श्री हव्याप्रमं इंजीनिअरिंग कॉलेज को स्वायत्ता का दर्जा

यूजीसी ने दी आधिकारिक स्वीकृति

* शिक्षा जगत के लिए एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि
अमरावती/दि.24- श्री हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल द्वारा संचालित एच.वी.पी. कॉलेज ऑफ इंजीनिअरिंग एंड टेक्नॉलॉजी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा स्वायत्त महाविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया है. शिक्षा जगत के लिए यह एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि है. इस सफलता में संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन, सहयोग और सकारात्मक भूमिका का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
श्री हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल अभियांत्रिकी महाविद्यालय की ओर से स्वायत्त दर्जे के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव को संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय की ओर से अनुशंसित किए जाने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने महाविद्यालय को 10 वर्षों की अवधि के लिए स्वायत्त दर्जा प्रदान करने की मंजूरी दी है. इस संबंध में यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालय को अधिकारिक पत्र भी भेजा गया है.
स्वायत्त दर्जा मिलने के बाद महाविद्यालय को पाठ्यक्रम निर्माण, मूल्यांकन प्रणाली, उद्योगोन्मुख शिक्षा, अनुसंधान कौशल विकास तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरुप नए शैक्षणिक कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की स्वतंत्रता प्राप्त होगी. इससे विद्यार्थियों को विश्वस्तरिय शिक्षा, आधुनिक पाठ्यक्रम तथा रोजगारोन्मुख अवसर उपलब्ध होंगे.
इस उपलब्धि पर श्री हव्याप्र मंडल के प्रधान सचिव पद्मश्री प्रभाकरराव वैद्य, कार्याध्यक्ष एड. प्रशांत देशपांडे, उपाध्यक्ष डॉ. श्रीकांत चेंडके, सचिव प्रा. डॉ. माधुरी चेंडके, कोषाध्यक्ष प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास देशपांडे, सचिव प्रा. विकास कोलेश्वर, सचिव प्रा. रवींद्र खांडेकर तथा प्रा. दीपा कान्हेगांवकर ने संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. एस. दालू, सभी प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को बधाई दी. इस उपलब्धि से मंडल, पूर्व विद्यार्थियों, वर्तमान विद्यार्थियों तथा पूरे शैक्षणिक परिवार में हर्ष का वातावरण है.

* अमरावती के शिक्षा जगत के लिए गर्व का क्षण
श्री हव्याप्र मंडल अभियांत्रिकी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. एस. दालू ने कहा कि, यूजीसी से प्राप्त स्वायत्त दर्जा केवल महाविद्यालय के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे अमरावती के शिक्षा जगत के लिए गर्व का विषय है. इस सफलता के पीछे पद्मश्री प्रभाकरराव वैद्य, सचिव डॉ. माधुरी चेंडके तथा प्रबंध समिति का दूरदर्शी नेतृत्व, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का सतत परिश्रम, विद्यार्थियों की उत्कृष्ट गुणवत्ता तथा संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय का निरंतर सहयोग महत्वपूर्ण रहा है. उन्होंने कहा कि, स्वायत्त दर्जे से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरुप उद्योगोन्मुख, अनुसंधान आधारित तथा कौशल-केंद्रीत पाठ्यक्रम विकसित किए जा सकेंगे. इससे विद्यार्थियों को विश्वस्तरिय शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा महाविद्यालय देश के अग्रणी स्वायत्त इंजीनिअरिंग संस्थानों में अपनी पहचान स्थापित करेगा.

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