महावितरण के अध्यक्ष लोकेश चंद्र का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
ऊर्जा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हुए सम्मानित

अमरावती/दि.23- नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्षेत्र में उल्लेखनीय नेतृत्व के लिए महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र का राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान किया गया. यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली में आयोजित टाइम्स नेटवर्क सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव 2026 में प्रदान किया गया.
‘भारत 2035 : एक आत्मनिर्भर राष्ट्र’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश के ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सम्मेलन में वर्ष 2035 तक भारत को हरित ऊर्जा और शाश्वत विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई. इस अवसर पर महाराष्ट्र ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला का विशेष साक्षात्कार भी आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने राज्य की ऊर्जा नीति, हरित ऊर्जा परिवर्तन और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी.
* मुख्यमंत्री फडणवीस के मार्गदर्शन में हरित ऊर्जा को बढ़ावा
सम्मेलन में बताया गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर करने के लिए अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं और परियोजनाएं लागू की जा रही हैं. राज्य में सस्ती, विश्वसनीय और पर्यावरण अनुकूल बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधारों को गति दी जा रही है. ऊर्जा विभाग द्वारा तैयार किए गए रिसोर्स एडेक्वेसी प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन में लोकेश चंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इसी योगदान को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया.
* वर्ष 2030 तक 45 हजार मेगावाट क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता में 45 हजार मेगावाट की वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसमें से लगभग 38 हजार मेगावाट बिजली हरित ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने की योजना है. इसके माध्यम से राज्य की कुल ऊर्जा खपत में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है. महावितरण ने भी अपने दीर्घकालिक विद्युत खरीद समझौतों में हरित ऊर्जा को प्राथमिकता देते हुए अब तक किए गए कुल अनुबंधों में लगभग 65 प्रतिशत हरित ऊर्जा को शामिल किया है.
* सौर कृषि वाहिनी योजना से किसानों को दिन में बिजली
राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के माध्यम से किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लिए 16 हजार मेगावाट क्षमता के विकेंद्रित सौर ऊर्जा प्रकल्प विकसित किए जा रहे हैं. वर्तमान में 5,500 मेगावाट से अधिक क्षमता के प्रकल्प कार्यान्वित हो चुके हैं, जिनके माध्यम से राज्य के 15 लाख से अधिक किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति की जा रही है.
* 10 लाख से अधिक सौर कृषि पंप स्थापित
‘मागेल त्याला सौर कृषीपंप योजना’ के तहत राज्य में 10 लाख से अधिक ऑफ-ग्रिड सौर कृषि पंप स्थापित किए जा चुके हैं. इससे किसानों की सिंचाई लागत में कमी आई है और उन्हें पारंपरिक बिजली आपूर्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा.
* लाखों परिवारों का बिजली बिल हुआ लगभग शून्य
छतों पर स्थापित सौर ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के 9 लाख से अधिक परिवारों को बड़ा लाभ मिला है. इन परिवारों का मासिक बिजली बिल या तो शून्य हो गया है अथवा अत्यंत कम रह गया है. इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ उपभोक्ताओं का आर्थिक बोझ भी कम हुआ है. ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार, हरित ऊर्जा विस्तार और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने के लिए किए गए कार्यों के कारण महावितरण और उसके अध्यक्ष लोकेश चंद्र को मिला यह सम्मान महाराष्ट्र के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.





