्रहन बांध व तालाब हेतु आवश्यक रहनेवाली व 1023.45 हेक्टेयर जमीन हस्तांतरीत करने का निर्णय केंद्रीय वन, पर्यावरण व मौसम में बदलाव मंत्रालय द्वारा गतरोज लिया गया. जिसके चलते इस प्रकल्प मार्ग में रहनेवाली सबसे बडी दिक्कत व बाधा अब दूर हो गई है.
विशेष उल्लेखनिय है कि, केंद्रीय जल आयोग तथा वन व पर्यावरण मंत्रालय से मान्यता मिलने हेतु कम से कम एक साल का समय लगेगा. ऐसा अनुमान था. परंतु विदर्भ क्षेत्र से वास्ता रखनेवाले मुख्यमंंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किए गए सतत प्रयासों के चलते महज साढे तीन माह के भीतर वनजमीन से संबंधित दिक्कत दूर हो गई है.
ज्ञात रहे कि, पहले यह प्रकल्प पूरा करने हेतु 10 वर्ष की समयावधि निर्धारित की गई थी. लेकिन विधानमंडल के बजट सत्र दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की थी कि, यह प्रकल्प 6 माह की कालावधी के भीतर पूरा किया जाएगा. चुंकि अब वनजमीन की दिक्कते दूर हो गई है. जिसके चलते इस प्रकल्प का काम तय समय के भीतर पूरा होने की पूरी उम्मीद है.
जानकारी के मुताबिक, वैनगंगा नदी पर स्थित गोसेखुर्द बांध से बारिश के 70 दिनों दौरान 63.73 टीएमसी पानी लिया जाएगा. जिसे 28 नए बांध बनाने के साथ ही मौजुदा 18 बांधों में से 10 बांधों की ऊंचाई बढाकर संग्रहित किया जाएगा. साथ ही इस पानी को 388 किमी की लंबाई वाली नहरों के जरीए नलगंगा बांध तक पहुंचाया जाएगा. इस प्रकल्प में पहले दो लिंक के काम उमरेड-कर्हांडला अभयारण्य के पर्यावरण संवेदनशिल क्षेत्र यानी ईएसजेड से 10 किमी दायरे के भीतर है.
मंंत्रालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, 53 हजार 96 करोड रूपयों के बजट वाले वैनगंगा-नलगंगा नदीजोड प्रकल्प के लिए कुल 14467.97 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण आवश्यक है. जिसमें 1023.45 हेक्टेयर वनजमीन का भी समावेश है. इस प्रकल्प के दो कनेक्शन लिंक-0 व लिंक-1 पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशिल क्षेत्र के पास रहने के चलते विशेषज्ञ मुल्यांकन समिती (ईएसई) द्वारा पर्यावरणीय परिणामों की सघन जांच पडताल की गई. इस समिती ने इस प्रकल्प को ‘बी-1’ क्षेणी देते हुए मध्यम स्वरूप वाला पर्यावरणीय परिणाम होने की संभावना भी जताई है.
* भीमाशंकर अभयारण्य के प्रकल्प का भी रास्ता खुला
वैनगंगा-नलगंगा नदीजोड प्रकल्प के साथ ही मंत्रालय ने पुणे जिले के भीमाशंकर अभयारण्य में पिंपलसाडा-सावले उदचंदन (पंप्ड स्टोरेज) प्रकल्प के लिए 249.23 हेक्टेयर जमीन के हस्तांतरण को मंजुरी दी. यह प्रकल्प अभयारण्य के ईएसजेड तथा प्रस्तावित पश्चिम घाट पर्यावरण संवेदनशिल क्षेत्र में आता है. 2100 मेगावॉट विद्युत निर्मिती की क्षमतावाले इस प्रकल्प की किमत 10217.36 करोड रूपये है. जिसके लिए 99.36 हेक्टेयर वनजमीन तथा 149.87 हेक्टेयर गैरवनजमीन आवश्यक है.





