नो एंट्री का योग्य समाधान नहीं निकला तो ‘अमरावती बंद’
त्योहारों में नो एंट्री से शहर का व्यापार जमकर प्रभावित

* व्यापारियों ने प्रशासन से की व्यावहारिक व्यवस्था की मांग
* माल आपूर्ति के लिए विशेष समय और पास प्रणाली लागू करने का सुझाव
अमरावती/दि.9– त्योहारों के दौरान शहर में लागू नो-एंट्री व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने प्रशासन के समक्ष नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे व्यापार और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला निर्णय बताया है. व्यापारिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर ‘अमरावती बंद’ का आह्वान भी किया जा सकता है.
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समन्वयक तथा महाराष्ट्र कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन (एमसीपीडीएफ) के संगठन मंत्री श्याम शर्मा ने जारी प्रेस बयान में कहा कि त्योहारों का समय व्यापारियों के लिए पूरे वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारिक सीजन होता है. ऐसे समय में नो-एंट्री लागू रहने से माल की आपूर्ति बाधित हो रही है, ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि कोरोना काल जैसी विषम परिस्थितियों में भी व्यापारियों ने प्रशासन का पूरा सहयोग किया था और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखी थी. इसलिए प्रशासन को भी व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए.
* प्रशासन को सुझाए चार समाधान
व्यापारिक संगठनों ने नो-एंट्री व्यवस्था समाप्त करने की बजाय उसके व्यावहारिक समाधान का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत त्योहारों के दौरान मालवाहक वाहनों के लिए सुबह के समय सीमित अवधि की अनुमति, खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों के लिए विशेष समय-खिड़की, व्यापारी संगठनों के साथ संयुक्त बैठक कर रूट एवं समय निर्धारण तथा आपात एवं आवश्यक आपूर्ति के लिए सरल पास प्रणाली लागू करने की मांग की गई है.
* जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग
कैट के राष्ट्रीय समन्वयक तथा एमसीपीडीएफ के संगठन मंत्री श्याम शर्मा ने जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त से व्यापारियों को विश्वास में लेकर निर्णय लेने तथा ऐसी व्यवस्था बनाने की अपील की है, जिससे यातायात भी सुचारु रहे और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों. उन्होंने कहा कि व्यापार, रोजगार और बाजार व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए त्योहारों के दौरान जनता और व्यापारियों दोनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.
व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालना है. हालांकि मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई है. व्यापार बचाओ, रोजगार बचाओ, अमरावती बचाओ के नारे के साथ व्यापारियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.





