अमरावती में मृतकों का प्रतिशत सर्वाधिक
8 माह में 73 लोगों की गई जान

* कई घायल हुए आजीवन दिव्यांग
* सडक दुर्घटनाओं का भयानक ब्यौरा उजागर
अमरावती/दि.2 – महाराष्ट्र में वाहनों की संख्या बढने के साथ सडक दुर्घटनाओं का आंकडा भी लगातार बढा है. राज्य में गत 8 माह में 10 हजार से अधिक रोड एक्सीडेंट दर्ज हुए हैं. अमरावती में जनवरी से अगस्त दौरान सडक हादसों की न केवल संख्या बढी है, बल्कि हादसों में मृतकों का आंकडा भी बढा है. इतना ही नहीं, तो सडक हादसा और काल-कलवित का प्रतिशत राज्य में सर्वाधिक 43 प्रतिशत अमरावती में ही रहा है. जिससे अमरावती जिले में सडक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब कडे और बडे कदम उठाए जाने की नितांत आवश्यकता देखी जा रही है. बता दें कि, आज तडके ही जिले के धामणगांव के पास भीषण सडक दुर्घटना में 7 देवी भक्तों की जान चली गई. यह बडा हादसा सभी को झकझोर गया है.
आंकडों में बताया गया कि, गत जनवरी-अगस्त दौरान अमरावती में 73 लोगों की मृत्यु सडक दुर्घटनाओं में हुई. वहीं पिछले वर्ष यह संख्या मात्र 51 थी. अधिकृत सूत्रों ने यह भी बताया कि, मृत्यु प्रतिशत के मामले में अमरावती के बाद अकोला का क्रमांक है. जहां 28 प्रतिशत लोगों की जान गई है. नागपुर में तुलना में घातक दुर्घटनाओं के बावजूद मृत्यु के आंकडे पर अंकुश लगाने में प्रयत्न काफी कुछ सफल रहे हैं. नागपुर में इस दौरान 156 लोगों की मृत्यु का आंकडा राज्य के पुलिस और आरटीओ ने दिया है. डाटा के अनुसार मुंबई में इस वर्ष 229, पुणे में 214, नवी मुंबई में 187, ठाणे में 175, नागपुर में 156 और छत्रपति संभाजी नगर में 140 लोगों की जान सडक दुर्घटनाओं में गई.
आंकडे यह भी बताते है कि, सडक हादसों में गंभीर घायलों की संख्या भी लगातार बढ रही है. 2021 में राज्य में 23 हजार लोग घायल हुए थे. 2025 में यह संख्या 42 प्रतिशत बढकर 32 हजार 800 को पार कर गई. कई बार गंभीर घायलों को समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण भी जान चली जाती है. स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा सुदृढ करने की आवश्यकता बताई जाती है.
अमरावती में लगातार वाहनों की संख्या बढ रही है, फिर वह दुपहिया हो या फोर विलर. उसी प्रकार दो माह पहले अमरावती में शिरस्त्राण अर्थात हेल्मेट की दुपहिया चालक को सख्ती की गई थी. लोगों के द्वारा उसका विरोध किए जाने और नाना प्रकार के तर्क दिए जाने से इस बंधन को शिथिल किया गया था. सभी देखते हैं कि, अमरावती में अब इक्का-दुक्का वाहन चालक ही हेल्मेट धारण किए होते हैं.





