‘लाइफ सेवर क्यूआर कोड’ बनेगा गोल्डन आवर का साथी
हादसों में बचा सकता है जान

* जिला परिषद शिक्षक सुधीर कोलटेके की अभिनव डिजिटल संकल्पना
अमरावती /दि.31- सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर इलाज दिलाने और उनकी जान बचाने के उद्देश्य से अमरावती के जिला परिषद शिक्षक सुधीर कोलटेके ने ‘लाइफ सेवर क्यूआर कोड’ नामक एक अभिनव डिजिटल पहल शुरू की है. इस टठ कोड के जरिए दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में घायल व्यक्ति की महत्वपूर्ण जानकारी कुछ ही सेकंड में प्राप्त की जा सकती है, जिससे इलाज शुरू करने में होने वाली देरी कम हो सकती है.
इस क्यूआर कोड में व्यक्ति का नाम, ब्लड ग्रुप, आपातकालीन संपर्क नंबर, एलर्जी संबंधी जानकारी और मेडिकल हिस्ट्री जैसी आवश्यक जानकारियां सुरक्षित रहती हैं. एम्बुलेंस कर्मी, डॉक्टर, पुलिस या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन कर तुरंत यह जानकारी प्राप्त कर सकता है, जिससे सही उपचार शुरू करने में मदद मिलती है. यह पहल विशेष रूप से वाहन चालकों, वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए उपयोगी मानी जा रही है. सामाजिक संगठन और वाहन मालिक भी इस अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच बढ़ा सकते हैं.
* व्यक्तिगत अनुभव से मिला नया विचार
सुधीर कोलटेके ने बताया कि 23 सितंबर 2024 को मेलघाट में एक निजी बस दुर्घटना में वे स्वयं गंभीर रूप से घायल हुए थे. हादसे में उनके जबड़े की बड़ी सर्जरी हुई और उन्हें स्वस्थ होने में लगभग एक महीने का समय लगा. उसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की पहचान और मेडिकल जानकारी तुरंत उपलब्ध होना कितना जरूरी है. इसी अनुभव ने उन्हें ‘लाइफ सेवर क्यूआर कोड’ तैयार करने की प्रेरणा दी.
* गोल्डन आवर में हर सेकंड कीमती
कोलटेके का कहना है कि सड़क दुर्घटना के बाद का ‘गोल्डन आवर’ घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. यदि इस दौरान डॉक्टरों और बचाव दल को मरीज की सही जानकारी तुरंत मिल जाए तो इलाज में तेजी आती है और जीवन बचाने की संभावना बढ़ जाती है. उन्होंने इस पहल का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है. बताया जा रहा है कि पुणे में एक सड़क दुर्घटना के दौरान इस क्यूआर कोड का सफल उपयोग भी किया जा चुका है, जिसके बाद इस नवाचार की व्यापक सराहना हो रही है.





