जून-जुलाई के बीच प्राकृतिक आपदाओं से व्यापक तबाही

अमरावती संभाग में कहर बनकर बरसी बारिश

* अब तक 9 लोगों की मौत, 61 पशुओं की जान गई
* 88 गांव प्रभावित, 326 नागरिक प्रभावित, 609 घर-गोठे क्षतिग्रस्त
* 9,431 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित, राहत एवं मुआवजा वितरण जारी
* बिजली गिरने, बाढ़ और अतिवृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान अमरावती, यवतमाल और बुलढाणा जिलों में
अमरावती/दि.28 – मानसून की शुरुआत के साथ ही अमरावती संभाग के पांच जिलों-अमरावती, अकोला, यवतमाल, बुलढाणा और वाशिम-में प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई है. 1 जून से 24 जुलाई 2026 के बीच बिजली गिरने, बाढ़, अतिवृष्टि, तेज हवाओं और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. संभागीय प्रशासन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 9 लोगों की मौत हुई है, 13 लोग घायल हुए हैं, 61 पशुओं की मृत्यु हुई है तथा 9,431.54 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा 609 घर, गोठे और झोपड़ियां प्रभावित हुई हैं. रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मानसून के शुरुआती डेढ़ महीने में ही प्राकृतिक आपदाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक असर डाला है. किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है.
* आकाशीय बिजली बनी सबसे बड़ा खतरा, 9 लोगों की मौत
संभाग में प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई 9 मौतों में अधिकांश घटनाएं आकाशीय बिजली गिरने से जुड़ी हैं. अमरावती जिले में 5 तथा यवतमाल जिले में 4 लोगों की जान गई. मृतकों में रविंद्र रामभाऊ आवारे, प्रविण सुभाष चव्हाण, विलास मानकु तुमराम, भीमराव रामभाऊ काटकर, निखिल वाल्मिक भोयर, महेश गणेश आडे, सुनंदा नरेश सहारे, अशोक जगजीवनराव भोजने तथा गोपाल वासुदेवराव निवारे शामिल हैं. इनमें कई लोग खेतों में काम करते समय या खुले स्थानों पर बिजली गिरने की चपेट में आए. कुछ मामलों में बाढ़ के पानी में बह जाने से भी मौत हुई. प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की है.
* 32 लाख रुपये की सहायता मंजूर, एक प्रकरण अभी लंबित
प्राकृतिक आपदाओं में मृत्यु के कुल 9 मामलों में से 8 परिवारों को अब तक सहायता राशि वितरित की जा चुकी है. शासन द्वारा कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की गई है. एक मामले में दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण सहायता वितरण लंबित है. राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार पात्र परिवारों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.
* 13 लोग घायल, कई को अस्पताल में उपचार
प्राकृतिक आपदाओं में कुल 13 लोग घायल हुए हैं. इनमें अधिकांश घटनाएं बिजली गिरने और बारिश के दौरान हुए हादसों से जुड़ी हैं. अमरावती जिले में सर्वाधिक 11 लोग घायल हुए. घायलों को सरकारी अस्पतालों और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार उपलब्ध कराया गया. प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.
* 61 पशुओं की मौत, पशुपालकों को 5.70 लाख रुपये की राहत
मानसून के दौरान हुई प्राकृतिक आपदाओं में पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है. संभाग में कुल 61 पशुओं की मृत्यु दर्ज की गई है. इनमें बड़े दुधारू पशु, छोटे दुधारू पशु तथा कृषि कार्य में उपयोग होने वाले बैल शामिल हैं. जिला स्तर पर देखें तो यवतमाल में 23, अमरावती में 15, बुलढाणा में 14 तथा अन्य जिलों में पशुहानि के मामले सामने आए हैं. पशुपालकों को अब तक कुल 5 लाख 70 हजार रुपये की सहायता वितरित की जा चुकी है. अमरावती जिले में कुक्कुटपालन क्षेत्र को भी नुकसान हुआ है. यहां 785 मुर्गियों की मृत्यु दर्ज की गई, जिसके लिए संबंधित लाभार्थियों को सहायता राशि प्रदान की गई है.
* कृषि क्षेत्र को सबसे बड़ा झटका, 9,431 हेक्टेयर भूमि प्रभावित
प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार कुल 9,431.54 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है. खेतों में पानी भरने, मिट्टी बह जाने, गाद जमने और फसलों के नुकसान की घटनाएं बड़ी संख्या में सामने आई हैं. सबसे अधिक नुकसान बुलढाणा जिले में हुआ, जहां 8,072.08 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई. अकोला जिले में 1,242.60 हेक्टेयर, यवतमाल में 114.70 हेक्टेयर तथा अमरावती जिले में लगभग 12.87 हेक्टेयर भूमि को नुकसान पहुंचा. कृषि विभाग के अनुसार कई स्थानों पर खरीफ फसलों को गंभीर क्षति हुई है. सोयाबीन, कपास, तुअर और अन्य फसलें प्रभावित हुई हैं. अंतिम नुकसान का आकलन अभी जारी है.
* 88 गांव प्रभावित, 326 नागरिक प्रभावित
संभाग के 15 तालुकों के 88 गांव प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए हैं. इन गांवों के 126 परिवारों के 326 सदस्य सीधे तौर पर प्रभावित हुए. कई गांवों में निचले इलाकों में पानी भर गया, जबकि कुछ स्थानों पर नदी-नालों के उफान के कारण लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा. प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष टीमें तैनात की थीं.
* 609 घर, गोठे और झोपड़ियां क्षतिग्रस्त
अतिवृष्टि और तेज हवाओं के कारण बड़ी संख्या में मकानों और पशुशालाओं को भी नुकसान पहुंचा. संभाग में कुल 609 घर, गोठे और झोपड़ियां प्रभावित हुईं. अमरावती जिले में 317, यवतमाल में 134 तथा बुलढाणा में 155 संरचनाओं को नुकसान पहुंचा. इनमें कच्चे मकानों की संख्या सबसे अधिक है. कई घरों की दीवारें गिर गईं, छतें उड़ गईं तथा गोठों को भी क्षति पहुंची. राजस्व विभाग द्वारा पंचनामे की प्रक्रिया जारी है और पात्र परिवारों को चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता दी जा रही है.
* प्रशासन अलर्ट मोड पर, आगे भी भारी बारिश की आशंका
मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में भी विदर्भ के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. इसे देखते हुए संभागीय प्रशासन ने सभी जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा स्थानीय निकायों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. नदी-नालों के किनारे रहने वाले नागरिकों को सावधानी बरतने, खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर न जाने तथा बिजली चमकने के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है.
* किसानों और ग्रामीणों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा मानसून
हालांकि अच्छी बारिश से जलस्रोतों और सिंचाई परियोजनाओं को लाभ हुआ है, लेकिन कई क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. फसलों को हुए नुकसान, पशुधन की हानि और मकानों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. प्रशासन का कहना है कि सभी प्रभावित परिवारों को शासन की राहत नीति के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं किसान संगठनों ने मांग की है कि फसल नुकसान का शीघ्र सर्वेक्षण कर विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके. मानसून का मुख्य दौर अभी बाकी होने के कारण प्रशासन और ग्रामीणों दोनों की नजरें आगामी मौसम की स्थिति पर टिकी हुई हैं.

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