एशियाई खेलों में अमरावती की कुमकुम मोहोड और यशदीप भोगे की गोल्डन और रजत सफलता

अमरावती के खेल जगत की खुशी का पारावार नहीं

* अधिकारी से लेकर खिलाडी तक सभी बेहद प्रसन्न
* कल व्यक्तिगत गोल्ड के लिए निशाना साधेगी कुमकुम
* अंबा-एकवीरा देवी के चरणों में खेल प्रेमी लीन
अमरावती/दि.2- मणिबाई गुजराती हाईस्कूल की कापडिया जूनियर कॉलेज की छात्रा कुमकुम अनिल मोहोड तथा युवा तीरंदाज एवं छत्रपति पुरस्कार विजेता यशदीप भोगे ने आज अंबानगरी के खेल प्रेमियों का सीना चौडा कर दिया, जब एशियाई खेलों में तीरंदाजी के रिकर्व प्रकार में कुमकुम ने अपने साथी धीरज बोम्मादेवारा के साथ मिलकर गोल्ड मेडल जीता. वहीं यशदीप भोगे ने एशियाई खेलों में तीरंदाजी में रजत पदक जीता है. कुमकुम के इस ऐतिहासिक गोल्ड मेडल का समाचार दोपहर को अमरावती में मिलते ही खेल जगत, खिलाडी से लेकर पदाधिकारियों तक का खुशी का पारावार न रहा.
विशेषकर मणिबाई हाईस्कूल की प्रधान अध्यापिका अंजलि देव सहित समस्त स्टाफ ने अपार हर्ष व्यक्त किया है. दोनों की ऐतिहासिक सफलता से अमरावती का खेल जगत खुशी से फूला नहीं समाया. दोनों ने अत्यंत मध्यम वर्गीय परिवारों से होने के बावजूद तीरंदाजी में न केवल राष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया अपितु एशियाई खेलों में गोल्ड और सिल्वर लाकर समस्त संभाग का गौरव बढा दिया है.
गोल्डन गर्ल कुमकुम के पिता अनिल मोहोड ने बताया कि, कुमकुम की सफलता से उनकी पूरी गोसावी कॉलोनी गदगद है. उसी प्रकार गणमान्य के भी बधाई संदेश आ रहे हैं. उन्होंने शासन से खेलो इंडिया कार्यक्रम को कुमकुम मोहोड की सफलता का सहयोगी बताया. मोहोड ने बताया कि, गत चार वर्षों से कुमकुम विश्व विद्यालय के पास स्थित खेल संकुल में अभ्यास कर रही थी. उसके कोच प्रफुल्ल डांगे ने कुमकुम को मार्गदर्शन किया. बांस के धनुष्यबाण से प्रैक्टिस करने वाली कुमकुम कालांतर में राष्ट्रीय स्तर पर चुने जाने के बाद नए जमाने बो-एरो से प्रैक्टिस करने लगी. कुमकुम ने कुछ माह पहले तीरंदाजी के विश्व कम में भी सोने का तमगा अपनी साथी खिलाडियों के संग प्राप्त किया था. दीपिका कुमारी और अंकिता भगत उसकी साथी रही.

* मिठाई के डब्बे बनाते हैं पिताजी
कुमकुम मोहोड अपने माता-पिता की इकलौती संतान है. उसके पिता अनिल मोहोड नवाथे प्लॉट के गोसावी कॉलोनी निवास पर मिठाई बक्से बनाते हैं. वहीं माताजी रुपाली मोहोड गृहिणी है. अनिल मोहोड ने अमरावती मंडल से चर्चा में बताया कि, कोरोना के समय काफी निराशा हो गई थी. ऐसे में कुमकुम ने तीरंदाजी क्षेत्र में कदम रखा और सतत परिश्रम करती रही. उसे कालांतर में ओजीक्यू की स्पॉन्सरशिप्स मिली. जिससे तीरंदाजी खेल के साधन-सामग्री मेंटेन करना सुलभ हुआ. अनिल मोहोड ने बहुत स्पष्टता से कहा कि, उसकी सफलता में कोच प्रफुल्ल डांगे का योगदान महत्वपूर्ण रहा.

* भरोसे पर खरा उतरा यशदीप
पंजाबराव देशमुख लॉ कॉलेज के लाईब्रेरियन संजय भोगे के कनिष्ठ पुत्र यशदीप भोगे पर राज्य शासन द्वारा दिखाया गया विश्वास फलदायी रहा है. गत अगस्त माह में ही राज्य शासन ने यशदीप को विशेष सहायता के तौर पर 50 लाख और उनके कोच गणेश विश्वकर्मा को 5 लाख की विशेष सहायता दी थी. इस विश्वास पर शिव छत्रपति अवॉर्ड विजेता यशदीप बिल्कुल खरे उतरे. एशियाई खेलों के लिए अपने-आप को गत अनेक माह से उन्होंने समर्पित कर दिया था. जिससे आज रजत सफलता मिली है. उनकी माताजी का नाम सुवर्णा भोगे है, वे गृहिणी है. वहीं बडे भाई राजदीप है. यशदीप को भारतीय रेलवे ने अधिकारी के रुप में नियुक्त किया है.

* अब ओलंपिक मेडल की उम्मीद
यशदीप के सफल प्रशिक्षक गणेश विश्वकर्मा ने बताया कि, 11 वर्ष की आयु से यशदीप तीरंदाजी का प्रशिक्षण ले रहा है. यशदीप से अब अमरावती ही नहीं, समस्त भारत को ओलंपिक पदक की आस जागी है. ओलंपिक खेल वर्ष 2028 में अमेरीका के लॉस एंजील्स शहर में होने हैं. विश्वकर्मा ने बताया कि, पिछले वर्ष एशियाई चैम्पियनशिप में यशदीप ने गोल्ड मेडल जीता था. आज भी एशियाई खेलों में उसकी सफलता ने अमरावती को गदगद कर दिया है.

अमरावती का नाम विश्व पटल पर
मणिबाई गुजराती हाईस्कूल की प्रधानाध्यापिका अंजलि देव ने अपार खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि, आज कुमकुम मोहोड के कारण अमरावती का नाम विश्व पटल पर आ गया है. कुमकुम ने एशियाई खेलों में मात्र 17 बरस की आयु में सोने का तमगा जीतकर हम सभी को गौरवान्वित किया है. समस्त शाला प्रबंधन कुमकुम की गोल्डन सफलता से अभिभूत है.

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