नीट पेपर लीक आंदोलन पर देशभर में घमासान, सुप्रीम कोर्ट सख्त, छात्रों को राहत

सरकार, पुलिस और आंदोलनकारियों के दावों से बढ़ा राजनीतिक तापमान

नई दिल्ली/दि.28- नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर देशभर में भड़के छात्र आंदोलन ने अब संवैधानिक, राजनीतिक और कानूनी संघर्ष का रूप ले लिया है. एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को संवैधानिक अधिकार बताते हुए नाबालिग प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई का आदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने आंदोलन में बड़ी संख्या में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शामिल होने का दावा कर पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है. इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) सरकार पर समझौता तोड़ने का आरोप लगा रही है और दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे चुकी है. देश की राजनीति, न्यायपालिका और संसद के केंद्र में पहुंचे इस विवाद ने अब केवल एक परीक्षा या पेपर लीक के मुद्दे को पीछे छोड़ दिया है. मामला छात्र अधिकारों, पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार की बड़ी बहस में बदल गया है.
* सुप्रीम कोर्ट बोला – नाबालिग प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करे
– कहा – छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण था, जरुरत से ज्यादा बल प्रयोग करनेवालों पर कार्रवाई हो
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पहली नजर में छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण प्रतीत होता है और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. अदालत ने कहा कि यदि पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के संकेत देते हुए कहा कि 2018 में बनाए गए पुलिस प्रोटोकॉल की 2026 की परिस्थितियों में समीक्षा की जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने चार महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किए. जिनमें कहा गया कि, 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराई जाए. ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी, बॉडी कैमरा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए. दिल्ली सहित आठ राज्यों से जवाब तलब किया जाए तथा जिन प्रदर्शनकारियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ फिलहाल कठोर कार्रवाई न की जाए. अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के दावों में कितनी सच्चाई है. मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
* दिल्ली पुलिस बोली – प्रोटेस्ट में शामिल 2873 अपराधी, इनमें 990 पर गंभीर मामले
– दावा – कॉकरोच प्रदर्शन में हत्या के 101 आरोपी शामिल थे
जहां सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के अधिकारों पर जोर दिया, वहीं दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल 2,873 लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड मिला है. पुलिस के अनुसार, 101 लोग हत्या के मामलों में आरोपी हैं, 989 व्यक्तियों पर गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, कई लोगों पर पॉक्सो, यौन अपराध, लूट और अन्य संगीन धाराओं के मामले दर्ज हैं, पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और अन्य तकनीकी माध्यमों से की गई है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी शामिल थे. वहीं लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है. पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के लिए भी विभिन्न प्लेटफॉर्मों को नोटिस जारी किए हैं.
* धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले हुआ था समझौते का प्रयास?
– दावा – सरकार ने प्रधान का मंत्रालय बदलने का ऑफर दिया था
– कॉकरोच पार्टी इस्तीफे की मांग पर अडी रही, कहा- कोई समझौता नहीं करेंगे
इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले सरकार और आंदोलनकारियों के बीच समझौते की कोशिश हुई थी. सूत्रों के अनुसार सरकार ने यह प्रस्ताव रखा था कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी अन्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखा जाएगा. बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी नेताओं से संपर्क साधा था. हालांकि आंदोलनकारियों ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और साफ कहा कि उनकी मांग केवल मंत्रालय परिवर्तन नहीं, बल्कि धर्मेंद्र प्रधान का पूर्ण इस्तीफा है. आखिरकार बढ़ते जनदबाव, संसद में हंगामे और लगातार चल रहे आंदोलन के बीच 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. उनके स्थान पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
* छात्रों की कानूनी लड़ाई को मिलेगा सहारा, कपिल सिब्बल का बड़ा ऐलान
– कपिल सिब्बल कॉकरोच जनता पार्टी को देंगे एक करोड रुपए
– छात्रों को कानूनी मदद के लिए कॉकरोच फंड में योगदान, देशभर के वकीलों से भी मदद मांगेंगे
छात्र आंदोलन को नया बल देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सीजेपी द्वारा बनाए गए कानूनी सहायता कोष में एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की है. उन्होंने देशभर के वकीलों से भी इस फंड में सहयोग की अपील की है. सिब्बल ने कहा कि जिन छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. सीजेपी ने घोषणा की है कि एक विशेष वेबसाइट बनाई जाएगी जिसमें एफआईआर का सामना कर रहे छात्रों की जानकारी उपलब्ध होगी तथा देशभर के अधिवक्ता उनसे जुड़ सकेंगे.
* सरकार पर समझौता तोड़ने का आरोप, दोबारा आंदोलन की चेतावनी
सीजेपी ने आरोप लगाया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी विभिन्न राज्यों में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. संगठन का दावा है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार कर झूठे मामलों में फंसाया गया है. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि गिरफ्तार छात्रों को राहत नहीं मिली और पुलिस कार्रवाई नहीं रुकी तो आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा. हालांकि बिहार सरकार ने घोषणा की है कि 26 जुलाई शाम 6 बजे से पहले हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी.
* कॉकरोच प्रोटेस्ट में खाना खिलानेवाले जुनेद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
– जुनेद बोले – पुलिस ने 6 घंटे हिरासत में रखा, परिवार को परेशान कर रहे थे
जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराने वाले वालंटियर जुनैद मलिक ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जुनैद का आरोप है कि 24 जुलाई को पुलिस ने उन्हें रास्ते से उठाकर करीब छह घंटे तक हिरासत में रखा, पूछताछ की और बाद में सुनसान इलाके में छोड़ दिया. उन्होंने अपने परिवार को भी परेशान किए जाने का आरोप लगाया है. याचिका में पूरे मामले की न्यायिक जांच और परिवार के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है.
* मेटा ने पहले मोदी का वीडियो हटाया, अब रिस्टोर किया
– मेटा ने कहा – तकनीकी गडबडी से हटा, पीएम ने 23 जुलाई को छात्रों को मैसेज किया था
नीट पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से हटाए जाने पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. 23 जुलाई को जारी वीडियो में प्रधानमंत्री ने पेपर लीक को गंभीर अपराध बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी. बाद में वीडियो प्लेटफॉर्म से हट गया, जिस पर विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर सवाल उठे. कंपनी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण वीडियो अस्थायी रूप से हट गया था और उसे पुनः बहाल कर दिया गया है. सूत्रों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने इस मामले में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से भी जवाब मांगा है.
* लोकसभा में पेपर लीक से जुडे बिल पर चर्चा शुरु
– रिजिजू बोले – हम 10 घंटे भी चर्चा को तैयार, कांग्रेस की तरफ से राहुल-प्रियंका बोलेंगे
नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन की गूंज संसद तक पहुंच गई है. लोकसभा में मंगलवार को ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा शुरू हुई. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि सरकार इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और आवश्यकता पड़ने पर समय बढ़ाया जा सकता है. विपक्ष की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई सहित कई प्रमुख नेता चर्चा में भाग लेने वाले हैं. वहीं भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या समेत कई युवा सांसद अपनी बात रखेंगे.
* राजनीतिक संकट से राष्ट्रीय बहस तक
नीट पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली की खामियों का मुद्दा नहीं रह गया है. केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां, पुलिस की कार्रवाई, छात्रों के अधिकारों की बहस, संसद में चर्चा और देशव्यापी राजनीतिक ध्रुवीकरण ने इसे राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना दिया है. आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की जांच संबंधी टिप्पणियां, संसद में होने वाली बहस और राज्यों में दर्ज मामलों पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार का माध्यम बनता है या फिर देश की राजनीति में एक नए छात्र आंदोलन के रूप में दर्ज होता है.

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