ग्रांट के इस्तेमाल पर नज़र कौन रखेगा? स्कूलों में कितनी मैनेजमेंट कमेटियाँ हैं?

एसएमसी के गठन और जिम्मेदारियों के नियम स्पष्ट, फिर भी कई स्कूलों में बैठकें और विकास योजनाएं कागज़ों तक सीमित

अमरावती /दि.4– शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रत्येक सरकारी और अनुदानित स्कूल में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का गठन अनिवार्य है. इन समितियों का उद्देश्य स्कूल के विकास में अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करना, सरकारी अनुदान के उपयोग पर निगरानी रखना तथा विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है. हाल ही में समिति के गठन, सदस्य चयन, पुनर्नियुक्ति और अयोग्यता संबंधी दिशा-निर्देश स्पष्ट किए गए हैं. इसके बावजूद कई स्कूलों में समितियां केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं.
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के अधिकांश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में एसएमसी का गठन किया जा चुका है तथा इसकी नियमित समीक्षा भी की जा रही है. हालांकि, कई स्कूलों में समितियों की बैठकें समय पर नहीं हो रही हैं और स्कूल विकास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन भी नहीं हो पा रहा है. इसका असर शौचालय, पेयजल, परिसर सुरक्षा, कंपाउंड वॉल और कक्षाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दिखाई देता है.नई गाइडलाइन के अनुसार शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर एसएमसी का गठन अनिवार्य होगा. यदि किसी अभिभावक सदस्य को किसी आपराधिक मामले या नैतिक अध:पतन से जुड़े अपराध में दोषी ठहराया जाता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है.
राज्य उपाध्यक्ष, ए.बी. प्राथमिक शिक्षक संघ किरण पाटिल का कहना है कि सक्रिय एसएमसी स्कूलों के विकास की गति बढ़ा सकती है. वहीं प्राथमिक शिक्षक समिति के राज्य प्रतिनिधि राजेश सावरकर ने बताया कि सभी स्कूलों को समिति गठन और संचालन के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिससे कामकाज अधिक व्यवस्थित होगा.

*क्या है स्कूल मैनेजमेंट कमेटी?
-शिक्षा का अधिकार कानून के तहत गठित समिति.
– स्कूल के विकास में अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करती है.
– स्कूल प्रशासन और समाज के बीच समन्वय का काम करती है.

* कमेटी में कौन-कौन होते हैं?
मुख्याध्यापक यह पदसिद्ध सदस्य सचिव, अभिभावक प्रतिनिधि, शिक्षक प्रतिनिधि, स्थानीय स्वशासन संस्था के प्रतिनिधि.

* एसएमसी की प्रमुख जिम्मेदारियां
स्कूल विकास योजना तैयार करना, सरकारी अनुदान के उपयोग की निगरानी, विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं पर ध्यान देना,शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के सुझाव देना और स्कूल की नियमित गतिविधियों की समीक्षा करना.

* कब बनानी होती है एसएमसी?
– शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर गठन अनिवार्य.
– सदस्य चयन की प्रक्रिया समय पर पूरी करना आवश्यक.

* कब रद्द हो सकती है सदस्यता?
आपराधिक मामले में दोष सिद्ध होने पर, नैतिक अध:पतन से जुड़े अपराध में दोषी पाए जाने पर. जब एसएमसी का उद्देश्य स्कूलों की हर सुविधा और ग्रांट के उपयोग पर निगरानी रखना है, तो फिर कई स्कूलों में पेयजल, शौचालय, कंपाउंड वॉल और कक्षाओं जैसी मूलभूत समस्याएं आज भी क्यों बनी हुई हैं?

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