यवतमाल के ‘बुढी का चिवड़ा’ का पूरी दुनिया में गूंजेगा नाम
विश्व विख्यात शेफ विष्णु मनोहर 3,500 क्विंटल चिवड़ा तैयार कर बनाएंगे विश्व रिकॉर्ड

* 27 अक्टूबर को दाते कॉलेज के मैदान पर एसएल फाऊंडेशन के सहयोग से होगा विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास
यवतमाल/दि.27- विदर्भ की समृद्ध खाद्य परंपरा और यवतमाल की पहचान बन चुके प्रसिद्ध ‘बुढी का चिवड़ा’ को अब वैश्विक मंच पर पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है. करीब 90 वर्षों से अपनी अनूठी स्वादिष्टता के लिए प्रसिद्ध इस पारंपरिक व्यंजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से एक भव्य विश्व रिकॉर्ड अभियान आयोजित किया जा रहा है. इस महाउपक्रम का नेतृत्व देश के प्रसिद्ध सेलिब्रिटी शेफ विष्णु मनोहर तथा कोल्हापुर की प्राजक्ता पाई शहापूरकर कर रही हैं.
आयोजकों के अनुसार आगामी 27 अक्टूबर को यवतमाल के दाते कॉलेज मैदान में एक साथ 3,500 क्विंटल (3 लाख 50 हजार किलोग्राम) बुढी का चिवड़ा तैयार कर उसका निःशुल्क वितरण किया जाएगा. यह आयोजन केवल खाद्य महोत्सव नहीं, बल्कि यवतमाल की सांस्कृतिक और खाद्य विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने का प्रयास माना जा रहा है.
* 90 वर्षों की परंपरा, आज भी कायम वही स्वाद
यवतमाल का नाम लेते ही लोगों के मन में सबसे पहले जिस खाद्य पदार्थ की छवि उभरती है, वह है ‘बुढी का चिवड़ा’. इसकी शुरुआत वर्ष 1936 में अंजनाबाई रामचंद्र भुजाडे ने की थी. उन्होंने शहर के आजाद मैदान क्षेत्र में चिवड़ा बेचना शुरू किया था. उस समय एक पुड़िया मात्र एक आने में मिलती थी. धीरे-धीरे यह चिवड़ा इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग इसे प्रेम से ‘बुढी का चिवड़ा’ कहने लगे. अंजनाबाई के बाद उनके परिवार की अगली पीढ़ियों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया. वर्तमान में चौथी पीढ़ी के अजय अशोक भुजाडे इस व्यवसाय को संभाल रहे हैं और दावा करते हैं कि आज भी चिवड़े का स्वाद वही है, जो उनकी परदादी के समय हुआ करता था. कुरकुरे पोहे, विशेष मसाले, दाल और पारंपरिक विधि से तैयार यह चिवड़ा न केवल यवतमाल बल्कि पूरे महाराष्ट्र में अपनी अलग पहचान रखता है. आज भी इसकी एक पुड़िया लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है.
* विश्व रिकॉर्ड के लिए विशेष तैयारी
इस महाविक्रम के लिए विशाल स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. आयोजन स्थल पर लगभग 10 हजार लीटर क्षमता वाली विशेष कढ़ाई लगाई जाएगी. 15 बाय 15 फीट आकार और साढ़े छह फीट गहराई वाली इस कढ़ाई का वजन करीब तीन टन होगा. आयोजकों के अनुसार 27 अक्टूबर की रात 3 बजे से चिवड़ा बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी. सुबह लगभग 6 बजे तक चिवड़ा तैयार कर लिया जाएगा, जिसके बाद हजारों लोगों को इसका निःशुल्क वितरण किया जाएगा.
* विष्णु मनोहर का 35वां विश्व रिकॉर्ड
प्रसिद्ध शेफ विष्णु मनोहर इससे पहले भी कई बड़े खाद्य विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं. उन्होंने जळगांव के प्रसिद्ध बैंगन भरता से अपने रिकॉर्ड अभियान की शुरुआत की थी. अब तक वे 33 सफल विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर चुके हैं और अमेरिका में होने वाले एक अन्य रिकॉर्ड प्रयास के बाद यवतमाल का ‘बुढी का चिवड़ा’ उनका 35वां विश्व रिकॉर्ड बनने जा रहा है. इस रिकॉर्ड की तैयारी के लिए विष्णु मनोहर ने स्वयं अजय भुजाडे से मुलाकात कर चिवड़े की मूल रेसिपी, मसालों का अनुपात और पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया की जानकारी ली है. रिकॉर्ड के दिन अजय भुजाडे भी उनके साथ मौजूद रहेंगे ताकि पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता बनी रहे.
* यवतमाल को मिलेगी नई पहचान
इस आयोजन के पीछे दाते कॉलेज से जुड़े पूर्व विद्यार्थियों की संस्था एस.एल. फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका है. संस्था के पदाधिकारियों का मानना है कि इस महाउपक्रम से यवतमाल की पहचान केवल कपास उत्पादक जिले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसकी खाद्य संस्कृति को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी.
* पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विश्व रिकॉर्ड सफल होता है तो ‘बुढी का चिवड़ा’ एक स्थानीय खाद्य उत्पाद से आगे बढ़कर महाराष्ट्र के प्रमुख खाद्य ब्रांडों में शामिल हो सकता है. इससे स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा. यवतमाल के नागरिकों में इस आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल है. शहरवासियों का मानना है कि जिस चिवड़े ने दशकों से उनकी पहचान बनाई है, वह अब दुनिया के सामने यवतमाल का स्वाद और संस्कृति पहुंचाने का माध्यम बनेगा. 27 अक्टूबर को होने वाला यह आयोजन न केवल एक विश्व रिकॉर्ड का प्रयास होगा, बल्कि यवतमाल की विरासत और गौरव का भी भव्य उत्सव साबित हो सकता है.





