गड्ढे में डूबने से 3 वर्षीय बच्ची की मौत

चिखलदरा तहसील के कोरडा गांव की दर्दनाक घटना

* जल जीवन मिशन की लापरवाही ने ली मासूम की जान
* ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज
अमरावती/चिखलदरा/दि.29- केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव-गांव तक नल के जरिए शुद्ध पेयजल पहुंचाने का अभियान चल रहा है, लेकिन अमरावती जिले के चिखलदरा तहसील स्थित कोरडा गांव में इसी योजना के कार्य में बरती गई कथित लापरवाही ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली. तीन वर्षीय बच्ची नायरा संजू बुसुम की जल जीवन मिशन के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में गिरकर मौत हो गई. इस हृदयविदारक घटना से पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरडा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है. इसके लिए गांव के विभिन्न हिस्सों में गहरे गड्ढे खोदे गए थे. हाल ही में हुई बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया था. आरोप है कि कार्यस्थल पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए थे. मंगलवार को मासूम नायरा घर के आसपास खेल रही थी. खेलते-खेलते वह पानी से भरे इसी गड्ढे के पास पहुंच गई और अचानक उसमें गिर गई. जब तक परिजनों और ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. बच्ची को बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
* माता-पिता की इकलौती बेटी थी नायरा
यहां यह विशेष उल्लेखनिय है कि, नायरा अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी. ऐसे में अपनी एकमात्र बेटी की असमय मौत से नायरा के माता-पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. घटना के बाद बच्ची की मां और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई है. जिस मासूम की किलकारियों से घर और मोहल्ला गूंजता था, उसकी अचानक हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है.
* ग्रामस्थों का फूटा गुस्सा
घटना के बाद ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जमा हो गए और उन्होंने संबंधित ठेकेदार तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्यस्थल पर सुरक्षा के उपाय किए गए होते, चेतावनी बोर्ड लगाए गए होते या गड्ढों को सुरक्षित तरीके से ढंका गया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था. ग्रामस्थों ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं के कार्यों में सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
* सरकारी लापरवाही पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं में सुरक्षा प्रबंधन की पोल खोलती नजर आ रही है. कुछ दिनों पहले मुंबई में खुले मैनहोल में गिरकर एक व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया था. अब कोरडा गांव की यह घटना भी प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारों की गैरजिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जल जीवन मिशन जैसी जनहितकारी योजना का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन यदि कार्यों में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया तो ऐसी योजनाएं लोगों के लिए खतरा बन सकती हैं.
* जांच और एफआईआर की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है. साथ ही मृतक बच्ची के परिवार को आर्थिक सहायता और न्याय दिलाने की भी मांग उठाई जा रही है.
* प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
कोरडा गांव की यह दर्दनाक घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन आखिर कौन सुनिश्चित करेगा? यदि समय रहते जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं की गई तो ऐसे हादसे भविष्य में भी दोहराए जा सकते हैं. फिलहाल मासूम नायरा की मौत ने पूरे मेळघाट क्षेत्र को झकझोर दिया है और ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.

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