सीजेपी की नई मांग ने सरकार के छुडाए पसीने

आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा

* सौरव दास बोले- आश्वासन के बावजूद छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई
* संसद मार्च व जंतर-मंतर पर प्रदर्शन दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग
नई दिल्ली/दि.27- नीट पेपर लीक मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन चलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया है कि आंदोलन समाप्त होने के समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद विभिन्न राज्यों में छात्रों और आंदोलनकारियों पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं.
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आंदोलनकारियों को हिरासत में लेने, गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की जानकारी मिल रही है. उन्होंने विशेष रूप से असम, बिहार और पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों से आ रही सूचनाएं चिंताजनक हैं. दास ने कहा कि सीजेपी ने अपना देशव्यापी आंदोलन केवल सरकार से मिले आश्वासनों के बाद ही स्थगित किया था. उनके अनुसार सरकार ने भरोसा दिलाया था कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ वर्तमान या भविष्य में कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि आंदोलनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं तो यह सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के विपरीत है और इससे छात्रों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है.
सीजेपी की ओर से कहा गया है कि, उसकी कानूनी टीम विभिन्न राज्यों के वकीलों के संपर्क में है और जिन छात्रों अथवा आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया है या जिनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. सौरव दास ने कहा कि संगठन ऐसे सभी मामलों की जानकारी एकत्र कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर अदालतों का भी रुख किया जाएगा.
* नड्डा और जितेंद्र सिंह से हस्तक्षेप की मांग
अपने बयान में दास ने भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा तथा केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से हस्तक्षेप की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को अपने आश्वासन का पालन करना चाहिए और जिन आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया है, उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करनी चाहिए. उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ दबाव अथवा प्रतिशोध की भावना से कोई कार्रवाई न की जाए.
* फिर गरमाई राजनीतिक बहस
सीजेपी के आरोपों के बाद एक बार फिर छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. विपक्षी दल पहले से ही छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और दर्ज मामलों को लेकर सरकार को घेर रहे हैं. वहीं सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विभिन्न राज्यों में आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों का मुद्दा और अधिक तूल पकड़ता है, तो यह संसद के मानसून सत्र में भी चर्चा का विषय बन सकता है. अब सभी की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और उन राज्यों में चल रही कानूनी प्रक्रियाओं पर टिकी है, जहां उगझ ने आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाया है.

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